You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
जॉर्ज फ़्लॉयड: हत्या के मामलों में अमरीकी पुलिस अधिकारी बच क्यों जाते हैं?
- Author, पाबलो ओचोआ
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
एक अनुमान के मुताबिक़, अमरीका में पुलिस के हाथों हर साल क़रीब 1200 लोगों की मौत होती है, लेकिन क़रीब 99 प्रतिशत मामलों में पुलिस अधिकारियों पर किसी अपराध का केस दर्ज नहीं होता.
लेकिन जॉर्ज फ़्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हुए प्रदर्शनों और पब्लिक प्रेशर के बीच इस बार मामला दर्ज किया गया है.
फ़्लॉयड की गर्दन घुटने से दबाने वाले एक पुलिस अधिकारी पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है. वहीं घटनास्थल पर मौजूद तीन अन्य लोगों पर अपराध का समर्थन करने और उसे बढ़ावा देने का आरोप है. चारों को 8 जून को कोर्ट में पेश किया जाएगा.
प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि फ़्लॉयड का मामला पुलिस अधिकारियों को 'संरक्षण देने वाले' क़ानून में कड़े बदलाव की वजह बनेगा.
अमरीकी क़ानून के तहत मिलने वाले संरक्षण की वजह से अमरीका में किसी को मार देने वाले पुलिस अधिकारियों पर कभी मामला दर्ज ही नहीं होता.
क़ानूनी कार्रवाई से बचाने वाली शिल्ड
पुलिस हिंसा का रिकॉर्ड रखने वाले संगठन 'मैपिंग पुलिस वॉयलेंस' के मुताबिक़, 2013 से 2019 के बीच पुलिस के हाथों 7,666 मौते हुईं. हालांकि कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये भी उन मौतों का पूरा आंकड़ा नहीं है, बल्कि ये 92 प्रतिशत है.
इतनी मौतों में से सिर्फ 99 मामलों में पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया - जो कुल मामलों का महज़ 1.3% है. और उनमें से केवल 25 को सज़ा हुई.
वॉशिंगटन में सीओटीओ इंस्टीट्यूट में आपराधिक न्याय के उपाध्यक्ष क्लार्क नील बीबीसी से कहते हैं, फ़्लॉयड के मामले में जिस तरह से पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ क्रिमिनल चार्ज लगाए गए हैं, ऐसा बहुत ही कम होता है.
उनका कहना है कि मामला दर्ज हुआ तो अभियोजन पक्ष को पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर ही काम करना होता है. पुलिस ही जांच करेगी और बयान लेगी. और ऐसे में उनपर पुलिस का दबाव आ सकता है.
पीड़ित और उनके रिश्तेदारों के पास सिर्फ एक ही विकल्प बचता है कि वो सिविल कोर्ट में जाकर अपने नुकसान की भरपाई के लिए अधिकारियों पर मुकदमा कर दें. लेकिन क्लार्क कहते हैं कि 'क्वालिफाइड इम्युनिटी' के सिद्धांत के चलते इस विकल्प के लिए भी "कोर्ट के दरवाज़े जल्दी ही बंद हो जाते हैं".
'क्वालिफाइड इम्युनिटी' अमरीका के संघीय क़ानून में एक लीगल सिद्धांत है, जो किसी के अधिकार का उल्लंघन करने पर सरकारी अधिकारियों को क़ानूनी कार्रवाई से बचाता है, जबतक कि वो ऐसे अधिकार ना हों, जो "साफ तौर पर पीड़ित को प्रोटेक्ट करते हों".
उल्लंघन का 'फ्री पास'
2014 की एक घटना है, एक आदमी आकर एमी कॉर्बेट के घर के पीछे वाले बगीचे में घुस गया.
हथियारबंद पुलिस वहां पहुंची, वहां खेल रहे छह बच्चों को ज़मीन पर लेट जाने के लिए कहा.
जब एमी का कुत्ता आया तो एक पुलिस अधिकारी ने बिना किसी चेतावनी के दो बार गोली चला दी. कोर्ट के दस्तावेज़ों के मुताबिक़, जबकि कुत्ते ने पुलिस अधिकारी पर कोई हमला भी नहीं किया था.
लेकिन गोली कुत्ते को ना लगकर एमी के 10 साल के बेटे को लग गई. जो सिर्फ आधे मीटर की दूरी पर लेटा हुआ था. बच्चा बच गया, लेकिन उसके पैर में गहरा घाव हो गया और दिमागी तौर पर भी उसे सदमा लगा.
लेकिन जब एमी ने उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर करने की कोशिश की तो अदालतों ने उसे खारिज कर दिया और कहा कि गिरफ्तारी के दौरान गलती से हुए बल प्रयोग से किसी के अधिकार का साफ तौर पर हनन होता नहीं लगता.
एक दूसरा हाई प्रोफाइल केस मलाइका ब्रूक्स का था. जिन्हें कार से घसीटकर निकाला गया, मुंह के बल ज़मीन पर लेटाकर उनके हाथ में हथकड़ी लगा दी गई. ये सब उनके 11 साल के बेटे के सामने हुआ. उस वक़्त ब्रूक्स आठ महीने से गर्भवती भी थीं.
दरअसल उन्हें 51 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गाड़ी चलाने की वजह से रोका गया था, लेकिन उन्होंने स्पीडिंग टिकट पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था.
उनका मुक़दमा भी अदालतों ने खारिज कर दिया, क्योंकि टेज़र गन के इस्तेमाल को लेकर "स्पष्ट स्थापित अधिकारों" की कमी थी. 10 साल बाद ब्रूक्स ने कोर्ट के बाहर ही $45,000 का सेटलमेंट किया.
क्लार्क कहते हैं, "यह बहुत हैरानी भरा है कि अदालतें किस तरह की स्थितियों के लिए पुलिस को फ्री पास देंगी."
फ़्लॉयड के लिए न्याय
क्लार्क कहते हैं कि 'क्वालिफाइड इम्युनिटी' की वजह से फ़्लॉयड के परिवार को न्याय मिलने में मुश्किलें आ सकती हैं.
"अगर उन्हें पहले का कोई ऐसा मामला नहीं मिलेगा, जिसमें किसी अदालत ने कहा हो कि ये असंवैधानिक है कि किसी की गर्दन को नौ मिनट तक घुटने से दबाकर रखा गया, जिससे उनकी मौत हो गई, तो क्वालिफाइड इम्युनिटी डॉक्टरीन कहता है कि आप मुकदमा नहीं कर सकते, क्योंकि हमारी किताबों में ऐसा केस है ही नहीं."
बीबीसी ने अमरीका के नेशनल पुलिस ऑफिसर एसोसिएशन से संपर्क किया, लेकिन कई बार फोन किए जाने के बाद भी हमें स्टोरी पब्लिश होने तक जवाब नहीं मिला है.
इस संस्था के अध्यक्ष माइकल मैकहेल ने फ़्लॉयड के मामले में पहले कहा था कि, "जॉर्ज फ़्लॉयड के साथ बहुत बुरा हुआ. अधिकारियों के एक्शन का कोई लीगल जस्टिफिकेशन, सेल्फ-डिफेंस जस्टिफिकेशन या मोरल जस्टिफिकेशन नहीं है."
राजनेताओं का भी ऐसा ही कहना है.
29 मई की पुलिस बर्बरता की निंदा करने वाला प्रस्ताव पेश करने से पहले, मैसाचुसेट्स की जनप्रतिनिधि ने कहा, "बहुत पहले से ये होता रहा है कि ब्लैक और ब्राउन बॉडीज़ को पुलिस ने प्रोफाइल किया, उनकी जांच की, लिंच किया, उनका दम घोटा, बरबर्ता की और हत्या कर दी गई."
"अब हम ऐसे अन्याय और नहीं होने दे सकते."
फ़्लॉयड के मामले में पब्लिक प्रेशर का एक अहम रोल दिखाई पड़ता है, लेकिन इसके साथ ही बड़े बदलावों की भी मांग हो रही है.
विशेषज्ञ और मीडिया रिपोर्ट बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट अपनी क्वालिफाइड इम्युनिटी डॉक्टरीन की समझ को रिव्यू कर सकता है.
और सामाजिक कार्यकर्ता कांग्रेस से एक एक्ट पास करने की मांग कर रहे हैं, जिसके तहत पुलिस हर किसी के साथ शांति और अच्छे से पेश आए.
ये बिल पुलिस अधिकारियों को गैर ज़रूरी बल प्रयोग करने से रोकेगा और उन्हें तभी बल प्रयोग की इजाज़त देगा जब दूसरे सारे विकल्प ख़त्म हो गए हों.
नई पुलिसिंग?
लेकिन अमरीकन सिविल लिबर्टी यूनियन में जस्टिस डिविजन के डायरेक्टर उरी ओफर मानते हैं कि अमरीका को और भी चीज़ें करने की ज़रूरत है. वो कहते हैं कि देश के लोगों को पुलिस के प्रति अपने रवैये और संस्कृति को बदलना होगा.
अमरीकी संघीय प्रणाली में पुलिसिंग का काफी अहम रोल है. कुछ शहरों के बजट में इसके लिए 40% हिस्सा रखा जाता है.
हथियारबंद अधिकारियों को अमरीका में कई स्थितियों में तैनात किया जाता है.
अमरीका में हर तीन सेकेंड में किसी ना किसी को गिरफ़्तार किया जाता है. और एफ़बीआई के मुताबिक़, 2018 में देश भर में 10.3 मीलियन गिरफ्तारियां की गईं.
ओफर कहते हैं कि गिरफ़्तार किए गए बहुत से लोगों ने कोई हिंसक अपराध नहीं किया होता है.
जॉर्ज फ़्लॉयड कथित तौर पर एक दुकान में जाली नोट देने की कोशिश कर रहे थे.
ओफर कहते हैं, "हमारा मानना है पुलिस को ऐसे मामलों में शुरुआती तौर पर दखल नहीं देना चाहिए."
"हमें पुलिस पर अरबों डॉलर ख़र्च नहीं करने चाहिए. इस पैसे से उन समुदायों के लिए कुछ किया जाना चाहिए जो सालों से पुलिस का निशाना बनते रहे हैं."
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि फ़िलहाल सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के गुस्से को "बड़े बदलावों" का ज़रिए बनना चाहिए.
ओफर कहते हैं, "अमरीका में पुलिस हिंसा और पुलिस नस्लवाद कुछ फंडामेंटल समस्याएं हैं. दशकों की कोशिश के बाद भी हम इस जंग को जीत नहीं पाए हैं."
"सिर्फ एक अधिकारी को सज़ा मिल जाने से हम इसे जीत नहीं पाएंगे."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)