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ईरान में पेट्रोल को लेकर क्यों लगी है आग
ईरान में पेट्रोल की क़ीमत बढ़ने और उसकी राशनिंग करने के विरोध में हुए प्रदर्शनों में अब तक दर्जनों लोग के मारे जाने की ख़बर है.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मारे गए लोगों की तादाद दर्जनों हैं लेकिन मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशल के अनुसार 21 शहरों में हो रहे विरोध प्रदर्शन में अब तक 106 लोग मारे गए हैं.
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत शुक्रवार को हुई जब सरकार ने पेट्रोल पर मिलने वाली सब्सिडी कम कर दी जिसके कारण पेट्रोल की क़ीमत 50 फ़ीसदी बढ़ गई.
सरकार का कहना है कि सब्सिडी कम करने और बढ़ी हुई क़ीमत से जो अतिरिक्त पैसा आएगा उसे ईरान की ग़रीब जनता पर ख़र्च किया जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के प्रवक्ता रूपर्ट कोलविले ने ईरान के सुरक्षाकर्मियों से अपील की है कि वो प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ अत्यधिक बल का प्रयोग न करें.
इंटरनेट पर पाबंदी
सरकार ने इंटरनेट पर भी पाबंदी लगा दी है. शुक्रवार से शुरू हुआ प्रदर्शन जब नहीं रुका तो शनिवार को सरकार ने इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी.
इंटरनेट शटडाउन पर नज़र रखने वाली संस्थान नेटब्लॉक ने कहा है कि ईरान में 65 घंटों से इंटरनेट तक़रीबन बंद है और बचे हुए नेटवर्क में भी कटौती की जा रही है. ईरान का बाहरी दुनिया से संपर्क आम दिनों की तुलना में केवल चार फ़ीसदी रह गया है.
सरकार ने न सिर्फ़ पेट्रोल की क़ीमत बढ़ा दी, बल्कि पेट्रोल की राशनिंग भी शुरू कर दी.
पेट्रोल की क़ीमत दोगुनी
नए नियमों के मुताबिक़, हर वाहन मालिक को एक महीने में 60 लीटर पेट्रोल ख़रीदने की ही इजाज़त होगी और इसके लिए उसे 15 हज़ार रियाल यानी क़रीब 32 रुपए प्रति लीटर की क़ीमत चुकानी होगी. अगर उन्हें 60 लीटर से ज़्यादा पेट्रोल की ज़रूरत होगी तो हर लीटर के लिए उन्हें दोगुने दाम यानी 30 हज़ार रियाल देने होंगे.
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, इससे पहले महीने में 250 लीटर पेट्रोल 10 हज़ार रियाल प्रति लीटर की दर से ख़रीदा जा सकता था.
इससे लोग इतने नाराज़ हुए कि वो सड़कों पर आ गए और धीरे-धीरे विरोध प्रदर्शन कई शहरों में फैल गया. वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियों को सड़कों पर लाकर रोक दिया जिससे हर चौराहे पर ट्रैफ़िक जाम हो गई.
रविवार तक लगभग 100 शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए.
हिंसक प्रदर्शन
फ़ार्स समाचार एजेंसी के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने कम से 100 बैंकों, दुकानों, पेट्रोल स्टेशनों और सरकारी दफ़्तरों को आग लगा दी है. एक हज़ार से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
बीबीसी संवाददाता राणा रहीमपोर के अनुसार ''प्रदर्शन अब सिर्फ़ पेट्रोल की बढ़ी क़ीमत तक सीमित नहीं है क्योंकि लोग अब तानाशाही की मौत के नारे लगा रहे हैं, इसका मतलब है कि वो मौजूदा सरकार को हटाना चाहते हैं.''
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने तेहरान के क़रीब तीन सुरक्षाकर्मियों को छूरेबाज़ी कर मार दिया.
बीबीसी फ़ारसी की संवाददाता जियार गोल के अनुसार, ''विभिन्न ग़ैर-सरकारी सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार पिछले पाँच दिनों में 200 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और 3000 से ज़्यादा घायल हुए हैं. लेकिन सरकार केवल कुछ ही लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर रही है. मारे गए लोगों के परिजन कह रहे हैं कि अधिकारी उनके शव भी अंतिम संस्कार के लिए नहीं दे रहे हैं.''
लेकिन ईरान सरकार ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को दंगाई कहा है. सरकार के मुताबिक़ इन प्रदर्शनों के पीछे विदेशी शक्तियों का हाथ है.
राष्ट्रपति रूहानी ने कहा है, ''लोगों को विरोध प्रदर्शन करने का हक़ है लेकिन प्रदर्शन और दंगा में फ़र्क़ है. हम समाज में असुरक्षा फैलाने की इजाज़त नहीं दे सकते हैं.''
पिछले साल मई में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे जिसके कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है.
ईरान में 2017 के बाद से ये अबतक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है. 2017 में हुए विरोध प्रदर्शन में 25 लोग मारे गए थे.
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