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इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने पार्टी नेतृत्व की चुनौती में जीत का दावा किया
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने लिकुड पार्टी में उनके नेतृत्व को चुनौती देने वाले चुनाव में भारी जीत का दावा किया है.
दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी में नेतन्याहू के नेतृत्व को चुनौती देने वाले पार्टी के सांसद और पूर्व शिक्षा मंत्री गिदोन सार ने अपनी हार स्वीकार करते हुए कहा कि अब मार्च में होने वाले आम चुनावों में वो नेतन्याहू का समर्थन करेंगे.
नेतन्याहू को 72.5 फ़ीसदी वोट मिले, जबकि गिदोन को 27.5 फ़ीसदी वोट हासिल हुए.
पार्टी के मुताबिक़ गुरुवार को हुई इस वोटिंग में लिकुड के एक लाख 16 हज़ार सदस्यों में से 49 फ़ीसदी ने वोट दिए.
भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को पार्टी के भीतर ही चुनौती मिली थी जिसके बाद लिकुड के नए नेता को चुनने के लिए प्राइमरी चुनाव कराए गए थे.
70 वर्षीय नेतन्याहू जहां भ्रष्टाचार के मामलों का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ उन्हें अब एक साल के भीतर तीसरी बार आम चुनाव का सामना भी करना पड़ेगा.
इससे पहले, इसी वर्ष 9 अप्रैल को हुए आम चुनाव में नेतन्याहू ने रिकॉर्ड पांचवीं बार जीत दर्ज की थी. हालांकि उन्हें बहुमत नहीं मिला और मध्यमार्गी ब्लू एंड व्हाइट पार्टी के बराबर ही 35 सीटें मिलीं. लेकिन दोनों में से कोई भी पार्टी सरकार नहीं बना सकी.
इसराइल की 120 सीटों वाली संसद नेसेट में आज तक किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. इसलिए बातचीत के ज़रिए गठबंधन सरकार बनाई जाती है.
लिकुड पार्टी के भीतर हुए इस चुनाव में गुरुवार की रात 11 बजे (इसराइल के समयानुसार) तक वोट डाले गए. इसके कुछ ही देर बाद नेतन्याहू ने ट्वीट कर अपनी जीत का दावा किया.
उन्होंने हिब्रू में एक ट्वीट कर लिखा, "भगवान की और आपकी मदद से मैं आगामी चुनावों में लिकुड की एक बड़ी जीत का नेतृत्व करूंगा और अभूतपूर्व उपलब्धियों के लिए इसराइल का नेतृत्व करना जारी रखूंगा."
बाद में 53 वर्षीय पूर्व मंत्री सार ने भी हिब्रू में ट्वीट कर अपनी हार को स्वीकार कर लिया.
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, "मैं इस चुनाव में खड़े होने के अपने निर्णय से संतुष्ट हूं. वो लोग जो अपने विश्वास की ख़ातिर जोखिम लेना नहीं चाहते वे कभी भी सफल नहीं होते हैं."
उन्होंने कहा, "मैं और मेरे साथी आम चुनावों में लिकुड की सफलता के लिए प्रचार करने में (नेतन्याहू) से पीछे खड़े रहेंगे."
सार पार्टी के जाने माने शख्स हैं और उनका दावा था कि वे लिकुड को एक नए रास्ते पर ले जाना चाहते हैं.
इससे पहले गुरुवार को ख़राब मौसम के बीच कम मतदान की रिपोर्ट के बीच नेतन्याहू ने फ़ेसबुक लाइव के ज़रिए पार्टी के सदस्यों से घरों से बाहर निकल कर वोट डालने की अपील की.
येरुशलम से बीबीसी की बारबरा पेलेट अशर ने कहा, "नेतन्याहू के आराम से जीतने की भविष्यवाणी पहले से ही की गई थी लेकिन उन्होंने इसके लिए जम कर प्रचार किया क्योंकि वे पार्टी पर अपनी मज़बूत पकड़ को दिखाना चाहते थे."
नेतन्याहू देश में सबसे लंबे समय से कार्यरत नेता हैं लेकिन भ्रष्टाचार के तीन मामलों में बीते महीने से उन्हें तेज़ी से की जा रही जाँच का सामना करना पड़ रहा है.
वे किसी भी ग़लत काम से इनकार करते रहे हैं और दावा करते हैं कि उनके ख़िलाफ़ यह एक राजनीतिक साज़िश है.
एक स्थानीय एक्ज़िट पोल ने दावा किया है कि नेतन्याहू को 70 फ़ीसदी से अधिक वोट मिले हैं.
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