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कौन हैं जो यूरोप के लिए टाइम बम साबित हो सकते हैं ?
- Author, फ़्रैंक गार्डनर
- पदनाम, बीबीसी सुरक्षा संवाददाता
बुरी फिल्मों के बारे में आपको पहले से पता होता है कि आख़िर में क्या होने जा रहा है. मध्य पूर्व में भी एक जगह वैसी ही कहानियां दोहराई जा रही हैं.
कुर्द बलों द्वारा चलाए जा रहे शिविरों और डिटेंशन सेंटरों में काफी गुस्सा है. यहां इस्लामिक स्टेट के हजारों लड़ाकू और उनके आश्रित रह रहे हैं.
इस महीने तुर्की की ओर से सीरियाई क्षेत्र पर हमले के बाद उन्होंने कैद से बच निकलने, बंदी बनाने वालों और पश्चिमी देशों से बदला लेने की धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि वो अपने संगठन को पुनर्गठित करके साल 2013 की तरह दोबारा बनाएंगे.
इसमें संदेह नहीं कि तुर्की की कार्रवाई से यह संकट बड़ा हुआ है. इस्लामिक स्टेट के सौ क़ैदी पहले ही भाग गए हैं. कुछ खबरों में इनकी संख्या 800 तक बताई गई है. सच्चाई यही है कि समस्या काफी गंभीर है.
इसके लिए यूरोप की सरकारों को दोषी माना जा रहा है. अमरीका के अगुवाई वाले गठबंधन के हाथों इस्लामिक स्टेट के हारने के बाद दुनिया के पास इन सभी हारे हुए जिहादियों और उनके आश्रितों की समस्या सुलझाने के लिए सात महीने का वक़्त था. लेकिन ये हो न सका.
कौन दोषी?
इस्लामिक स्टेट में सीरिया और इराक के लोग बहुतायत में हैं लेकिन इन दोनों जगहों पर इस समय हमले हो रहे हैं और हाल ही में एक इराकी अदालत ने फ्रांस के एक जिहादी को मौत की सजा सुनाने के बाद इस देश में और लोगों के आने की गति धीमी हो गई है.
इस्लामिक स्टेट के कट्टर लड़ाकू और उनके आश्रित क्षेत्र से बाहर यूरोप, उत्तरी अफ्रीका, मिस्र, सऊदी अरब, काकेशस और मध्य एशिया लगभग सभी जगह से आते हैं.
पूर्वोत्तर सीरिया में सबसे बड़े शिविर अल हवल की हालिया रिपोर्ट में यहां इस्लामिक स्टेट के बढ़ते प्रभाव के बारे में बताया गया है. बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल रही हैं और कुछ मामलों में चरम और हिंसक विचारधारा से उनका दिमाग बदला जा रहा है.
लंदन रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (आरयूएसआई) में अनुसंधान से जुड़े माइकल स्टीफस कहते हैं, "वहां (शिविरों के अंदर) बहुत चरमपंथी हैं. अगर वे बच निकलते हैं या इन शिविरों में अभी भी बच्चों को पालने की अनुमति देते हैं, तो 10 साल में समस्या और गंभीर हो जाएगी."
वाशिंगटन और उसके कुर्द सहयोगी यूरोप पर अपने 4,000 से अधिक नागरिकों को वापस करने के लिए दबाव बना रहे हैं जो आईएस के बढ़ते प्रभाव के समय अनजाने में अपनी सीमा पारकर सीरिया पहुंच गए थे.
हालांकि, यूरोप उन्हें वापस नहीं लेना चाहता है. उनकी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी कि इस्लामिक स्टेट के अंतिम दिनों में बच गए लोगों में से कई खतरनाक चरमपंथी बन गए होंगे.
क्या कहती है जर्मन पत्रिका?
जर्मन पत्रिका डेय श्पीगेल के अनुसार, जर्मन अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान में शिविरों में रह रहे एक तिहाई नागरिक "चरमपंथी हमलों सहित हिंसक वारदातों को अंजाम देने में सक्षम हैं." पुरुष और महिला मिलाकर इनकी कुल संख्या 27 है. पत्रिका के मुताबिक जर्मन सरकार इनकी वापसी को लेकर अनिच्छुक है.
समस्या दो तरफा है. पहली, आशंका यह है कि जब इन जिहादियों पर उनके गृह देशों में मुकदमा चलाया जाएगा तो उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिल पाएंगे.
उस मामले में सरकारों पर खतरनाक पुरुषों और महिलाओं को वापसी की अनुमति देने का आरोप लगेगा जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा पैदा होगा.
दूसरा, अगर उन्हें दोषी ठहराया गया, तो वे यूरोपीय जेलों में होने वाली हिंसक कट्टरता के लिए एक और समस्या खड़ी कर देंगे, जहां कैदियों में एक असमानता है जो विशेष रूप से फ्रांस के मुस्लिम समुदायों से आते हैं.
इसका परिणाम यह है कि यूरोप कार्रवाई करने में विफल रहा है और यह समस्या लगातार बनी रही. खतरनाक जिहादियों की तरह, इन शिविरों के भीतर हजारों निर्दोष महिलाओं और बच्चों को अनिश्चितता की स्थिति में छोड़ दिया गया है. जहां कुछ मामलों में, जो लोग इस्लामिक स्टेट के कट्टर नियमों का पालन नहीं करते हैं, उन्हें समझाया जाता है या सजा दी जा रही है.
1960 के दशक में जब मिस्र के कट्टरपंथी इस्लामवादी सैय्यद कुतुब को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें मार दिया गया था तब उनका लेखन जिहादी सोच का मूल मार्गदर्शक बन गया था.
मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या के बाद साल 1981 में ओसामा बिन लादेन के संगठन अल क़ायदा को पनपने का मौका मिला.
साल 2003 में अमरीका के नेतृत्व में इराक पर आक्रमण के बाद, अमरीकियों द्वारा बनाए गए अबू ग़रीब और कैंप बुक्का जेलों में बंद कैदी अब इस्लामिक स्टेट के रूप में सामने आए हैं.
हाल ही में मारे गए अबु बक्र अल-बग़दादी जैसे नेता ने अन्य कैदियों के साथ विचार और फोन नंबर साझा किए और जब वे रिहा हुए तब उन्होंने विद्रोह की एक योजना तैयार की.
इराक में अयोग्य सरकार के आठ साल के शासन के दौरान देश के सुन्नी अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव हुआ जिसके बाद जिहादी साल 2014 में मोसुल और उत्तरी इराक में एकत्र हो गए.
बाकी इतिहास है. उनकी स्वघोषित सत्ता को खत्म करने में पांच साल लग गए. तो क्या फिर से ऐसा हो सकता है? माइकल स्टीफेंस जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि शायद नहीं.
तो फिर क्या होगा?
माइकल स्टीफेंस का मानना है कि सच्चाई यह है कि इस्लामिक स्टेट को फिर से एकजुट होने में कठिनाई होगी, लेकिन वे आने वाले कई वर्षों तक परेशान करेंगे.
हालांकि जमीन पर वास्तव में स्थितियां ऐसी नहीं है कि वे साल 2013 की तरह वापसी कर सकें.
सीरिया और इराक के विस्तृत क्षेत्र पर पांच साल तक कब्जा और नियंत्रण रखने वाले इस्लामिक स्टेट के लिए यह मुश्किल लगता है कि वह उसी तरह की भौगोलिक परिस्थिति में खुद को संगठित कर सकता है.
हालांकि, वर्षों से इस्लामी चरमपंथ पर शोध कर रहे और अब टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल चेंज के लिए काम करने वाली डॉक्टर एम्मान अल बदावी चेतावनी देते हुए कहते हैं कि इस्लामिक स्टेट दोबारा संगठित हुआ तो ये उतना ही घातक और विनाशकारी होगा जितना वर्ष 2014 और 2017 के दौरान था.
इस्लामिक स्टेट के तहस-नहस होने से विस्थापित हुए हजारों लोगों के लिए जब तक सुरक्षित और मानवीय समाधान नहीं निकाला जाएगा, तब तक यूरोप और अन्य देशों के लिए एक तरह का टाइम बम टिकटिक करता रहेगा.
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