पाकिस्तान की जगजीत कौर एक साल बाद लौटेंगी ससुराल

एक साल बाद अपने ससुराल लौटेंगी पाकिस्तान की जगजीत कौर

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    • Author, शुमाइला जाफ़री
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान से

लाहौर हाई कोर्ट ने जगजीत कौर उर्फ़ आयशा को आश्रय गृह से रिहा किए जाने के आदेश दे दिए हैं. उन्हें अपने मुस्लिम पति के साथ जाने की अनुमति मिल गई है. जगजीत कौर इस आश्रय गृह में एक साल से रह रही थीं.

जगजीत कौर के माता-पिता का दावा है कि उनकी बेटी का शादी के बाद उनके पति मोहम्मद हसन ने जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया गया. 19 साल की जगजीत कौर का नाम बदलकर आयशा रख दिया गया था.

हालांकि, जगजीत कौर ने कोर्ट में बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया है और हसन से शादी की है. उन्होंने कोर्ट से कहा कि वो अपने ससुराल में ही रहना चाहती हैं.

कोर्ट का ये फैसला जगजीत कौर की उस याचिका पर आया है जो उन्होंने ख़ुद को आश्रय गृह में “गैरक़ानूनी तरीक़े से रोक कर रखने” के ख़िलाफ़ दायर की थी. जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर उनके परिवार के दावे के बाद उन्हें प्रशासन की ओर से इस आश्रय गृह में रखा गया था.

एक साल बाद अपने ससुराल लौटेंगी पाकिस्तान की जगजीत कौर

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लिखित आदेश का इंतज़ार

जगजीत कौर को इस फैसले के बाद आश्रय गृह वापस भेज दिया गया है जहां वो लिखित आदेश मिलने तक रहेंगी.

जगजीत कौर के परिवार ने कोर्ट में दलील दी थी कि वो नाबालिग हैं और उनकी उम्र 15 साल है. इसके लिए परिवार ने स्कूल का सर्टिफिकेट भी पेश किया था.

लेकिन, बचाव पक्ष ने उस सर्टिफिकेट को चुनौती देते हुए जगजीत के पिता के नेशनल डाटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के रिकॉर्ड पेश किये जिनके मुताबिक वो 19 साल की हैं.

कोर्ट के निर्देश पर जगजीत की जैविक उम्र पता करने के लिए एक मेडिकल टेस्ट भी किया गया. इसमें भी आया कि जगजीत क़ानूनी रूप से बालिग उम्र में हैं.

जगजीत कौर के भाई मनमोहन सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उनके परिवार को अदालत परिसर में जगजीत के साथ बात करने का मौका नहीं मिला. उन्होंने दावा किया कि उनकी बहन दबाव में है इसलिए सही फैसला नहीं कर पा रही हैं.

उन्होंने बताया कि उनका परिवार लाहौर हाई कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करेगा. साथ ही सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेगा.

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क्या है पूरा मामला

जगजीत उर्फ़ आयशा के पति मोहम्मद हसन ननकाना साहिब के रहने वाले हैं और ये दोनों पड़ोसी हैं. पिछले साल, जगजीत ने अपने पिता की सहमति के बिना शादी कर ली थी. उनके पिता एक सिख पुजारी हैं. वो एक मुसलमान लड़के के साथ उनकी शादी नहीं कराना चाहते थे.

पिछले साल अगस्त में जगजीत के परिवार ने आरोप लगाया था कि जगजीत का अपहरण कर उनसे जबरन इस्लाम धर्म स्वीकार कराया गया है. उन्होंने मोहम्मद हसन और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई थी.

यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और देश में सिख और मुस्लिम समुदायों के बीच के सौहार्दपूर्ण संबंधों में तनाव आ गया. पाकिस्तान में कुछ सिख समुदाय के लोग इससे काफ़ी नाराज़ हो गए.

दुनियाभर के सिख नेताओं से भी ऐसी ही प्रतिक्रिया मिलने लगी और जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर विरोध प्रदर्शन होने लगे. उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से पाकिस्तान में अल्पसंख्यक सिख समुदाय की सुरक्षा करने की अपील भी की.

यहां तक कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी इस मामले में शामिल हो गए और परिवार को मदद की पेशकश की.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, “कई दिनों के बावजूद भी इमरान ख़ान जगजीत कौर की मदद करने में असफल हुए हैं. उनका जबरन धर्म परिवर्तन हुआ और इच्छा के ख़िलाफ़ शादी कर दी गई. मैं उस युवा लड़की को अपना पूरा समर्थन देना चाहूंगा और उन्हें और उनके परिवार को पंजाब लाने में मुझे खुशी होगी.”

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सरकार का दख़ल

बाद में, पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के राज्यपाल चौधरी मोहम्मद सर्वर ने इस मामले में दखल दिया. उन्होंने दोनों परिवारों और सिख समुदाय के 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की. बाद में उन्होंने घोषणा की कि मामले को आपसी समझदारी से सुलझा लिया गया है.

चौधरी मोहम्मद सर्वर ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से मामला सुलझाने के लिए राज्यपाल आवास में आने को लेकर दोनों परिवारों का शुक्रिया अदा किया था.

उन्होंने लिखा था, “पाकिस्तानी और सिख समुदाय के लिए बड़ी ख़बर. ननकाना वाली लड़की का मसला आपसी समझदारी से सुलझ गया. दोनों परिवार इससे संतुष्ट हैं. लड़की सुरक्षित है और अपने परिवार के संपर्क में है. हम पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुनिश्चित करना ज़ारी रखेंगे.”

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जगजीत कौर उर्फ़ आयशा को एक आश्रय गृह भेज दिया गया था जहां वो लगभग एक साल से रह रही थीं. उस दौरान लाहौर हाई कोर्ट में उनके मामले की सुनवाई भी चल रही थी.

जब ननकाना साहिब में गुरुद्वारा जन्म स्थान को घेर लिया गया.

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इमेज कैप्शन, जब ननकाना साहिब में गुरुद्वारा जन्म स्थान को घेर लिया गया.

ये मामला जनवरी में भी गरमाया था जब कुछ लोगों ने ननकाना साहिब में गुरुद्वारा जन्म स्थान को घेर लिया था.

ये विरोध प्रदर्शन जगजीत के पति मोहम्मद हसन के घर पर पड़े पुलिस छापे के ख़िलाफ़ किया गया था.

इस प्रदर्शन का नेतृत्व उनके भाई इमरान चिश्ती कर रहे थे जिन्हें बाद में गिरफ़्तार कर लिया गया.

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