इसराइल-ग़ज़ा संघर्ष में क्या जायज़ है और क्या नाजायज़?

    • Author, पॉल एडम्स
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

गज़ा पट्टी में मर रहे आम लोगों की बढ़ती संख्या को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की नाराज़गी के बीच इसराइल अपनी सैनिक कार्रवाई को वाजिब ठहराने की लगातार कोशिश कर रहा है.

जल्दबाज़ी में बुलाई जा रही प्रेस ब्रीफिंग में इसराइल के वरिष्ठ सैनिक अधिकारी अपनी सैनिक कार्रवाई के मक़सद और टाइमलाइन के बारे में बता रहे हैं और ये कह रहे हैं कि उनका अभियान 'अभी कुछ समय तक इसी तरह से जारी रह सकता' है.

पहले कुछ आँकड़ों पर गौर करते हैं. इसराइल ने कहा है कि उसने पहले हफ़्ते की कार्रवाई में 820 अलग-अलग ठिकानों को निशाना बनाया है. कुछ ठिकानों पर एक से ज़्यादा बार हमले किए गए हैं.

इसकी तुलना पिछले साल के आँकड़ों से करें तो ये बात समझ में आती है कि पिछले हफ़्ते हमने हिंसा का जो प्रचंड रूप देखा वो एक लंबी लड़ाई का हिस्सा है. इसराइल ने पिछले बरस गज़ा पट्टी में 180 ठिकानों पर हमले किए थे.

इसके जवाब में हमास और इस्लामिक जिहाद के चरमपंथियों ने इसराइल पर 3150 से भी ज़्यादा रॉकेट दागे जबकि थोड़ा और पीछे मुड़कर देखें तो साल 2019 में 2045 रॉकेट दागे गए थे.

हमास की 'मेट्रो'

इसराइल का सैनिक अभियान 'गार्डियन ऑफ़ द वॉल्स' की शुरुआत हमास के सुरंगों पर हमलों के साथ हुई. ये सुरंगें इसराइल की सीमा पर लगे बाड़े के करीब थीं.

इस घेरे के कुछ सौ मीटर के दायरे में इसराइली लोगों के घर हैं और इसराइल की दलील है कि वहाँ रह रहे लोगों की हिफाजत करना उनकी पहली प्राथमिकता है.

इसके बाद बारी आती हैं, उन चीज़ों की जो मिसाइलों से जुड़ी हुई हैं.

इनमें लॉन्चर्स हैं, मैनुफैक्चरिंग सेंटर्स हैं और फिर हमास के पूरे सैनिक ढांचे पर चौतरफा हमले की रणनीति अपनाई जाती है.

इसमें वो सुरंगें भी शामिल हैं जिन्हें इसराइली फौज 'मेट्रो' कहती है.

इसराइल डिफेंस फोर्सेज

गुरुवार रात जब इसराइल ने ज़बरदस्त बमबारी की शुरुआत की, तो डरे हुए आम लोग ज़मीनी हमले के डर से भाग खड़े हुए.

इसराइली अधिकारी इस कार्रवाई को अपने अभियान का अहम केंद्रबिंदु बताते हैं.

इसी के साथ फ़लस्तीनी लोगों की मौत का आँकड़ा अचानक तेज़ी से बढ़ जाता है.

लेकिन मरने वाले कौन लोग हैं, इसे लेकर अलग-अलग राय हैं और ये इस बात पर निर्भर करता है कि कहने वाला कौन है.

इसराइल डिफेंस फोर्सेज के प्रवक्ता जोनाथन कॉनरिकस का कहना है कि मारे गए 200 फलस्तीनी लोगों में से कम से कम 130 लड़ाके थे. वे इस अनुमान को सबसे न्यूनतम बताते हैं.

हिंसा में आम लोगों की मौत

इसमें कोई शक नहीं कि फलस्तीन के स्वास्थ्य विभाग ने जो आँकड़े दिए हैं, वो इसराइली आँकड़ों से मेल नहीं खाते हैं.

हमास के नियंत्रण वाले ग़ज़ा के बारे में फ़लस्तीन के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वहाँ मरने वाले सौ लोग औरतें और बच्चे थे.

फ़लस्तीनी स्वास्थ्य विभाग मारे गए चरमपंथियों के बारे में कुछ नहीं कहता है.

इसराइल इस बात को स्वीकार करता है कि इस हिंसा में आम लोग भी मारे गए हैं लेकिन उसका कहना है कि इसके लिए हमास ज़िम्मेदार हैं.

वो कहता है कि हमास ग़ज़ा के मासूम लोगों के आस-पास अपनी गतिविधियों को संचालित करता है.

इसराइल की दलील

'अल-जला' नाम की 11 मंज़िला इमारत के साथ जो कुछ हुआ, वो इसका उदाहरण है.

इस इमारत में अल-जज़ीरा, समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस का दफ़्तर था.

लेकिन इसराइल का कहना है कि वहाँ से हमास का दफ्तर संचालित होता था और उसके साजोसामान भी वहाँ रखे जाते थे.

पत्रकारों को घंटे भर पहले ये चेतावनी दी गई थी कि हमला होने वाला है ताकि वे वहाँ से निकल जाएँ. अब वो इमारत ज़मींदोज़ हो गई है.

इसराइल ये बात ज़ोर देकर कहता है कि इस इमारत पर हमला करने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं था.

मीडिया को सलाह

उसने ये भी कहा है कि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ, ये इस बात का उदाहरण भी है कि इसराइली मिलिट्री आम लोगों की जान बचाने के लिए किस हद तक जा सकती है.

इसराइली मिलिट्री के एक सीनियर कमांडर ने मीडिया को सलाह देते हुए कहा, "गज़ा में आप अपना दफ्तर हमास के पास किराए पर न लें. ये एक बुरा विचार है."

हमास की सुरंगें जिन्हें इसराइली फौज 'मेट्रो' कहती है पर हमले दूसरी समस्याओं को दावत दे रहे हैं.

रविवार सुबह इसराइल ने गज़ा के अल-रिमल इलाक़े में ज़बरदस्त हवाई हमले किए. इन हमलों में तीन रिहाइशी इमारतें ज़मींदोज़ हो गईं.

42 लोग मारे गए. इसराइल की ओर से ये अब तक का सबसे जानलेवा हमला था.

'इमारतें भी ज़मींदोज़ हो जाती हैं'

एक बार फिर इसराइल ने हमास पर इस हमले का दोष मढ़ा. उसके एक अधिकारी ने कहा टारगेट वो इमारतें नहीं थीं बल्कि उनके नीचे मौजूद सुरंगें थीं.

लेकिन जब किसी सुरंग का एक हिस्सा हवाई हमलों में ढह जाता है तो उसके आस-पास की इमारतें भी ज़मींदोज़ हो जाती हैं.

उस अधिकारी ने कहा, "वो दुर्भाग्यपूर्ण था. हम ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि वहाँ आखिर क्या हुआ."

सोमवार सुबह जब ग़ज़ा के लोग उठे तो वे सड़कों पर विस्फोट के बाद होने वाले गड्ढे खोज रहे थे.

उन्हें लगा कि अब इसराइल नागरिक ठिकानों पर हमले कर रहा है.

दुनिया के सबसे सघन और ग़रीब इलाक़ों में से एक

लेकिन इसराइल अपनी बात पर क़ायम था कि उसके निशाने पर वो भूमिगत सुरंगें थीं.

लेकिन इसका एक और पहलू भी है.

आप दुनिया के सबसे सघन और ग़रीब इलाक़ों में से एक में कोई लड़ाई कैसे लड़ेंगे, ख़ासकर तब जब आपका दुश्मन इसका फायदा उठाता हो?

आप अपनी आबादी को नुक़सान से कैसे बचाएँगे जब आप जो कुछ भी करेंगे, उसका असर दूसरी तरफ़ के मासूम लोगों पर पड़ेगा?

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