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कौन देगा उत्तर कोरिया को खाद्य सहायता?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस हफ्ते उत्तर कोरिया की दो दिवसीय यात्रा पर जाने वाले हैं.
चीनी मीडिया ने बताया है कि दोनों देश कोरियाई प्रायद्वीप के राजनीतिक तनाव और परमाणु निरस्त्रीकरण पर चर्चा करेंगे.
चीन उत्तर कोरिया का ज़रूरी आर्थिक भागीदार है. उत्तर कोरिया फिलहाल भयंकर सूखे के कारण अनाज की कमी से जूझ रहा है. देश को खाद्द के रूप में मदद की बेहद ज़रूरत है.
लेकिन अनाज भेजने में कौन उत्तर किया की सहायता करेगा? और उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर कोरिया में अनाज की भारी कमी
उत्तरी कोरियाई मीडिया के अनुसार देश बड़े सूखे से जूझ रहा है. ऐसा सूखा बीते 40 सालों में अब तक कभी नहीं पड़ा.
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक़ उत्तर कोरिया के लगभग एक करोड़ लोग भोजन की कमी से जूझ रहे हैं जो देश की कुल आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा है.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार उत्तर कोरिया में एक व्यक्ति को प्रति दिन केवल 300 ग्राम भोजन ही मिल रहा है.
ऐसा कहा जा रहा है कि 1990 के दशक में यहां एक विनाशकारी अकाल पड़ा था जिसमें हज़ारों लोगों की जान चली गई थी.
कौन भेज रहा है मदद?
निश्चित रूप से उत्तर कोरिया का बड़ा आर्थिक मददग़ार चीन है लेकिन उसकी सहायता की सीमा कितनी होगी, इसका पता लगाना मुश्किल है.
ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से तो मदद देता ही है लेकिन द्वीपक्षीय रिश्तों के आधार पर मुल्कों को सहायता देता है.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, चीन ने 2012 में उत्तर कोरिया को 2,40,074 टन खाद्य सहायता भेजी थी. ये यूरोपीय कमीशन की भेजी गई सहायता से 80 गुना अधिक थी.
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साल 2016 में चीन ने बाढ़ प्रभावित उत्तर कोरिया को 30 लाख डॉलर की मानवीय मदद देने की घोषणा की थी. उस वक्त अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उत्तर कोरिया की मदद के लिए ज़रूरी संसाधन एकत्र नहीं कर पाए थे.
2014 में अमरीकी कांग्रेस में पेश की गई एक रिपोर्ट में कहा गया था "मौजूदा दौर में उत्तर कोरिया की खाद्य सहायता का सबसे बड़ा स्रोत चीन है, लेकिन इसकी निगरानी करने के लिए उचित व्यवस्थाओं की जानकारी किसी को नहीं है."
चीन के अलावा अन्य कई देश भी संयुक्त राष्ट्र और इंटरनेशनल रेड क्रॉस जैसी ग़ैर-सरकारी संगठनों के ज़रिए उत्तर कोरिया तक मदद पहुंचाते आए हैं.
मौजूदा खाद्यान्न संकट को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने सदस्य देशों से 10.20 करोड़ डॉलर की ज़रूरत की अपील की है.
इसी सप्ताह दक्षिण कोरिया ने घोषणा की है कि वह विश्व खाद्य कार्यक्रम के माध्यम से उत्तर कोरिया को 50 हज़ार टन चावल भेजने के लिए तैयार है. इससे पहले भी दक्षिण कोरिया ने 80 लाख डॉलर का दान दिया था.
इधर रूस ने भी कहा कि उसने उत्तर कोरिया के लिए 40 लाख डॉलर के अलावा 4,000 टन अनाज भेजा है.
डेनमार्क, जर्मनी, नॉर्वे, कनाडा, स्वीडन, स्वीट्ज़रलैंड. फिनलैंड और आयरलैंड उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने सयुंक्त राष्ट्र की अपील सुनते हुए सहायता करने की सहमति दी है.
प्रतिबंधों का असर
उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ मौजूदा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध साफ़ तौर पर मानवीय सहायता पर किसी तरह प्रतिबंध नहीं लगाते.
इसी साल की शुरुआत में, अमेरिका ने खाद्य सहायता पर प्रतिबंध और श्रमिकों के लिए यात्रा प्रतिबंध में ढील दी थी. हालांकि, सहायता संगठनों का कहना है कि प्रतिबंधों के कारण उत्तर कोरिया में काम करना बहुत मुश्किल है.
इस महीने, एक संस्था ने खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य परियोजना को यह कहते हुए समय से पहले ख़त्म कर दिया थी कि अमरीकी प्रतिबंधों ने काम करना "असंभव" बना दिया है.
मानवीय मदद में होती गिरावट
पिछले एक दशक में उत्तर कोरिया और दुनिया के बाकी देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के कारण उसे मिलने वाली मानवीय मदद में गिरावट आई है.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 2012 के बाद से उत्तर कोरिया के लिए आवश्यक धनराशि जुटाना और मुश्किल हो गया है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम के आंकड़ों के अनुसार भी 2015 से खाद्यान्न के लिए मिलने वाली सहायता में गिरावट देखी गई है. जबकि संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों से समर्थन के लिए लगतार अनुरोध होते रहे हैं.
पिछले एक दशक में उत्तर कोरिया के दक्षिण कोरिया - दोनों को दिए जाने वाले समर्थन में गिरावट आई है.
2007 के दशक के बाद से दक्षिण कोरिया की सरकार या ग़ैर सरकारी संगठनों से उत्तर कोरिया को किसी तरह की सहायता महीं मिली है.
कभी अमरीका उत्तर कोरिया का बड़ा सहायक हुआ करता था.
2014 की अमरीकी कांग्रेसेशनल रिसर्च सर्विस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1995 से 2008 तक उत्तर कोरिया को मिलने वाले आधे से अधिक खाद्य सहायता में अमरीका सबसे अहम देश था.
लेकिन उसके बाद से, मानवीय मदद की मात्रा कम होती गई है. उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण और मिसाइल लॉन्च करने की योजना पर कायम रहने के कारण ऐसा हुआ .
लेकिन 2017 में एक लंबे अंतराल के बाद अमरीका ने उत्तर कोरिया में आई बाढ़ के लिए युनिसेफ़ को 10 लाख डॉलर की सहायता दी थी.
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