You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कोरोना वायरस के वैक्सीन का परीक्षण अमरीका में
- Author, मिशेल रॉबर्ट्स
- पदनाम, हेल्थ एडिटर, बीबीसी न्यूज़ ऑनलाइन
अमरीका में कोरोना वायरस से बचाने वाले वैक्सीन के मानव परीक्षण की शुरुआत कर दी गई है.
समाचार एजेंसी एपी मुताबिक़, वॉशिंगटन में सिएटल की काइज़र परमानेंट रिसर्च फैसिलिटी में चार मरीज़ों को ये वैक्सीन दी गई है.
इस वैक्सीन की वजह से कोविड 19 बीमारी नहीं हो सकती है लेकिन इसमें वायरस से निकाला गया एक हानिरहित जेनेटिक कोड है.
विशेषज्ञों के मुताबिक़, अभी ये तय करने में कई महीनों का वक़्त लगेगा कि ये वैक्सीन कामयाब होगी या नहीं.
वैक्सीन लेने वाला पहला इंसान कौन?
सिएटल की रहने वाली दो बच्चों की माँ 43 वर्षीय एक महिला को ये वैक्सीन दिया गया है.
इस महिला जेनिफ़र ने एपी से बात करते हुए कहा, "मेरे लिए ऐसा कुछ करना एक शानदार अवसर था."
दुनिया भर में वैज्ञानिक इस शोध पर तेज़ी से काम कर रहे हैं.
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ ने इस वैक्सीन पर चल रहे काम के लिए वित्तीय मदद दी है.
सामान्य तौर पर किसी भी वैक्सीन का पहला परीक्षण जानवरों पर किया जाता है, लेकिन इस बार इसका सीधा मानवीय परीक्षण किया गया है.
लेकिन मॉडेर्ना थेरेपटिक्स नाम की बायोटेक्नोलॉजी कंपनी कहती है कि इस वैक्सीन को ट्रायड और टेस्टेड प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया है.
इंपीरियल कॉलेज लंदन में संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ डॉ. जॉहन ट्रीगोनिंग ने कहा है, "इस वैक्सीन को पहले से मौजूद तकनीक से बनाया गया है. ये बेहद उच्च मानकों के साथ बनाई गई है जिन्हें हम मानते हैं कि कि वे मानवों के लिए सुरक्षित हैं और जिन लोगों को ये वैक्सीन दी जा रही है, उनकी सेहत पर हम बारीक़ निगाह बनाए हुए हैं."
"ये सच है कि ये काफ़ी जल्दी हो रहा है. लेकिन ये हम वैज्ञानिकों के बीच जंग नहीं है बल्कि वायरस के ख़िलाफ़ जंग है. ये मानवता की भलाई के लिए किया जा रहा है."
कैसे तैयार की गई वैक्सीन
मीज़ल्स जैसी बीमारी के लिए बनाए गए सामान्य टीके नष्ट किए गए या कमजोर वायरस से बनाए जाते हैं.
लेकिन mRNA-1273 को उस वायरस से नहीं बनाया गया है जिससे कोविड 19 बीमारी होती है.
बल्कि ये वैक्सीन लैब में बनाए गए वायरस के एक छोटे से हिस्से के जेनेटिक कोड को कॉपी करके बनाई गई है.
उम्मीद जताई जा रही है कि इस वैक्सीन की मदद से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता असली वायरस से लड़ने में कामयाब हो पाएगी.
वैक्सीन लेने वाले सभी लोगों को प्रयोगात्मक वैक्सीन के अलग-अलग डोज़ दिए गए हैं.
लेकिन अगर इन शुरुआती सुरक्षा जांचों के परिणाम ठीक भी आते हैं तो भी इस वैक्सीन के आम लोगों के लिए उपलब्ध होने में 18 महीने का समय लगेगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)