दक्षिण कोरिया में अमरीकी राजदूत की मूँछ से खड़ा हुआ हंगामा

किसी की मूँछों पर क्या विवाद हो सकता है? और अगर विवाद ख़त्म करने के लिए किसी को अपनी मूँछों की क़ुर्बानी देनी पड़े तो आप क्या कहेंगे?

ये मामला दक्षिण कोरिया का है जहां अमरीकी राजदूत हैरी हैरिस के क्लीनशेव करा लेने के बाद उम्मीद की जा रही है कि मूँछों को लेकर जारी विवाद थम जाएगा. दक्षिण कोरिया और अमरीका के बीच सैन्य संबंध हैं.

दक्षिण कोरिया में अमरीका के 28,500 सैनिक तैनात हैं लेकिन बीते सालों में दोनों देशों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं. विवाद की वजह उत्तर कोरिया को लेकर दोनों देशों का अलग-अलग रवैया और सुरक्षा खर्च में हिस्सेदारी का मुद्दा है.

इन हालात में हैरी दक्षिण कोरिया में विवादों के केंद्र में रहे हैं. उन पर मनमाने तरीक़े से काम करने का आरोप लगता रहा है और यहां तक कि उनकी मूँछें भी बहस के केंद्र में आ गई थीं. सप्ताहांत पर हैरी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया जिसमें उन्हें एक पारंपरिक कोरियाई सैलून में क्लीनशेव होते हुए देखा जा सकता है.

वीडियो में हैरी ने कहा है कि सोल की गर्मियों में कोरोना महामारी की वजह से मास्क पहनने में समस्या आ रही थी, इसलिए उन्होंने क्लीनशेव कराने का फ़ैसला किया है.

इससे पहले जनवरी के महीने में कोरियाई प्रायद्वीप में जारी तनाव के बीच राजधानी सोल में तैनात अमरीकी राजदूत हैरी हैरिस की मूँछों का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया था.

अमरीकी नौसेना के एडमिरल रह चुके हैरिस पर तब ये आरोप लगे थे कि उन्होंने मूँछें बढ़ाकर अपने मेज़बानों का अपमान किया है.

बहुत से कोरियाई लोगों को हैरिस की मूँछें दक्षिण कोरिया पर जापानी औपनिवेशिक दौर की याद दिला रही थीं और इसकी वजह हैरिस की पारिवारिक पृष्ठभूमि थी. वे जापानी मां और अमरीकी पिता की संतान हैं. हैरिस के पिता अमरीकी नौसेना में अधिकारी थे.

साल 1910 से 1945 तक कोरियाई प्रायद्वीप पर शासन करने वाले जापान को लेकर आज भी दक्षिण कोरिया में असंतोष का भाव रहता है.

हैरिस जुलाई, 2018 से ही सोल में तैनात हैं. उनके दक्षिण कोरिया में आते ही सोशल मीडिया पर ये कहा जाने लगा था कि औपनिवेशिक दौर में सभी आठों गवर्नर जनरल की ऐसी ही मूँछें थीं.

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