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मारवा सुलेहदोर: 'मुझे स्वेज़ नहर जाम करने का ज़िम्मेदार समझा गया'
- Author, जोशुआ चीटम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
बीते महीने मारवा सुलेहदोर ने कुछ अजीब देखा.
मीडिया में ख़बर फैली थी कि 'एवरगिवेन' नाम का एक जहाज़ स्वेज़ नहर में फँस गया है, जिस कारण दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्ग बाधित हो गया और कई जहाज़ ठप पड़ गए हैं.
जब मारवा ने अपना फ़ोन देखा तो उन्हें पता चला कि इंटरनेट पर इस तरह की अफ़वाह फैली हुई है कि इसके लिए वो ज़िम्मेदार हैं.
मिस्र की पहली महिला जहाज़ कप्तान मारवा कहती हैं, "ये ख़बरें देख कर मुझे झटका-सा लगा."
जिस वक्त स्वेज़ नहर का रास्ता बाधित हुआ था, उस वक्त सुलेहदोर वहां से सैंकड़ों मील दूर एलेक्ज़ेंड्रिया में 'आएडा-फ़ोर' नाम के जहाज़ में बतौर फर्स्ट मेट काम कर रही थीं.
मिस्र की मैरीटाइम सेफ्टी ऑथोरिटी का ये जहाज़ लाल सागर पर मौजूद एक लाइटहाउस तक ज़रूरत का सामान पहुंचाता है.
अरब लीग (कुछ अरब देशों ने साल 1945 में मिल ये क्षेत्रीय संगठन बनाया था) द्वारा चलाए जा रहे विश्वविद्यालय के अरब अकाडमी ऑफ़ साइंस, टेक्नॉलजी एंड मैरीटाइम ट्रासपोर्ट (एएएसटीएमटी) के छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए भी इस जहाज़ को काम में लाया जाता है.
इंटरनेट पर फैली फ़र्जी ख़बर में 'एवरगिवन' जहाज़ के स्वेज़ नहर में फंसने में मारवा की भूमिका के बारे में स्क्रीनशॉट शेयर किए जा रहे थे. ये ख़बरें संभवत: अरब न्यूज़ नाम की एक न्यूज़ वेबसाइट में छपी थी जिसमें कहा गया था कि स्वेज़ नहर में हुई इस घटना में वो शामिल हैं.
इस ख़बर में मारवा की एक तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था जिसे एडिट किया गया था.
यह तस्वीर 22 मार्च को अरब न्यूज़ की ही एक ख़बर में प्रकाशित हुई थी जो मारवा के मिस्र की पहली महिला जहाज़ कप्तान बनने के बारे में थी. मारवा की फ़र्जी तस्वीर को दर्जनों बार ट्विटर और फ़ेसबुक पर शेयर किया गया है.
'शायद महिला होने के कारण निशाना बनाया गया'
'एवरगिवेन' जहाज़ के फंसने के बारे में झूठी ख़बर फैलाने के लिए उनके नाम से कई फ़र्जी ट्विटर अकाउंट भी बनाए गए.
29 साल की मारवा सुलेहदोर ने बीबीसी से कहा कि उन्हें इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं है कि ये अफ़वाह किसने फैलाई और क्यों.
वो कहती हैं, "मुझे लगा कि मुझे निशाना बनाया गया है क्योंकि इस क्षेत्र में मैं एक सफल महिला हूं और मैं मिस्र से हूं. लेकिन मैं पुख्ता तौर पर ये नहीं कह सकती कि ऐसा क्यों किया गया होगा."
यह पहली बार नहीं है जब इस ऐतिहासिक रूप से पुरुष प्रधान इंडस्ट्री में मारवा को चुनौती का सामना करना पड़ा है. इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइज़ेशन के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो जहाज़ों पर काम करने वालों में मात्र दो फीसदी ही महिलाएं हैं.
मारवा कहती हैं कि उन्हें हमेशा से समंदर से प्यार था और जब उनके भाई एएएसटीएमटी में दाखिला लिया तो उन्हें भी मर्चेंट नेवी में जाने की प्रेरणा मिली. लेकिन उस वक्त एएएसटीएमटी में केवल पुरुषों को ही प्रवेश दिया जाता था.
इसके बावजूद मारवा ने दाखिले के लिए आवेदन किया. मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक की समीक्षा के बाद उन्हें यहां दाखिला मिला.
राष्ट्रपति ने किया था सम्मानित
सुलेहदोर कहती हैं कि पढ़ाई के दौरान उन्हें लगभग हर मोड़ पर भेदभाव का सामना करना पड़ा.
वो कहती हैं, "मेरे साथ पढ़ने वालों में अधिकतर ज़्यादा उम्र के पुरुष थे जो अलग-अलग सोच रखते थे. ऐसे में बातचीत करने के लिए समान सोच का व्यक्ति तलाशना मुश्किल था. अपनी मानसिक सेहत को बनाए रख कर इन सबसे अकेले गुज़रना बहुत बड़ी चुनौती था."
वो कहती हैं, "हमारे समाज में आज भी लोग ये स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं कि महिलाएं अपने परिवारों से दूर रह कर अकेले समंदर में काम कर सकती हैं. लेकिन जब आप वो काम करते हैं जिससे आपको प्यार होता है तो फिर इसके लिए दूसरों की इजाज़त लेना ज़रूरी नहीं होता."
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मारवा ने जहाज़ में फर्स्ट मेट के तौर पर काम किया. साल 2015 में जब चौड़े किए गए स्वेज़ नहर में पहली बार 'आएडा-फ़ोर' जहाज़ को उतारा गया तो मारवा को उसका कप्तान बनाया गया.
उस वक्त को मिस्र की सबसे युवा और पहली महिला कप्तान थीं जिन्होंने स्वेज़ नहर पार किया था. साल 2017 मिस्र में हुए महिला दिवस समारोह में राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल-सीसी ने उन्हें सम्मानित किया.
जब स्वेज़ नहर के ब्लॉक होने के बाद उनके नाम की अफ़वाहें उड़ीं तो उन्हें डर लगा कि इसका असर उनके काम पर पड़ सकता है.
वो कहती हैं, "ये फ़र्जी ख़बर अंग्रेज़ी में थी और इसलिए कई देशों में तेज़ी से फैल गई. मैंने इस ख़बर का खंडन करने की पूरी कोशिश की क्योंकि इससे मेरी प्रतिष्ठा को नुक़सान हो रहा था और इस मुक़ाम तक पहुंचने के लिए मैंने अब तक जो मेहनत की ये अफ़वाह उन सब पर पानी फेर रहा था."
हालांकि सुलेहदोर कहती हैं कि उन्हें जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली उससे उन्हें उत्साह मिला.
वो कहती हैं, "इन फ़र्जी ख़बर वाले लेख में कई कंमेंट थे जो नकारात्मक थे. लेकिन कई आम लोगों ने और मेरे साथ काम करने वालों में कई सकारात्मक कमेंट भी लिखे थे."
"मैंने उन पर ध्यान दिया जो मेरा उत्साह बढ़ा रहे थे. जो प्यार मुझे मिल रहा था उसने मेरे गुस्से को ख़त्म कर दिया और मुझे लगा कि मैं लोगों की आभारी हूं. ये बात भी सच है कि इसके बाद अब मुझे पहले से ज़्यादा लोग पहचानते हैं."
कप्तान की फुल रैंक पाने के लिए मारवा सुलेहदोर अगले महीने फाइनल परीक्षा देने वाली हैं. उन्हें उम्मीद है कि वो इस इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी.
वो कहती हैं, "जो महिलाएं इस इंडस्ट्री में आना चाहती हैं मैं उनसे कहना चाहती हूं कि जो काम आप करना चाहती हैं उसके लिए लड़ने से पीछे न हटें और नकारात्मक सोच को ख़ुद पर हावी न होने दें."
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