You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
मुस्तफ़ा अल-कधीमि: लॉकडाउन के समय में बने इराक़ के प्रधानमंत्री
आर्थिक संकट और कोरोना वायरस से जूझ रही इराक़ की संसद ने महीनों तक चली तनातनी के बाद आख़िरकार नई सरकार को अपनी सहमति दे दी है.
बीते बुधवार मतदान के बाद पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी मुस्तफ़ा अल-कधीमि ने प्रधामंत्री पद की शपथ ले ली है.
कधीमि, अदेल अब्दुल महदी की जगह लेने के लिए नामित होने वाले तीसरे शख़्स हैं.
उन्होंने ट्वीट करके कहा है, "हमारा लक्ष्य इराक़ की सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि है."
हालांकि, कधीमि अपना कार्यकाल पूर्ण मंत्रीमंडल के साथ शुरू नहीं करेंगे.
राजनीतिक गुट अभी भी तेल और विदेश मंत्रालय जैसे मुख्य विभागों के मंत्रियों के नामों पर विचारविमर्श कर रहे हैं.
जबकि सांसदों ने व्यापार, न्याय, संस्कृति, कृषि और प्रवासी मामलों जैसे मंत्रालयों के लिए कधीमि के चुने हुए नेताओं को ख़ारिज कर दिया है.
अमरीका और संयुक्त राष्ट्र संघ ने नई सरकार के गठन का स्वागत किया है.
लेकिन उन्होंने कधीमि से जल्द ही इराक़ की समस्याओं पर विचार करने की अपील भी की है.
कौन हैं मुस्तफ़ा अल-कधीमि
शिया समुदाय से आने वाले 53 वर्षीय मुस्तफ़ा अल-कधीमि को राजनीतिक रूप से स्वतंत्र और तार्किक नेता माना जाता है.
वह एक पूर्व पत्रकार हैं जिन्होंने सद्दाम हुसैन के दौर में एक लंबा समय ब्रिटेन और ईरान में निर्वासन भोगा है. वे निर्वासन के दिनों में सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ खुलकर लिखते रहे हैं.
लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद उन्होंने इराक़ ख़ुफ़िया विभाग में काम किया.
साल 2016 से लेकर बीते महीने के अंत तक वह इराक़ी नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस के प्रमुख रहे हैं. इस विभाग में उनके कार्यकाल के आख़िरी वक़्त में उन्हें एक नई सरकार के गठन की ज़िम्मेदारी दी गई थी.
लेकिन संसद में ज़रूरी बहुमत जुटाने में असमर्थ रहने के बाद मोहम्मद अल्लावी और अदनान अल-ज़ुर्फी ने अपना नाम वापस ले लिया.
वहीं, कधीमि बड़े राजनीतिक गुटों के समर्थन लेने में कामयाब रहे.
इसके साथ ही उन्हें अमरीका और पड़ोसी देश ईरान की पसंद भी माना जाता है.
लेकिन उन्हें भी मंत्रियों के चुनाव को लेकर कई बार समझौता करना पड़ा.
कधीमि के सामने हैं कैसी चुनौतियां?
बीते बुधवार को कधीमि ने सांसदों से बात करते हुए कहा है कि उनकी सरकार इराक़ के लिए चुनौतियां खड़ी करने की बजाए समाधान निकालने पर काम करेगी.
कोरोनावायरस के मार्च 2020 में इराक़ पहुंचने से पहले हज़ारों लोग बगदाद की सड़कों पर निकलकर बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, विदेशी हस्तक्षेप और सार्वजनिक सेवाओं में अव्यवस्था के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.
पांच महीने तक जारी रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों और अज्ञात बंदूकधारियों ने पांच सौ से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को जान से मार दिया.
इन प्रदर्शनकारियों की तमाम माँगों में इराक़ के राजनीतिक तंत्र में बदलाव की शर्त भी शामिल थी.
ये तंत्र राजनीतिक पार्टियों के बीच नस्लीय और सामुदायिक पहचान के आधार पर पदों का आवंटन करता है. इससे भ्रष्टाचार और विशेष वर्ग के हितों की रक्षा करने का चलन शुरू होता है.
कधीमि ने शपथ ली है कि उनकी सरकार जल्द ही चुनाव कराकर प्रदर्शनकारियों को मारने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे.
कधीमि को कोविड 19 महामारी से भी निपटना चाहिए क्योंकि अब तक इसकी वजह से 102 इराक़ी नागरिकों की मौत हो चुकी है. क्योंकि इराक के स्वास्थ्य तंत्र की सीमित क्षमताएं हैं.
और इराक़ पहले से ही वैश्विक तेल कीमतों में आई गिरावट की वजह से पैदा हुई आर्थिक मंदी से जूझ रहा है.
क्या कर सकती है सरकार?
इराक़ सरकार की आमदनी में तेल की बिक्री नब्बे फीसदी भूमिका अदा तकरती है. ऐसे में फिलहाल कधीमि के सामने सार्वजनिक संस्थानों में काम करने वालों को तनख्वाहें देने की चुनौती है.
पिछली सरकार के अधिकारी सिविल सेवा में शामिल अधिकारियों के लाभ और भत्ते काटने पर विचार कर रही थी.
विश्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि इस साल इराक़ की अर्थव्यवस्था में 9.7 फीसदी का संकुचन आएगा और ये साल 2003 के बाद से इराक़ के लिए सबसे बुरा वार्षिक प्रदर्शन है.
इसी बीच जेहादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने भी अपने हमले बढ़ा दिए हैं जिससे लगता है कि वह इस मौके का फायदा उठाने की फिराक़ में है. क्योंकि इस समय ज़्यादातर सुरक्षाकर्मी महामारी की रोकथाम में लगे हुए हैं.
इराक़ और अमरीका आने वाले महीने में एक रणनीतिक वार्ता में भाग लेने जा रहे हैं.
ईरानी शिया जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या और शिया इराक़ी लड़ाका कमांडर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते ख़राब हो गए थे.
ईरान ने भी इसके जवाब में इराक़ के उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जहां पर अमरीकी सेना रह रही थी. लेकिन इसके लिए लड़ाकों को ज़िम्मेदार ठहराया गया.
इराक़ी संसद ने ड्रोन हमले के बाद अमरीकी सैन्य टुकड़ियों के इराक़ से वापसी के लिए मतदान किया.
लेकिन अब तक इस नए फैसले की तामील होना बाकी है.
नई सरकार को लेकर कैसी प्रतिक्रियाएं?
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कधीमि के साथ फोन पर बात करके नई सरकार को बधाई दी है.
पॉम्पियो ने ये भी बताया है कि अमरीका ने इराक़ को आने वाले 120 दिनों तक ईरान से बिजली ख़रीदने की अनुमति दे दी है.
वहीं, संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष प्रतिनिधि प्लसचार्ट ने कधीमि से मंत्रिमंडल के गठन का आग्रह किया है.
उन्होंने कधीमि से ये भी कहा कि उनके सामने एक युद्ध है जिसके लिए तैयार होने के लिए बिलकुल भी वक़्त नहीं है.
- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना महामारीः क्या है रोगियों में दिख रहे रैशेज़ का रहस्य
- कोरोना वायरसः वो शहर जिसने दुनिया को क्वारंटीन का रास्ता दिखाया
- कोरोना वायरस से संक्रमण की जांच इतनी मुश्किल क्यों है?
- कोरोना वायरस वैक्सीन: दुनिया भर की नज़र आख़िर भारत पर क्यों?
- कोरोना संकट: गूगल, फ़ेसबुक, ऐपल और एमेज़ॉन का धंधा कैसे चमका
- कोरोना वायरसः वो छह वैक्सीन जो दुनिया को कोविड-19 से बचा सकती हैं
- कोरोना वैक्सीन: दुनिया के टॉप नेताओं की अनोखी और मज़बूत पहल
- कोरोना वायरस महिलाओं और पुरुषों में भेद क्यों करता है
- कोरोना वायरस: संक्रमण से बचने के लिए इन बातों को गाँठ बांध लीजिए
- कोरोना वायरस: सरकार का आरोग्य सेतु ऐप कितना सुरक्षित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)