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चीन, रूस और ईरान अमरीकी चुनाव में 'हस्तक्षेप' कर रहे
अमरीकी खुफ़िया एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि चीन, रूस और ईरान इस साल होने वाले अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने वाले देशों में शामिल हैं.
अमरीका के नेशनल काउंटर इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी सेंटर के निदेशक विलियम एवानीना ने कहा है कि विदेशी ताक़तें अमरीका में वोटिंग को प्रभावित करने के लिए 'ख़ुफ़िया और अधिक प्रभाव डालने वाले तरीकों' का उपयोग कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि "ये देश चाहते हैं कि अमरीकी चुनाव के नतीजे 'उनकी प्राथमिकताओं के अनुसार' हों, इसलिए अमरीकी मतदाताओं की प्राथमिकताओं को प्रभावित करने कोशिश की जा रही है. इसी नज़रिये से अमरीका में हलचल पैदा करने की भी कोशिशें हो रही हैं और इन देशों द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि अमरीकी लोगों में यहाँ की लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा किया जाये."
हालांकि, काउंटर इंटेलिजेंस चीफ़ ने यह भी बोला है कि "हमारे विरोधियों के लिए अमरीकी चुनाव के नतीजों को बहुत ज़्यादा प्रभावित कर पाना मुश्किल होगा."
कौन-सा देश क्या सोचता है?
अमरीकी खुफ़िया एजेंसी के अनुसार, '2020 में राष्ट्रपति पद का चुनाव कौन जीते?' इसे लेकर अलग-अलग देशों की अलग-अलग प्राथमिकताएं हैं. लेकिन एजेंसी चुनाव पर चीन, रूस और ईरान के नज़रिये को लेकर फ़िक्रमंद है.
चीन चाहता है कि राष्ट्रपति ट्रंप दोबारा चुनाव ना जीत पायें, क्योंकि चीनी सरकार उन्हें स्वभाव से 'अप्रत्याशित और मन की करने वाला' मानती है. यही वजह है कि चीन अमरीकी चुनाव से पहले वोटों को प्रभावित करने की अपनी क्षमता को बढ़ा रहा है.
रूस डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जो बाइडन और उन सभी नेताओं की उम्मीदवारी को 'बदनाम' करना चाहता है जो कथित तौर पर रूस विरोधी नज़रिया रखते हैं. विलियम एवानीना के अनुसार, रूस से संबंध रखने वाले कुछ अभिनेता राष्ट्रपति ट्रंप को जीतते देखना चाहते हैं और वो सोशल मीडिया के साथ-साथ रूसी टीवी चैनलों पर भी ट्रंप के पक्ष में माहौल बना रहे हैं.
ईरान चाहता है कि अमरीका की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर किया जाये. वो राष्ट्रपति ट्रंप को कमज़ोर देखना चाहता है और देश में तोड़ना चाहता है. इसी उद्देश्य से ईरान दुष्प्रचार कर रहा है, कई फ़र्ज़ी ख़बरें उड़ा रहा है और अमरीका-विरोधी कंटेंट को इंटरनेट पर डाल रहा है, क्योंकि ईरान जानता है कि ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने से उस पर अमरीका का दबाव और बढ़ सकता है.
'चीन और रूस मेरी जीत क्यों चाहेंगे'
अमरीकी खुफ़िया एजेंसी के अन्य प्रमुख भी यह कह चुके हैं कि "2016 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने हस्तक्षेप किया था और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान को मदद की थी." हालांकि रूस इन आरोपों से इनकार करता रहा है और इन्हें बेबुनियाद बताता है.
शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में जब अमरीकी राष्ट्रपति से पूछा गया कि "उन्होंने चुनाव में बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए क्या योजना बनाई है?" तो डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि "उनका प्रशासन इस मुद्दे को बेहद बारीकी से देख रहा है."
प्रेस वार्ता में राष्ट्रपति ट्रंप ने यह तो माना कि रूस इस साल के चुनाव में भी हस्तक्षेप कर सकता है और वोटों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है. लेकिन उन्होंने इस बात को बिल्कुल नहीं माना कि "उन्हें चुनाव जिताने में रूस की कोई दिलचस्पी होगी."
उन्होंने कहा कि "रूस शायद उन अंतिम देशों में से एक होगा जो मुझे दोबारा राष्ट्रपति कार्यालय में देखना चाहेगा क्योंकि रूस के प्रति जितना सख़्त मैं रहा हूँ, शायद ही कभी कोई रहा हो."
उन्होंने कहा कि "चीन ज़रूर चाहेगा कि मैं चुनाव हार जाऊं." साथ ही यह भी कहा कि "अगर जो बाइडन चुनाव जीते तो चीनी इस देश के मालिक बन जायेंगे."
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने चिंता ज़ाहिर की थी कि "अगर चुनाव में मेल-इन या पोस्टल बैलट के ज़रिये ज़्यादा वोटिंग होती है तो उससे धांधली की संभावना रहेगी." राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान के बाद ही खुफ़िया एजेंसी के प्रमुख विलियम एवानीना ने ताज़ा चेतावनी दी है.
हालांकि कुछ लोग खुफ़िया एजेंसी की चेतावनी को डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों द्वारा की गई शिक़ायतों के असर के तौर पर भी देख रहे हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने कहा था कि "अमरीकी खुफ़िया एजेंसियां यह जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रही हैं कि कौन से देश इस साल के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं."
अमरीकी संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स' की स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने हाल ही में कहा था कि कौन-कौन अमरीकी मतदाताओं के वोट को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है, इससे संबंधित खुफ़िया जानकारी अमरीकी लोगों को उपलब्ध होनी चाहिए.
2020 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से एक बार फिर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव में दोबारा जीतने का विश्वास रखते हैं. वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व उप-राष्ट्रपति जो बाइडन उनके सामने हैं.
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