You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पाकिस्तान-चीन बस सेवा से क्या कुछ बदल जाएगा
- Author, उमर दराज़
- पदनाम, बीबीसी संवाददता, उर्दू सेवा
चलते हैं तो पाकिस्तान से चीन की तरफ चलिए!
इस सफर की ख्वाहिश रखने वालों के लिए अब तक हवाई जहाज़ ही इकलौता ज़रिया था, लेकिन अब सड़क मार्ग भी एक विकल्प बन गया है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत पहली बस सेवा का आगाज़ किया गया है.
नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट नेटवर्क नाम की कंपनी द्वारा चलाई जाने वाली ये बस पाकिस्तान के लाहौर को चीन के ऐतिहासिक शहर कासगार से जोड़ती है. बस सेवा का ट्रायल रन पूरा हो चुका है.
लाहौर, इस्लामाबाद, गिलगित, बाल्टिस्तान के दिलफरेब इलाकों से गुज़रती हुई ये बस सीधे चीन में दाख़िल होती है.
इसमें एक तरफ़ से जाने में 36 घंटे लगते हैं. बस में सवार होने से पहले आपके पास ज़रूरी दस्तावेज़ जैसे वीज़ा वगैरह होना ज़रूरी है.
लंबे समय तक चल पाएगी?
हालांकि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए चलाई जाने वाली ये बस आधुनिक तकनीक से लैस है. फिर भी क्या बस की सीट पर इतना लंबा सफ़र आसान होगा?
विमान द्वारा लाहौर-बीजिंग का ये सफ़र तकरीबन आठ घंटे का है.
पर्यटन के मक़सद से जाने वालों के लिए ये सफ़र शायद लंबा और कठिन न हो मगर बस चलाने वाली कंपनी के मुताबिक़ ये सेवा कारोबारियों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है.
लेकिन अगर व्यापारी वर्ग इस सेवा का इस्तेमाल नहीं करता तो क्या ये बस सेवा लंबे समय तक चल पाएगी?
ये सारे सवाल आपके जहन में घूमते हैं.
नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के सीईओ मोहम्मद अनवर ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तानी व्यापारी वर्ग में ऐसी बस सेवा की काफ़ी मांग थी.
उनका दावा है कि शुरुआती दो बसों में चीन जाने वाले ज़्यादातर लोगों का संबंध व्यापार से था.
मोहम्मद अनवर का कहना था, "चीन में पाकिस्तान के छात्रों की एक बड़ी तादाद भी मौजूद है जो इस सेवा का फ़ायदा उठाना चाहेंगे."
"हमारे पास काफ़ी पर्यटक भी आ रहे हैं. मगर सबसे पहले नंबर पर कारोबारी हैं जो पाकिस्तान और चीन के बीच सफ़र करना चाहते हैं."
क्या बस हवाई जहाज़ को पीछे छोड़ती है?
लाहौर से हाल ही में रवाना होने वाली दूसरी बस में स्थानीय व्यापारी काज़िम सवानी सफ़र कर रहे थे.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बस बहुत ज़्यादा सस्ती पड़ेगी.
काज़िम सवानी कपड़े के व्यापार में इस्तेमाल होने वाले रंग और दूसरे केमिकल्स का कारोबार करते हैं. उनका चीन आना-जाना लगा रहता है.
बस के ज़रिये वो अपने ख़र्च को सीमित करना चाहते हैं. उन्होंने कहा, "अगर बस सेवा आरामदेह रही तो मैं काफ़ी पैसे बचा सकता हूं."
हवाई जहाज़ से सस्ती बस
ट्रांसपोर्ट कंपनी के मोहम्मद अनवर ने बीबीसी को बताया, "बस का एकतरफ़ा किराया 13 हज़ार जबकि रिटर्न टिकट 23 हज़ार रुपये का है."
काज़िम सवानी का कहना था कि बस सफ़र के ज़रिए वो अपने हर दौरे पर 50 से ले कर 60 हज़ार रुपये तक बचा सकते हैं.
वो कहते हैं, "वैसे चीन के लिए हवाई जहाज़ का टिकट 80 हज़ार से एक लाख रुपये तक का पड़ता है. मगर क़ीमत पर सफ़र के लिए 72 घंटे बस में भी गुजारने पड़ते हैं."
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के इस रूट पर चलाई जाने वाली इस बस को एक चीनी कंपनी ने ही तैयार किया है. एक वक्त में इसमें 26 मुसाफिर सवार हो सकते हैं.
कितनी आरामदेह है बस?
बस में दोनों तरफ़ दो-दो सीटें हैं लेकिन वो बहुत चौड़ी नहीं हैं. सीट को बाहर की तरफ़ चंद सेंटीमीटर खोला भी जा सकता है और झुकाकर लंबा (पुश बैक) भी किया जा सकता है.
बस के पीछे दो बेड भी लगाए गए हैं. मगर सवाल ये है कि 36 घंटे के इस सफ़र में कितने मुसाफिरों को कमर सीधी करने का मौका मिलेगा.
ऐसे लंबे सफ़र के लिए जो सबसे ज़रूरी चीज़ है, वो है शौचालय या गुस़लखाना और ये बस में मौजूद नहीं है.
इसके बारे में मोहम्मद अनवर कहते हैं, "सफर के दौरान बस कुछ जगहों पर रुकेगी जहां मुसाफिर को खाने-पीने, नमाज़ और दूसरे ज़रूरी कामों के लिए समय मिल पाएगा."
हमें बस के भीतर मुसाफिरों के मनोरंजन का भी कोई साधन नज़र नहीं आया.
आधुनिक मॉडल वाली बसों में सीट के पीछे अक्सर स्क्रीन लगे दिखाई देती है, लेकिन इस बस में ये सहूलियत नहीं है.
कंपनी के मैनेजर क़मर एजाज़ के मुताबिक़ "हर बस पर वाई-फ़ाई के अलावा मोबाइल फ़ोन चार्ज करने की सहूलियत मौजूद है."
वो कहते हैं, "सुरक्षा के लिहाज़ से हर बस के अंदर चार सिक्योरिटी कैमरे लगाए गए हैं."
क़मर एजाज़ ने बताया कि इन कैमरों की मदद से कंपनी के कंट्रोल रूम से बस के अंदर और बाहर नज़र रखी जा सकती है. "सैटेलाइट की मदद से बस के मूवमेंट पर निगरानी रखी जाएगी."
बस में एक अतिरिक्त ड्राइवर भी मौजूद होगा. साथ ही एक बंदूकधारी सुरक्षाकर्मी भी तैनात किया गया है.
बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक़ ऑर्थिक गलियारे की वजह से बस को कई इलाकों में पुलिस की विशेष सुरक्षा भी मिलेगी.
मोहम्मद अनवर के मुताबिक़ सफर के दौरान किसी भी शख़्स को बस में सवार होने या उतरने की इजाज़त नहीं होगी. सिर्फ़ वही शख़्स इस बस पर सवार हो सकेगा जिसके पास चीन का वीज़ा और दूसरे ज़रूरी दस्तावेज़ होंगे. लाहौर से चलने वाली बस पर रावलपिंडी से भी मुसाफिर सवार हो पाएंगे.
उनका कहना था कि पाकिस्तान और चीन दोनों हुकूमतों ने बस सेवा को पूरी सुरक्षा देने का भरोसा दिलाया है.
मोहम्मद अनवर का कहना था कि चीन में कासगर का चुनाव इसलिए किया गया है क्योंकि वो एक बड़ा व्यापारी केंद्र है. कासगर में रेलवे और हवाई सफ़र समेत दूसरी सुविधाएं हैं और यहां पाकिस्तानी व्यापारी बड़ी तादाद में जाते हैं.
उनके मुताबिक़ पाकिस्तान से कासगर कोई हवाई जहाज़ नहीं जाता है.
उनका ये भी कहना था कि लोगों की तरफ़ से आने वाली प्रारंभिक प्रतिक्रियाएं संतोषजनक हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)