भारत-नेपाल सीमा विवाद के बीच कैसी होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा?

कैलाश मानसरोवर यात्रा

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    • Author, सुरेंद्र फुयाल
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, काठमांडू से

बहुत से लोगों के लिए ये सपनों और कल्पनाओं की जगह है. विस्तृत पठार और ऊबड़-खाबड़ मैदानों से तीर्थयात्रियों और प्रकृति प्रेमियों की नज़र जहाँ तक जाती है, उन्हें विशाल पर्वत शृंखला ही नज़र आती हैं.

इसके बीच का हिस्सा पथरीला और ग्रेनाइट जैसे गहरे भूरे रंग का और पर्वतों की चोटी मोटे सफ़ेद बर्फ़ से ढँकी हुई.

इसकी पिघलती हुई बर्फ़ ज़मीन पर एक विशाल झील में गिरती हुई. ये ख़ूबसूरती कोई बयां नहीं कर सकता.

साधु, संत, सम्मानित लामा, बौद्ध, हिंदू या जैनी...कोई भी नहीं. ये सभी लोग इसके अद्वितीय सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व की वजह से सदियों से यहाँ जुटते आए हैं.

कैलाश मानसरोवर में आपका स्वागत है!

भारत, नेपाल, भूटान, चीन और तिब्बत में न जाने कितने श्रद्धालुओं के लिए ये शिव-पार्वती समेत कई देवी-देवताओं का घर है.

यही वजहें हैं कि कैलाश मानसरोवर यात्रा को ज़िंदगी में एक बार मिलने वाली तीर्थयात्रा माना जाता है. लेकिन यहां पहुंचने के लिए दोत-तीन हफ़्ते (निर्भर करता है कि आप कहां रहते हैं) का समय लगता है.

ये यात्रा हवाई जहाज़, जीप और पैदल चलकर पूरी होती है. इतने मुश्किल सफ़र के बाद लोग दुनिया के सबसे मुश्किल भौगोलिग क्षेत्र यानी हिमालय क्षेत्र में पहुंचते हैं.

कैलाश मानसरोवर यात्रा

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अनिश्चितताएं और अड़चनें

उत्तराखंड-लिपुलेख रोड लिंक से इय यात्रा को ‘काफ़ी हद तक कम अवधि’ वाला बनाना नरेंद्र मोदी सरकार की प्राथमिकता थी. इस साल आठ मई को भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए इसके रोड-लिंक का उद्घाटन किया. लेकिन इस रास्ते में भी कई अनिश्चितताएं और अड़चनें हैं.

पहली बात तो ये कि इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. वजह है, दुनिया भर में कोविड-19 संक्रमण का प्रसार.

वायरस का शुरुआती केंद्र माने जाने वाले देश चीन के अधिकारियों ने यहाँ पहुंचने वाले हर अंतरराष्ट्रीय यात्री के लिए 14 दिनों तक मेडिकल क्वारंटीन में रहना अनिवार्य कर दिया है.

तिब्बत में भी ऐसे कुछ नियम लागू हैं. नेपाल, तिब्बत और चीन के ट्रैवेल एजेंटों और अधिकारियों का कहना है कि इन सबका असर जून, जुलाई और अगस्त महीने में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर आने वाले लोगों पर पड़ेगा.

तिब्बती सरकार की निगरानी वाली वेबसाइट Tibet.cn के अनुसार चीन धीरे-धीरे सामान्य ज़िंदगी की ओर लौट रहा है. इस बीच सैलानियों को सांस्कृतिक और प्राकृतिक सौंदर्य वाली जगहों पर जाने के लिए कहा जा रहा है.

लेकिन इसके बावजूद दुनिया भर में कोविड-19 के बिगड़ते हालात को लेकर कई चिंताएं भी हैं.

मसलन, अरुणाचल प्रदेश के उत्तर में बसे पूर्वी तिब्बत के मशहूर न्यिंगची शहर में लोगों को पर्यटन स्थलों पर जाने से मना किया गया है. ल्हासा और न्गारी में ऐसे ही नियम लागू हैं. ये वही जगहें हैं जहां कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील है.

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जुलाई-अगस्त तक क्या होगा, पता नहीं

Tibet.cn के अनुसार भले ही पठार पर संक्रमण काबू में होता प्रतीत हो रहा है, “तिब्बत ने चीन में कोविड-19 संक्रमण फैलेने के बाद से ही इमरजेंसी रेस्पॉन्स लागू किया है. तिब्बत ने ये चेतावनी भी दी है कि इलाक़े में ऑक्सीजन की कमी और सीमित मेडिकल संसाधनों की वजह से बीमारी ज़्यादा ख़तरनाक हो सकती है.”

ल्हासा में ‘एक्स्पोर तिब्बत’ नाम की ट्रैवेल एजेंसी चलाने वाले ट्रैवेल ऑपरेटर समदुप ने एक ईमेल में बताया कि अगस्त से पहले केरुंग पर नेपाल-चीन और तिब्बत सीमा और लिपुलेख के अन्य इलाक़ों के खुलने से काफ़ी उम्मीद है, लेकिन दूसरी तरफ़ पूरे तिब्बत में अनिश्चितता का माहौल भी लगातार बना हुआ है.

उन्होंने ईमेल में लिखा, “झांगमू (काठमांडू के उत्तर में कोदारी के पास) साल 2015 के भूकंप के बाद से अब तक बंद है. अगर आप ज़मीन के रास्ते से आना चाहते हैं तो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए केरुंग से प्रवेश करना ही आपका एकमात्र विकल्प है. हालांकि महामारी की वजह से जुलाई के आख़िर तक किसी भी पर्यटक को तिब्बत में प्रवेश की अनुमति नहीं है.”

समदुप को उम्मीद है अगस्त तक स्थिति सामान्य हो जाएगी. अगर ऐसा हुआ तो दक्षिण एशिया के सैलानी कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर सकेंगे.

नेपाल में तिब्बत टूर के एक प्रमुख ऑपरेटर सनी ट्रैवेल्स के तेनज़िंग नोर्बू लामा कहते हैं कि तिब्बत चीन के घरेलू सैलानियों के लिए धीरे-धीरे खुला है और चीन को तिब्बत, नेपाल या भारत के रास्ते आने वाले दक्षिण एशियाइयों का स्वागत करने में अभी थोड़ा वक़्त लगेगा.

उन्होंने कहा, “हमारे तिब्बती साथी बता रहे हैं कि कैलाश मानसरोवर संभवत: अगस्त या सितंबर में खुलेगा. ये कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति पर निर्भर करेगा.”

इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए तीर्थयात्रियों और सैलानियों को चीन के टूरिस्ट वीज़ा के अलावा तिब्बत सरकार से एक ख़ास परमिट भी लेना होता है.

दिल्ली से उत्तर पूर्व में 750 किलोमीटर दूर स्थित लिपुलेख इस यात्रा के छह दिन कम करके इसे सबसे छोटा बना सकता है.

मुश्किलें और भी हैं...

लेकिन तेनज़िंग नोर्बू बताते हैं कि लिपुलेख पास को लेकर भी कई मुद्दे हैं. जैसे कि एक बार में यहाँ से गुज़रने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या 1,000 से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए.

लिपुलेख के अलावा कुछ अन्य विकल्प हैं: नेपाल के सिमिकोट, कोरोला, केरुंग या कोदारी सीमा से लगे इलाक़े.

नेपाली ट्रैवेल एजेंटों के अनुसार यहां से गुज़रने वाले सैलानियों के लिए कोई तय सीमा निर्धारित नहीं की गई है.

पूर्वोत्तर या पूर्वी भारत से आने वाले लोगों के लिए तीसरा विकल्प सिक्किम के गंगटोक और नाथुला दर्रे से होकर आने का है.

तनेज़िंग नोर्बू कहते हैं कि नेपाल से होकर जाने पर भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए मानसरोवर यात्रा का ख़र्च डेढ़ लाख (जीप) से दो लाख (हेलिकॉप्टर) के बीच आता है.

नक्शे पर

दुनिया भर में पुष्ट मामले

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

तिब्बत के न्गारी प्रांत में बुरुंग शहर में, उत्तराखंड के उत्तर में और नेपाल के सुदूर पश्चिम प्रांत में स्थित कैलाश मानसरोवर क्षेत्र जून के सागा दावा त्योहार (हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले बौद्धों का त्योहार) और जुलाई के आख़िर में गुरु पूर्णिमा में खचाखच भरा रहता है.

अगर राजनाथ सिंह और भारतीय अधिकारियों को कामयाबी मिली तो लिपुलेख रोड लिंक अगले कुछ महीनों में दिल्ली से जीप यात्रा के लिए तैयार हो जाएगा.

दिल्ली से लिपुलेख की दूरी लगभग 800 किलोमीटर है. इसके बाद यात्रियों को पांच किलोमीटर तक पैदल चलकर तिब्बत पहुंचना होगा.

इच्छाशक्ति की परीक्षा लेती है ये यात्रा

लेकिन इसके लिए यात्रियों का स्वस्थ और फुर्तीला होना ज़रूरी है. उन्हें समुद्र तल से सिर्फ़ 200 किलोमीटर की ऊंचाई (दिल्ली) के बाद सीधे 1200 मीटर (काठमांडू) तक आने के लिए और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से समुद्र तल से 5,200 मीटर की ऊंचाई तक (लिपुलेख) जाने वाली जीप में बैठने के लिए तैयार होना चाहिए.

इतने मुश्किल सफ़र के बाद उन्हें पैदल चलने के लिए भी तैयार होना चाहिए.

वहाँ हवा मैदानों जैसी नहीं होगी. कमज़ोर लोगों को ऑक्सीज़न सपोर्ट की ज़रूरत पड़ती ही है. कोविड-19 संक्रमण के दौर में और भी ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत है क्योंकि तिब्बत के सुदूर इलाक़ों में पर्याप्त अस्पताल और मेडिकल सुविधाएं नहीं हैं.

लिपुलेख या नेपाल के सिमिकोट से होकर तिब्बत में प्रवेश के बाद यात्रियों को 150 किलोमीटर लंबी यात्रा और करनी होती है. इसके बाद जाकर ही श्रद्धालु कैलाश पर्वत (6638 मीटर ऊंचे) की परिक्रमा (43 किलोमीटर) शुरू कर सकते हैं.

कैलाश पर्वत के दक्षिण में मानसरोवर और दूसरी झीलें हैं जो एशिया की प्रमुख नदियों जैसे सिंधु, सतलज, घाघरा और ब्रह्मपुत्र का उदगम हैं.

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के बावजूद कैलाश मानसरोवर की यात्रा अब भी एक सपने जैसी लगती है. ट्रैवल एजेंटों के मुताबिक़ इसके लिए और ज़्यादा ज़मानी कामों और सुधारों की ज़रूरत है.

इसके अलावा, लिपुलेख तक पहुंचना भी आसान नहीं होगा. यहाँ हिमालय की बड़ी चढ़ाई है, जो समुद्र तल से लगभग 5200 मीटर की ऊंचाई पर है.

भारत नेपाल

भारत-नेपाल सीमा विवाद

दूसरी बाधा यात्रियों की व्यक्तिगत समस्या नहीं है लेकिन ये सरकारों की समस्या है.

लिपुलेख भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद का कारण रहा है. भारत सरकार के लिपुलेख प्रोजेक्ट का नेपाल ने कड़ा विरोध किया है.

नेपाल के लोग, नेता और आलोचक मोदी सरकार के गुंजी कालापानी इलाक़े से लिपुलेख रोड लिंक के हालिया और ‘एकपक्षीय’ उद्घाटन से नाख़ुश हैं.

पिछले 200 वर्षों से लिपुलेख से लेकर लिंपियाधुरा को अपना क्षेत्र मानता रहा है. इस हफ़्ते नेपाल की कैबिनेट ने एक नया राजनीतिक नक्शा भी जारी किया जिसमें लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल की महाकाली नदी की पश्चिमी सीमा में दिखाया गया है.

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कोरोना वायरस ट्रांसलेटर

इन सभी शब्दों का क्या मतलब है?

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  • एंटीबॉडीज टेस्ट

    ऐसा मेडिकल टेस्ट जिससे साबित हो सके कि किसी शख्स को कोरोना वायरस था और अब उसमें कुछ इम्युनिटी आ गई है. यह टेस्ट खून में एंटीबॉडीज का पता लगाता है, जिन्हें बीमारी से लड़ने के लिए शरीर पैदा करता है.

  • बिना लक्षण वाले

    ऐसा शख्स जिसे बीमारी हुई मगर उसमें कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए. कुछ स्टडीज से पता चला है कि कोरोना वायरस का शिकार हुए कुछ लोगों में तेज़ बुखार या कफ़ जैसे आम लक्षण नहीं नज़र आए.

  • कोरोना वायरस

    वायरस समूह में से एक वायरस जिससे मनुष्यों या जानवरों में गंभीर या हल्की बीमारी हो सकती है. पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस से कोविड-19 बीमारी हो रही है. सामान्य सर्दी या इंफ्लूएंजा (फ़्लू) फैलाने वाले दूसरे तरह के कोरोना वायरस हैं.

  • कोविड-19

    कोरोना वायरस की वजह से फैल रही बीमारी का सबसे पहले पता 2019 के अंत में चीन के वुहान में लगा. यह मूलरूप में फ़ेफ़ड़ों पर असर डालता है.

  • संक्रमण की तेज़ी को रोकना

    ट्रांसमिशन की दर को कम करना ताकि चार्ट पर प्रदर्शित किए जाने पर मामलों की संख्या के आधार पर पीक को फ्लैट कर कर्व को नीचे लाया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके.

  • फ़्लू

    इंफ्लूएंजा का संक्षिप्त नाम. एक वायरस जो कि सीजनल बीमारियों में मनुष्यों और जानवरों में फैलता है.

  • सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता

    एक बड़ी आबादी तक पहुंचने के बाद किस तरह से एक बीमारी का फैलाव सुस्त पड़ता है.

  • लड़ने में सक्षम

    ऐसा शख्स जिसका शरीर किसी बीमारी के सामने टिक सके या उसे रोक दे वह इससे इम्यून कहा जाता है. एक बार जब कोई शख्स कोरोना वायरस से उबर जाता है तो ऐसा माना जाता है कि वह एक निश्चित अवधि तक इस बीमारी का फिर से शिकार नहीं हो सकता.

  • वायरस के असर करने की अवधि

    किसी बीमारी का शिकार होने और उसका लक्षण दिखाई देना शुरू होने के बीच की अवधि

  • लॉकडाउन

    आवाजाही या रोज़ाना की ज़िंदगी पर पाबंदियां, जिनमें सार्वजनिक इमारतें बंद हैं और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए कहा गया है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन को कड़े उपायों के तौर पर लागू किया गया है."

  • शुरुआत

    किसी क्लस्टर या अलग-अलग इलाकों में तेज रफ्तार से बीमारी के कई मामले सामने आना.

  • महामारी

    किसी गंभीर बीमारी का कई देशों में एकसाथ तेजी से फैलना महामारी कहलाता है.

  • एकांतवास

    किसी संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इसकी जद में आए लोगों को अलग रखना.

  • सार्स

    सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम एक कोरोना वायरस का ही प्रकार है जो कि एशिया में 2003 में शुरू हुआ था.

  • सेल्फ-आइसोलेशन

    घर पर ही रहना और अन्य लोगों से सभी तरह के संपर्क से बचना ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.

  • सामाजिक दूरी

    अन्य लोगों से दूर रहना ताकि बीमारी के ट्रांसमिशन की रफ्तार कम की जा सके. सरकार की सलाह है कि अपने साथ रह रहे लोगों के अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से न मिलें. साथ ही सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से भी बचें.

  • आपातकालीन स्थिति

    किसी संकट के वक्त सरकार द्वारा रोज़ाना की जिंदगी पर पाबंदी लगाने के मकसद से उठाए गए कदम. इसमें स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना, लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाना और यहां तक कि सैन्य बलों को तैनात करना ताकि रेगुलर इमर्जेंसी सेवाओं को सपोर्ट किया जा सके."

  • लक्षण

    संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की कोशिश के तौर पर इम्यून सिस्टम से किसी बीमारी के संकेत. कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में दिक्कत होना है."

  • टीका

    ऐसा इलाज जिससे शरीर एंटीबॉडीज पैदा करता है, जो कि बीमारी से लड़ता है और आगे के संक्रमण से लड़ने की इम्युनिटी देता है."

  • वेंटीलेटर

    ऐसी मशीन जो कि ऐसे वक्त पर शरीर के लिए सांस लेने का काम करती है जब फ़ेफ़ड़े काम करना बंद करने लगते हैं.

  • विषाणु

    एक छोटा सा एजेंट जो कि किसी जीवित सेल के भीतर अपनी कॉपी बना लेता है. वायरस की वजह से ये सेल मरने लगती हैं और शरीर की सामान्य केमिकल प्रक्रियाओं को अवरुद्ध कर देती हैं जिससे बीमारी हो जाती है.

मुख्य कहानी नीचे जारी है

नेपाल की केपी ओली सरकार ने ये क़दम भारतीय रक्षामंत्री के लिपुलेख रोड लिंक उद्घाटन के 10 दिनों बाद उठाया है.

इससे छह महीने पहले भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 निरस्त करने के बाद अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था. भारत ये दावा करता रहा है कि नेपाल से उसकी सीमा लिपुलेख के बाद शुरू होती है.

जहाँ तक मानसरोवर यात्रा का सवाल है, महाकाली नदी के दोनों ओर ट्रेकिंग का रास्ता है. दोनो रास्ते काफ़ी पुराने हैं और हिमालय के सबसे कठिन इलाकों से होकर जाते हैं.

तिब्बत से होकर मानसरोवर पहुंचने तक ये रास्ते यात्रियों की शारीरिक ताकत और मानसिक इच्छाशक्ति की परीक्षा लेते हैं.

भारत की इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस 1960 के भारत-चीन युद्ध से पहले से ही यहां कालापानी क्षेत्र में मौजूद है और इस इलाके की रक्षा में लगी है.

नेपाल भी यहां पास के गाँवों में कुछ पुलिस बलों की तैनाती कर चुका है. मई के मध्य में इसने छंगरू गांव में अपने सशस्त्र पुलिसबलों को अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए तैनात किया था.

दोनों देशों के सुरक्षाबल यात्रियों के साथ हमेशा विनम्रता और गर्मजोशी से पेश आए हैं.

लिपुलेख क्षेत्र का एक और महत्व है. यह विवाद पर्वत अपी नंपा संरक्षण क्षेत्र में है जो पश्चिमी नेपाल में स्थित आपी पर्वत, नंपा पर्वत और व्यास के चारों ओर के इकोसिस्टम की सुरक्षा करता है.

ये सभी पर्वत चोटियां इस इलाक़े का सौंदर्य और बढ़ा देती हैं.

ये रास्ते तीर्थयात्रियों को धारचुला से आगे लिपुलेख दर्रे और उस जगह तक ले जाते हैं जहां देवी-देवाताओं का निवास माना जाता है: कैलास मानसरोवर.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

End of कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

End of अपने आप को और दूसरों को बचाना

मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

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    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

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    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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