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चीन-अमरीका विवाद यानी दुनिया के लिए बहुत बड़ा ख़तरा: विश्व बैंक के पूर्व प्रमुख
- Author, शरनजीत लॉल
- पदनाम, बीबीसी एशिया बिज़नेस रिपोर्ट
विश्व बैंक के पूर्व अध्यक्ष रॉबर्ट ज़ोएलिक ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा संकट से निपटने के लिए देशों ने साथ मिलकर काम नहीं किया तो दुनिया फिर से 1900 के दौर में पहुंच जाएगी.
रॉबर्ट ज़ोएलिक ने अमरीका और चीन के बीच की तक़रार को वैश्विक अर्थव्यवस्था के उबरने के लिए गंभीर ख़तरा बताया.
ज़ोएलिक अमरीका के सबसे वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों में से एक हैं. वो अमरीका के छह राष्ट्रपतियों के सलाहकार रहे हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा कि सिर्फ आपसी सहयोग से ही वैश्विक अर्थव्यवस्था, मंदी से उभर सकती है. अमरीका के विदेश उप मंत्री भी रह चुके ज़ोएलिक कहते हैं कि उनकी सबसे बड़ी चिंता अमरीका और चीन के बीच बढ़ रहा तनाव है.
उन्होंने बीबीसी के एशिया बिज़नेस रिपोर्ट से कहा कि "मुझे लगता है ये रिश्ते आज बहुत निचले स्तर पर हैं और मुझे नहीं लगता कि हमें पता है ये कब कहां जाकर रुकेगा. ये बहुत ख़तरनाक स्थिति है."
ज़ोएलिक ने चेतावनी दी कि यदि देश वैश्वीकरण से पीछे हटने लगे और राष्ट्रवादी हितों को आगे बढ़ाने लगे तो "दुनिया फिर से 1900 की तरह दिख सकती है जब महाशक्तियां प्रतिस्पर्धा कर रही थीं."
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आर्थिक संकट के दौर में थे अध्यक्ष
ज़ोएलिक 2007 से 2012 के बीच विश्व बैंक के अध्यक्ष रहे थे. ये वो दौर था जब दुनिया आर्थिक संकट से घिरी हुई थी.
संस्था के प्रमुख के तौर पर उन्होंने वित्तीय मंदी से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और दुनिया भर की सरकारों के साथ मिलकर काम किया था.
वो कहते हैं, "2008-09 का वित्तीय संकट बहुत गंभीर था लेकिन जी20 और केंद्रीय बैंकों ने आपस में सहयोग किया. राष्ट्रपति बुश और तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा (तत्कालीन ब्रिटेन के प्रधान मंत्री) गॉर्डन ब्राउन के साथ अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का हिस्सा थे."
ज़ोएलिक मानते हैं कि महामारी का हल निकलाने के लिए अमरीका को चीन के साथ मिलकर काम करना चाहिए ना कि उन्हें उकसाना चाहिए.
ट्रंप के विरोधी
वो आरोप लगाते हैं कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की वजह से सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ.
ज़ोएलिक ने पूर्व रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों जॉर्ज डब्ल्यू बुश और जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश के साथ काम किया है. लेकिन वो साफ़ कहते हैं कि वो मौजूदा रिपब्लिकन राष्ट्रपति को पसंद नहीं करते.
वो कहते हैं, "मैं शुरू से ही ट्रंप का विरोधी हूं...ना सिर्फ उनकी नीतियों की वजह से बल्कि मुझे लगता है कि उनके चरित्र में भी ख़ामियां हैं."
"मैं इस बात से चिंतित था कि वो संस्थानों और संविधान के साथ क्या करेंगे और हम यही देख रहे हैं, और महामारी में, हम एक और आयाम देख रहे हैं, जो कि सक्षमता का सवाल है."
उनका मानना है कि अमरीका के गंठबंधनों और संरक्षणवाद को लेकर ट्रंप का अविश्वास एशिया की चिंताओं में जुड़ गया है. और ये ऐसे वक़्त में हुआ है जब क्षेत्र पर चीन का दबदबा बढ़ता जा रहा है.
इस विषय पर उन्होंने अपनी नई किताब अमरीका इन द वर्ल्ड: ए हिस्ट्री ऑफ यूएस डिप्लोमेसी एंड फॉरेन पॉलिसी में भी बात की है.
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