You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ट्रंप की टिप्पणी पर फ़ेसबुक में असंतोष क्यों
फ़ेसबुक के कर्मचारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप के विवादास्पाद पोस्ट को नहीं हटाने को लेकर कंपनी के फ़ैसले की कड़ी आलोचना की है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने ये पोस्ट पिछले हफ़्ते किया था.
पुलिस कस्टडी में जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत को लेकर मिनेपोलिस में हो रहे प्रदर्शनों पर ट्रंप ने अपने एक ट्वीट को फ़ेसबुक पर भी पोस्ट किया था.
ट्विटर ने ट्रंप के इस ट्वीट पर वॉर्निंग जारी की है. ट्विटर का कहना है कि ये हिंसा का महिमामंडन करता है जबकि फे़सबुक की राय ये पोस्ट कंपनी की पॉलिसी का उल्लंघन नहीं करता है.
लेकिन फ़ेसबुक के कुछ कर्मचारियों ने कहा है कि वे इस पर 'शर्मिंदा' हैं.
ट्रंप का ट्वीट
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि वे हिंसा पर काबू पाने के लिए "नेशनल गार्ड की तैनाती करेंगे" और ये भी चेतावनी दी थी कि "जब लूट शुरू होगी तो शूटिंग भी शुरू होगी."
फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग के ये कहने के बाद कि ट्रंप के पोस्ट से हिंसा भड़काने को लेकर कंपनी की नीति का उल्लंघन नहीं हुआ है, इस पोस्ट को यूं ही छोड़ दिया गया.
फे़सबुक के दफ़्तर में मंगलवार को कर्मचारियों ने "वर्चुअल बहिष्कार" भी किया, कुछ स्टाफ़ ने ये मैसेज छोड़ा कि वे विरोध कर रहे हैं और इसलिए काम बंद कर रहे हैं.
मार्क ज़करबर्ग ने लिखा, "हमें ये लक्ष्मण रेखा कहां खींचनी चाहिए, इस पर लोग सहमत या असहमत हो सकते हैं लेकिन मुझे उम्मीद है कि वे हमारी फिलासफी समझेंगे कि इस मुद्दे को खुली बहस के लिए छोड़ना ही बेहतर है, ख़ासकर तब जब कि बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ हो."
"राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बारे में जिस तरह से अपनी बात कही, मैं इस बात से पूरी तरह से असहमत हूं लेकिन मैं ये मानता हूं कि लोगों की नज़र में ये बात रहनी चाहिए क्योंकि आख़िरकार सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी तभी तय की जा सकती है जबकि उनकी कही बातों पर सार्वजनिक तौर पर बहस हो."
'कुछ न करना सहमति देने समान है'
फ़ेसबुक के कई कर्मचारियों ने कोई कार्यवाई न करने के फ़ेसबुक के फ़ैसले पर अपनी नाराज़गी जताई है.
एक सॉफ्टवेर इंजीनियर लॉरेन टैन ने कहा है, "हिंसा भड़काने वाले ट्रंप के पोस्ट को हटाने के मामले में फ़ेसबुक ख़ामोश है, मैं शर्मिंदा हूं कि मैं यहा काम करता हूं."
"मैं इस बात से कतई सहमत नहीं हूं... कुछ न करना अपनी सहमति के समान है."
हालांकि कई लोगों का ये कहना है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए सोशल मीडिया को अपनी नीति में बदलाव करना चाहिए था.
फ़ेसबुक में प्रोडक्ट डिज़ाइन के निदेशक डेविड गिलिस का कहना है, "एक कंपनी के तौर पर हम अपने साथ काम करने वाले काले साथियों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश करते हैं ताकि ताकि समाज में उनके प्रति जो हिंसा का माहौल है और विपरीत स्थितियां है उससे लड़ने में वो अकेले न हों."
द वर्ज के अनुसार कई कर्माचरियों ने फ़ेसबुक के मैसेजिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर भी कंपनी के फ़ैसले पर नाराज़गी जताई.
फ़ेसबुक ने कहा कि उसे "इस बात का अंदाज़ा है" कि कई कर्मचारी इस वक्त कैसा अनुभव कर रहे हैं.
कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि "कंपनी के आला अधिकारियों ने नाराज़गी के मामलों में हम कर्मचारियों को अपने विचार खुल कर रखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. आगे भी हम अपने कॉनटेन्ट को लेकर मुश्किल स्थिति का सामना करगें लेकिन हम ईमानदारी से प्रतिक्रिया मांगते रहेंगे."
एंडर्स एनालिसिस के टेक प्रमुख जोसेफ इवान्स ने कहा कि "ये पहली बार नहीं है जब तकनीकी कंपनियों के कर्मचारियों ने अपनी कंपनी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई हैं, ऐसा पहले भी हुआ है. साल 2018 में महिलाओं के साथ कंपनी के रवैय्ये को लेकर गूगल के कर्मचारियों ने वॉकआउट किया था. इन कंपनियों के लिए काम करने वालों को कहा जाता है कि वो एक बेहतर दुनिया के लिए काम कर रहे हैं और वो इस बात पर यकीन करते हैं."
"ऐसे में तकनीकी कंपनियां नियामकों की कार्यवाई से बचने के लिए, अपने लाभ को बनाए रखने के लिए और अच्छे कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए कोशिशें करती रहनी पड़ती हैं."
शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप और मार्क ज़करबर्ग ने फ़ोन पर बात की थी. दोनों के बीच क्या बातचीत हुई इस बारे में कोई जानकारी नहीं हैं लेकिन एक्सिओस समाचार वेबसाइट के अनुसार दोनों ने चर्चा को सकारात्मक बताया है.
"नस्लवाद के ख़िलाफ़ हम"
आज फे़सबुक ने "नस्लभेद की वजह से होने वाले अन्याय को ख़त्म करने के लिए" एक करोड़ डॉलर के दान की घोषणा की है.
सोशल मीडिया पर कंपनी ने कहा, "हम आपकी आवाज़ सुन रहे हैं, हम आपको देख रहे हैं और हम आपके साथ हैं."
"हम नस्लवाद के ख़िलाफ़ हैं. हम ब्लैक समुदाय और जॉर्ज फ्लॉयड, ब्रेयोना टेलर, अहमद आर्बरी और दूसरों के लिए न्याय की इस लड़ाई में काम कर रहे सभी लोगों के साथ हैं.
हालांकि अब तक ये स्पष्ट नहीं हैं कि इस एक करोड़ डॉलर का खर्च कैसे और कहां किया जाएगा.
- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना महामारीः क्या है रोगियों में दिख रहे रैशेज़ का रहस्य
- कोरोना वायरसः वो शहर जिसने दुनिया को क्वारंटीन का रास्ता दिखाया
- कोरोना वायरस से संक्रमण की जांच इतनी मुश्किल क्यों है?
- कोरोना संकट: गूगल, फ़ेसबुक, ऐपल और एमेज़ॉन का धंधा कैसे चमका
- कोरोना वायरसः वो छह वैक्सीन जो दुनिया को कोविड-19 से बचा सकती हैं
- कोरोना वायरस: संक्रमण से बचने के लिए इन बातों को गाँठ बांध लीजिए
- कोरोना वायरस: सरकार का आरोग्य सेतु ऐप कितना सुरक्षित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)