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बराक ओबामाः ग़लत सूचनाओं से अमेरिका बँट गया है, ट्रंप ने इसे हवा दी
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और डेमोक्रेट नेता बराक ओबामा ने कहा है कि अमेरिका आज चार साल पहले से भी ज़्यादा बंट गया है जब डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बने थे.
ओबामा का कहना है कि जो बाइडन की जीत इस विभाजन को कम करने की शुरूआत है लेकिन सिर्फ़ एक चुनाव इस बढ़ते ट्रेंड को दूर करने के लिए काफ़ी नहीं होगा.
ओबामा का इशारा 'कॉन्स्पिरेसी थ्योरी' के ट्रेंड को बदलने की ओर था जिनकी वजह से देश में विभाजन और गहरा गया है.
उन्होंने कहा कि ध्रुवीकरण के शिकार देश को सिर्फ़ नेताओं के फ़ैसलों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता बल्कि इसके लिए संरचनात्मक बदलाव की ज़रूरत है, लोगों को एक-दूसरे को सुनने की ज़रूरत है और बहस करने से पहले सार्वजनिक तथ्यों पर एकमत होने की ज़रूरत है.
कैसे अमरीका में बढ़ता गया विभाजन?
ओबामा ने बीबीसी आर्ट्स के लिए इतिहासकार डेविड ओलुसोगा को दिए इंटरव्यू में कहा कि ग्रामीण और शहरी अमेरिका के बीच गुस्सा और नाराज़गी, आप्रवासन, ग़ैर-बराबरी और षड्यंत्र सिद्धांतों को अमरीकी मीडिया संस्थानों ने बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया और इसमें सोशल मीडिया ने आग में घी का काम किया.
उन्होंने कहा, "इस वक्त हम बहुत विभाजित हैं, बेशक 2007 से भी ज़्यादा जब मैं राष्ट्रपति पद के लिए लड़ा और 2008 में चुनाव जीता."
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उनके मुताबिक़ इसकी कुछ वजह ट्रंप का अपनी राजनीति के लिए उनके प्रशंसकों का विभाजन होते देना भी रहा.
उन्होंने कहा कि जिस एक वजह ने इसमें सबसे ज़्यादा भूमिका निभाई है वो है इंटरनेट पर ग़लत जानकारी का फैलना जहां तथ्यों की कोई परवाह नहीं की जाती.
ओबामा ने कहा, "लाखों लोग हैं जिन्होंने इस बात को मान लिया कि जो बाइडन समाजवादी हैं, जिन्होंने इस बात को मान लिया कि हिलेरी क्लिंटन किसी ऐसी साज़िश का हिस्सा हैं जो बच्चों का यौन शोषण करने वाले गिरोह में शामिल है."
ओबामा उस फ़ेक कहानी की बात कर रहे थे जिसमें ये कहा गया था कि डेमोक्रेट नेता वाशिंगटन के एक पिज़्ज़ा रेस्टोरेंट में पीडोफाइल रिंग चला रहे थे.
ओबामा ने कहा कि हाल के सालों में कुछ मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों ने फ़ैक्ट चैकिंग शुरू की है ताकि ऑनलाइन ग़लत जानकारी को फैलने से रोका जा सके. लेकिन अक्सर ये कोशिश अपर्याप्त रह जाती है क्योंकि जब तक सच बाहर आता है तब तक झूठ दुनिया भर में फैल चुका होता है.
उन्होंने कहा कि इस विभाजन के पीछे सामाजिक और आर्थिक कारण भी काम कर रहे हैं जैसे शहरी और ग्रामीण अमेरिका के बीच असामनता. ऐसे मुद्दे ब्रिटेन और बाकी दुनिया में भी उठ रहे हैं क्योंकि लोगों को लगता है कि अर्थव्यवस्था की सीढ़ी पर उनकी पकड़ छूटती जा रही है और इसलिए प्रतिक्रिया आती है और कहा जाता है कि ये इस ग्रुप की ग़लती है या उस ग्रुप की ग़लती है.
'ब्लैक लाइव्स मैटर' पर क्या कहा ओबामा ने
अमेरिका के पहले ब्लैक नस्ल के राष्ट्रपति बन इतिहास रचने वाले ओबामा का कहना है कि नस्ल का मुद्दा अमेरिका के इतिहास में एक संवेदनशील मुद्दा रहा है.
उन्होंने कहा, "पुलिस हिरासत में एक ब्लैक व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मृत्यु के बाद जो घटनाक्रम हुआ और ना सिर्फ अमेरिका बल्कि दुनिया भर से जिस तरह से प्रतिक्रिया आई, उसने दुख और उम्मीद दोनों को जन्म दिया."
"दुख इसलिए क्योंकि हमारी न्याय व्यवस्था में अब भी नस्लवाद और पक्षपात की इतनी प्रबल भूमिका है और उम्मीद इसलिए क्योंकि आपने विरोध प्रदर्शन होते देखा, इसे लेकर दिलचस्पी देखी, और ये शांतिपूर्ण था."
उन्होंने कहा कि ये महत्वपूर्ण था क्योंकि इन प्रदर्शनों में हर नस्ल के लोग शरीक हुए.
"वे समुदाय भी जहां बहुत कम ब्लैक लोग हैं, वे भी जाकर 'ब्लैक लाइव्स मैटर' कह रहे थे और मान रहे थे कि बदलाव आना चाहिए.
ओबामा ने अपनी किताब 'ए प्रॉमिस लैंड' को लेकर बीबीसी से बात की जो 17 नवंबर को रिलीज़ होने वाली है. ये किताब उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के बारे में है.
'ग़लत सूचना के साथ समस्या ये है कि वह लोकप्रिय होती है'
- मरिआना स्प्रिंग, बीबीसी डिसइंफ़ॉर्मेशन रिपोर्टर
इस साल अमेरिकी चुनावों में कॉन्सपिरेसी थ्योरी यानी साज़िश बताने वाली बातें ख़ूब वायरल हुईं और ट्रंप के कार्यकाल में ऐसी सोच छाई रही.
वो इसलिए क्योंकि अब इस तरह की कॉन्सपिरेसी थ्योरी के साथ फैलाई गई ऑनलाइन ग़लत सूचना इंटरनेट के किसी अंधेरे कोने तक सीमित नहीं है.
अब इन सूचनाओं को बड़ी हस्तियाँ भी फैलाती हैं जिनके बहुत सारे प्रशंसक हैं, इसमें व्हाइट हाउस के लोग भी शामिल हैं.
इंटरनेट की ध्रुवीकृत दुनिया जहां सब कुछ अब एक राय है ना कि तथ्य और सब अपना अपना गुट चुन लेते हैं, वहां षडयंत्रों और ग़लत सूचनाओं के लिए उपजाऊ ज़मीन तैयार हुई है.
सोशल मीडिया को रिसर्च के तौर पर इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है और वे भ्रामक निष्कर्ष पर पहुंचते है. ये तब और ज़्यादा बढ़ जाता है जब पक्षपाती मीडिया एकतरफ़ा रिपोर्ट करती है.
जैसा कि बराक ओबामा ने भी कहा, ये झूठ और भ्रामक दावे जब मीडिया और सार्वजनिक हस्तियाँ फैलाते हैं तब ये सच से ज़्यादा लोकप्रिय हो जाते हैं. फिर इसका हल इससे नहीं हो सकता कि आप सच सामने ला दें. ये भी समझना ज़रूरी है कि क्यों लोग ऑनलाइन षडयंत्रों के शिकार हो जाते हैं और बार-बार उसकी चपेट में आते हैं.
मैं अक्सर ऐसे लोगों से बात करती हूं जो ऑनलाइन कॉन्सपिरेसी थ्योरी से प्रभावित रहे हैं और जानने की कोशिश करती हूं कि इससे क्या नुक़सान होता है और किस तरह का विभाजन पैदा होता है. उससे पता चलता है कि इस नुक़सान की भरपाई कितनी मुश्किल और जटिल है.
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