'रडार काम नहीं कर रहे थे, तब भी गिरा दिए भारत के दो विमान' - पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों की समीक्षा

    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था, आईएमएफ़ से बेलआउट पैकेज, बढ़ती मंहगाई और ईरान और अमरीका के बीच ख़राब होते रिश्ते से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रही.

सबसे पहले बात पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की.

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार ख़राब होती जा रही है. मंहगाई बढ़ती जा रही है और स्टॉक मार्केट पूरी तरह क्रैश हो गया है.

सप्ताह के शुरू में पाकिस्तान को आर्थिक तंगी से निकालने के लिए बेलआउट पैकेज पर पाकिस्तान और आईएमएफ़ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) में समझौता हो गया.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय के सलाहकार अब्दुल हफ़ीज़ शेख़ ने आईएमएफ़ से समझौते की आधिकारिक घोषणा कर दी.

अब्दुल हफ़ीज़ ने सरकारी टीवी चैनल पीटीवी पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि पाकिस्तान को अगले 39 महीने के दौरान आईएमएफ़ से छह अरब डॉलर मिलेंगे. उन्होंने कहा कि आर्ईएमएफ़ के अलावा वर्ल्ड बैंक और एशिया डेवेलपमेंट बैंक (एडीबी) से भी दो-तीन अरब डॉलर का क़र्ज़ मिलेगा.

नए टैक्स का ख़ौफ़

अख़बार के अनुसार समझौते के तहत पाकिस्तान क़रीब 750 अरब रुपए के नए टैक्स लगाएगा.

इस समझौते की शर्तें जैसे-जैसे सामने आने लगीं बाज़ार और ख़राब होता चला गया.

शुक्रवार को पाकिस्तानी शेयर बाज़ार इस क़दर प्रभावित हुआ कि डॉलर की क़ीमत 150 पाकिस्तानी रुपए को पार कर गई.

जंग अख़बार के अनुसार पाकिस्तान के इतिहास में डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपया इतना कमज़ोर कभी नहीं हुआ था.

स्टॉक मार्केट में 800 से ज़्यादा प्वाइंट की गिरावट देखी गई.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार पाकिस्तान की करेंसी इस समय एशिया की सबसे कमज़ोर करेंसी हो गई है. अख़बार कहता है कि अफ़ग़ानिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश की करेंसी भी पाकिस्तानी रुपए से ज़्यादा मज़बूत है.

अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने जब प्रधानमंत्री का पद संभाला था उस वक़्त एक अमरीकी डॉलर की क़ीमत 124 पाकिस्तानी रुपए थी लेकिन इमरान की तमाम कोशिशों के बावजूद उसमें कोई बेहतरी नहीं हुई और अब एक डॉलर 150 रुपए का हो गया है.

इमरान ज़िम्मेदार

पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी इसके लिए सीधे तौर पर इमरान ख़ान और उनकी नीतियों को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार नेता प्रतिपक्ष और मुस्लिम लीग (नवाज़) के अध्यक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने इमरान ख़ान को निशाना बनाते हुए कहा, ''पाकिस्तान आईएमएफ़ के सामने लेट गया है. ये है इमरान ख़ान का नया पाकिस्तान.''

उन्होंने इमरान पर हमला करते हुए कहा, ''सब जानते थे कि 'सेलेक्टेड' प्रधानमंत्री की समझ कम है. न काम को समझते हैं न जानते हैं. लेकिन बदक़िस्मती से इमरान ख़ान ढिठाई के साथ झूठ भी बहुत बोलते हैं. पाकिस्तान के इतिहास में उनसे ज़्यादा झूठा प्रधानमंत्री मैंने नहीं देखा है.''

शहबाज़ शरीफ़ के बेटे हमज़ा शरीफ़ ने भी इमरान ख़ान पर हमला बोलते हुए कहा, ''डॉलर भी नियाज़ी साहब (इमरान ख़ान) की तरह कहीं ठहर नहीं रहा. अब हम आपका ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं कर सकते. अब आपको जाना होगा.''

विपक्ष करेगा आंदोलन

अख़बार दुनिया के अनुसार मुस्लिम लीग (नवाज़) ने ईद के बाद सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन करने का फ़ैसला किया है.

अख़बार दुनिया के अनुसार इस मामले पर और विचार विमर्श करने और सरकार को घेरने के लिए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने रविवार को तमाम विपक्षी पार्टी के नेताओं को इफ़तार की दावत के बहाने बुलाया है.

मुस्लिम लीग (नवाज़) की उपाध्यक्ष और नवाज़ शरीफ़ की बेटी मरियम नवाज़ ने भी बिलावल की दावत क़ुबूल कर ली है. दूसरे विपक्षी नेताओं ने भी बैठक में शामिल होने पर अपनी सहमति दे दी है.

लेकिन इमरान ख़ान अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कह रहे हैं कि ये परेशानी केवल कुछ समय के लिए है जल्द ही इससे निजात मिल जाएगी.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार इमरान ख़ान का कहना था, ''हमने अहम फ़ैसले किए हैं. चंद महीने में बेहतर नतीजे सामने आएंगे. देश का फ़ायदा निजी राजनीतिक फ़ायदे-नुक़सान से हमेशा ऊपर रहता है.''

पाकिस्तान का कहना है कि वो अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात में किसी कैम्प का हिस्सा नहीं बनेगा.

अख़बार जंग के अनुसार इस्लामाबाद में पत्रकारो से बात करते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा, ''ईरान हमारा पड़ोसी है और इस क्षेत्र का एक अहम मुल्क है. अमरीका और ईरान के बीच किसी भी विवाद में हम किसी की तरफ़दारी नहीं करेंगे.''

उसी संवाददाता सम्मेलन में क़ुरैशी से जब बालाकोट हमले और रडार से जुड़े भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, ''मौसम की ख़राबी के कारण हमारे रडार काम नहीं कर रहे थे तब हमने भारत के दो विमान मार दिए थे. मेरा मोदी साहब से सवाल है कि हमारे रडार काम कर रहे होते तो भारत के साथ क्या होता वो ज़रा ये सोच लें.''

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