ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को 'हराने वाला' 22 साल का खिलाड़ी

मैंचेस्टर यूनाइटेड की ओर से खेलने वाले फ़ुटबॉलर मार्कस रैशफ़ोर्ड मैदान में अपने प्रतिद्वंदियों को हराने के लिए जाने जाते हैं लेकिन उन्होंने अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से राजनीति के मैदान में मुक़ाबला करके उन्हें अपने फ़ैसले को वापस लेने पर मजबूर किया है. कई लोग इसे लेकर अवाक् हैं.

ब्रिटेन की सरकार ने यह घोषणा की है कि गर्मियों की छुट्टी में ज़रूरतमंद बच्चों को मुफ़्त में खाना देने की योजना का वो विस्तार करेगी लेकिन यह फ़ैसला तब लिया गया जब रैशफ़ोर्ड ने सोशल मीडिया पर इसे लेकर अभियान छेड़ दिया.

उन्होंने #maketheUturn से सोशल मीडिया पर यह अभियान सरकारी के ऊपर दबाव बनाने के लिए चलाया था ताकि वो पहले से चली आ रही इस योजना को आगे जारी रखे.

इस योजना को बंद करने की पहले घोषणा की जा चुकी थी.

यह ख़बर मिलते ही 22 साल के रैशफ़ोर्ड ने ट्वीट किया, "क्या कहना है यह मैं भी नहीं जानता. बस इस पर ध्यान दें कि हम एक साथ मिलकर क्या कर सकते हैं, यह 2020 का इंग्लैंड है."

अमीर बनने का सफ़र

महज़ 22 साल की उम्र में रैशफ़ोर्ड मैंचेस्टर यूनाइटेड के साथ क़रार के तहत एक हफ़्ते का ढाई लाख डॉलर कमाते हैं. उनका यह क़रार साल 2023 तक है लेकिन वो एक साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं.

उनका कहना है कि स्कूल में मुफ़्त खाने जैसी सुविधा वो जिसतरह के परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं, उनके लिए जीवनरेखा जैसी है. उनका बचपन ग़रीबी में बीता है.

वो बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, उन्हें और उनके चार भाई-बहनों को उनकी अकेली मां ने पाला-पोसा है. उन्होंने हमारा पेट पालने के लिए कड़ी मेहनत की है. वो कहते हैं, "मैं जानता हूँ कि भूखा रहना कैसा होता है."

ब्रिटेन के राजनेताओं को लिखे भावुक खुले पत्र में रैशफ़ोर्ड ने लिखा है, "यह व्यवस्था हमारे जैसे परिवारों की कामयाबी के लिए नहीं बनी हुई है और उनकी कहानी इंग्लैंड की और भी कई परिवारों की कहानी है."

जब सरकार अपने फ़ैसले से पीछे हटी, उसके पहले सुबह में रैशफ़ोर्ड ने ट्वीट किया, "जब आप सुबह-सुबह फ़्रिज से दूध निकालने जाते हैं तो रूककर एक पल के लिए सोचिए कि पूरे देश में कम से कम दो लाख बच्चे ऐसे हैं जिनकी दूध की शेल्फ़ खाली हैं."

कम आमदनी की पृष्ठभूमि से ताल्लुक़ रखने वाले क़रीब 13 लाख बच्चे इंग्लैंडम में स्कूलों में मिलने वाले मुफ़्त खाने के हक़दार हैं.

सराकार ने इस योजना को जारी रखने का फ़ैसला लिया है क्योंकि लॉकडाउन की वजह से ग़रीब परिवारों को और भी मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है.

रैशफ़ोर्ड ने सांसदों से कहा, "ये परिवार जिन हालात से गुज़र रहे हैं, मैं उन हालात से गुज़र चुका हूँ. और इससे निकलने का रास्ता बहुत मुश्किल है."

वो आगे पूछते हैं, "राजनीति को दरकिनार करते हुए क्या हम सभी इस बात सहमत नहीं हो सकते हैं कि कोई भी बच्चा भूखा नहीं सोना चाहिए?"

यह योजना क्या है?

ज़रूरतमंद परिवारों को जब स्कूल बंद रहते हैं तो हर एक बच्चे पर क़रीब साढ़े चौदह सौ रुपये का गिफ़्ट कूपन एक हफ़्ते लिए मिलता है जो वो सुपरमार्केट में ख़र्च कर सकते है.

रैशफ़ोर्ड ने अभियान के तहत दलील दी कि इस योजना के तहत क़रीब 11 अरब रुपये का भार सरकार पर पड़ता है जो अर्थव्यवस्था को सहारा देने के नाम पर ख़र्च होने वाले दसियों बिलियन पाउंड की तुलना में कुछ भी नहीं है.

रैशफ़ोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान चैरिटी संस्था फेयरशेयर के साथ काम करते हुए ज़रूरतमंदों के लिए क़रीब एक अरब से ज़्यादा रक़म जुटाई है.

चैरिटी संस्था का कहना है कि ये रक़म मैंचेस्टर के आस-पास के उन 28 लाख बच्चों के खाने पर ख़र्च किए जाएंगे जिन्हें स्कूल बंद होने की वजह से इसकी ज़रूरत है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के आधिकारिक प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा है कि देशव्यापी लॉकडाउन "महामारी की वजह से पैदा हुई विशेष परिस्थितियों को दिखाता है."

रैशफ़ोर्ड के ऊपर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ग़रीबी को लेकर जो दलील उन्होंने दी उसका स्वागत करते हैं और इस बात का सम्मान करते हैं कि खेल जगत की एक प्रमुख शख्सियत के तौर पर अहम मुद्दों को उठाने में वो अपनी भूमिका निभा रहे हैं."

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