चीन अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है - एफ़बीआई निदेशक

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अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई के निदेशक ने कहा है कि चीन अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है.
एफ़बीआई के डायरेक्टर क्रिस्टोफ़र रे ने वाशिंगटन के हडसन इंस्टीच्यूट में चीन सरकार की जासूसी और सूचनाओं की चोरी को अमरीका के भविष्य के लिए "अब तक का सबसे बड़ा दीर्घकालीन ख़तरा" बताया.
उन्होंने कहा कि चीन कई स्तरों पर अभियान चला रहा है, उसने विदेशों में रहने वाले चीनी नागरिकों को निशाना बनाना शुरू किया है, उन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर रहा है और अमरीका के कोरोना वायरस शोध को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहा है.
क्रिस्टोफ़र रे ने कहा,"ये सबसे बड़ा दांव है. चीन किसी भी तरह दुनिया का अकेला सुपरपावर बनने की कोशिश कर रहा है."
एफ़बीआई निदेशक ने बताया कि चीन के इन ख़तरों के बारे में आने वाले सप्ताहों में अमरीकी अटर्नी जेनरल और विदेश मंत्री भी ध्यान देंगे.
अमरीकी अधिकारी का ये भाषण ऐसे समय आया है जब अमरीका और चीन के बीच कोरोना महामारी और चीनी ऐप्स को लेकर तनाव चरम पर है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप कोरोना महामारी को लेकर लगातार चीन की आलोचना करते रहे हैं और सीधे-सीधे चीन पर दुनिया में महामारी फैलाने का आरोप लगाते हैं.
इसके अलावा इसी सप्ताह अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि अमरीका चीन में बने ऐप्स को बैन करने पर विचार कर रहा है जिनमें टिकटॉक भी शामिल है.
पॉम्पियो ने कहा,"ये ऐप्स चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की निगरानी करने वाली सरकार का ज़रिया हैं".
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'हर 10 घंटे में चीन से जुड़े मामले दर्ज'
मंगलवार को लगभग घंटे भर लंबे भाषण में एफ़बीआई निदेशक ने विस्तार से बताया कि चीन किस तरह से बाधा डाल रहा है.
उन्होंने बताया कि चीन आर्थिक जासूसी कर रही है, डेटा और पैसे चुरा रहा है और अवैध राजनीतिक गतिविधियों में जुटा है जिनके तहत वो रिश्वत और ब्लैकमेल के सहारे अमरीकी नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.
रे ने कहा, "आज हम ऐसी स्थिति में आ खड़े हुए हैं जहाँ एफ़बीआई को हर 10 घंटे में चीन से जुड़े किसी ख़ुफ़िया मामले को दर्ज करना पड़ रहा है. अभी देश भर में ऐसे 5,000 मामले दर्ज हैं जिनमें लगभग आधे चीन से जुड़े हैं."
एफ़बीआई निदेशक ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक प्रोग्राम शुरू किया है जिसका नाम है - फ़ॉक्स हन्ट. इसके तहत विदेशों में रह रहे उन चीनी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है जिन्हें चीन सरकार के लिए ख़तरा समझा जाता है.
उन्होंने कहा कि इनमें राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी, असंतुष्ट और आलोचक शामिल हैं, जो चीन में जारी मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करना चाहते हैं.
'लौटो या ख़ुदकुशी करो'
रे ने कहा, "चीन सरकार उनपर दबाव डालकर उन्हें वापस बुलाना चाहती है और इसके लिए वो जो हथकंडे अपना रही है, वो चौंका देने वाले हैं."
"एक मामले में जब वो एक फ़ॉक्स हन्ट टारगेट का पता नहीं लगा पाए, तो चीन सरकार ने यहाँ अमरीका में उसके घरवालों तक अपने दूत को भेजा और उन्हें उस तक संदेश पहुँचाने के लिए कहा."
"उसके पास दो विकल्प थे - फ़ौरन चीन लौटो, या ख़ुदकुशी करो. "
सामान्य से हटकर दिए गए इस भाषण में एफ़बीआई निदेशक ने अमरीका में रहनेवाले चीनी मूल के लोगों से कहा है कि अगर चीनी अधिकारी उनपर वापस लौटने के लिए दबाव डालते हैं तो वो फ़ौरन एफ़बीआई से संपर्क करें.
चीन सरकार ने पूर्व में अपने ऐसे क़दमों का ये कहते हुए बचाव किया है कि ये भ्रष्टाचार-विरोधी प्रयासों का हिस्सा है.
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