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चीन की आर्थिक विकास दर लगातार क्यों गिर रही है ?
अमरीका के साथ ट्रेड-वॉर से जूझती और घरेलू बाज़ार में कम मांग की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था इस साल की तीसरी तिमाही में उम्मीद से भी कम रफ़्तार पर आ गई है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक तीसरी तिमाही में चीन में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की वृद्धि दर 6 प्रतिशत दर्ज की गई है.
ध्यान देने वाली बात ये है कि ये गिरावट अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के सरकार के प्रयासों के बावजूद दर्ज की गई है. इनमें टैक्स में कटौती जैसे उपाये शामिल हैं.
ताज़ा आंकड़ें ये बता रहे हैं कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने पिछले तीन दशकों के मुकाबले अपनी रफ़्तार फ़िलहाल खो दी है.
चीन की अर्थव्यवस्था में आने वाले उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के हिसाब से ख़ासा महत्व रखते हैं.
हाल के दशकों में हुआ ये है कि चीन की अर्थव्यवस्था ने बाक़ी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए इंजन का काम किया है.
कुछ जानकारों का मानना है कि चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है जहां मंदी का ख़तरा बढ़ता जा रहा है.
वर्ष 1992 में चीन की जीडीपी 14 प्रतिशत के आंकड़ें को छूकर धीरे-धीरे नीचे उतरती रही है. साल 2008 में 14 प्रतिशत की रफ्तार दोबारा देने के बाद गिरावट लगातार जारी है.
'कैपिटल इकोनॉमिक्स' में चीन की अर्थव्यवस्था के जानकार जुलियन इवांस का मानना है कि चीन की अर्थव्यवस्था पर दबाव है जो आने वाले महीनों में और बढ़ेगा.
उनका मानना है कि नीति-निर्माताओं को इस मामले में और कदम उठाने की ज़रूरत है, लेकिन किसी भी उपाय का असर होने में वक्त लगेगा.
चीन और चुनौतियां
पिछले साल से ही अमरीका के साथ चीन का ट्रेड-वॉर जारी है जिसकी वजह से क़ारोबार और उपभोक्ताओं में एक तरह की अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.
दूसरे मोर्चे पर चीन घरेलू चुनौतियों से जूझ रहा है. इसमें स्वाइन फीवर भी शामिल है. महंगाई बढ़ने से उपभोक्ताओं की ख़र्च करने की क्षमता पर असर पड़ा है.
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने इस हफ्ते चीन के लिए अपना पूर्वानुमान ज़ाहिर किया है कि साल 2019 में चीन की अर्थव्यवस्था 6.1 प्रतिशत से 6.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है.
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने ट्रेड-वॉर और घरेलू दिक्कतों को इसकी प्रमुख वजह बताया है.
एशिया बिज़नेस संवाददाता करिश्मा वासवानी के मुताबिक, कई अर्थशास्त्रियों का ये मानना है कि चीन की अर्थव्यवस्था की असर तस्वीर इससे भी ज्यादा गड़बड़ हो सकती है.
चीन ने संकेत दिए हैं कि ये आंकड़ें चिंताजनक हैं. कुछ दिन पहले चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने स्थानीय अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि इस साल के लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्हें 'सबकुछ' करना चाहिए.
चीन में ये गिरावट वैसे तो कोई नई बात नहीं है लेकिन मौजूदा चुनौतियों की वजह से बात ज्यादा गंभीर हो गई है. चीन की राजनीतिक स्थिरता भी बेहतर अर्थव्यवस्था पर निर्भर करती है.
कम्युनिस्ट पार्टी का बीते 40 साल का शासन इसका प्रमाण है. अपने शासन को बनाए रखने के लिए पार्टी पर भी दबाव है.
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