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इंडोनेशिया की सुनामी में अब तक 1200 मौतें
इंडोनेशिया के आपदा विभाग का कहना है कि देश में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी में 1200 से अधिक लोगों की मौत हुई है.
पहले यह आंकड़ा 844 बताया गया था. मंगलवार को जारी आंकड़े में बढ़ी हुई संख्या की पुष्टि की गई है.
शुक्रवार को सुलावेसी प्रांत 7.5 तीव्रता वाले भूकंप से हिल उठा था, जिसके बाद तटवर्ती क्षेत्र पालू में भयंकर सुनामी ने दस्तक दी थी.
राहत-बचाव टीम के प्रमुख अगस हारयोनो का कहना है कि इस आपदा के बाद आई तबाही में अब भी कुछ लोग फंसे हुए हैं. हारयोनो ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि पालु शहर के रोअ रोअ होटल में अब भी कुछ लोग फंसे हुए हैं.
उनका कहना है कि इस होटल में कम से कम 50 लोग फंसे हुए हैं. इस हादसे के कारण कम से कम 60 हज़ार लोग बेघर हुए हैं और इन्हें आपातकालीन मदद की ज़रूरत है.
इंडोनेशियाई रेड क्रॉस के अधिकारियों ने बीबीसी से कहा कि दलदल वाले इलाक़ों में सबसे भयावह स्थिति है. रेड क्रॉस के प्रवक्ता रिदवान सोबरी ने कहा कि इन इलाक़ों में लोगों से बात करने के बाद पता चलता है कि हालात कितने बदतर हैं.
भूकंप की भयावहता
भूकंप के बाद उसकी भयावहता धीरे-धीरे सामने आ रही है. लोग खाने-पीने के लिए तरस रहे हैं. पीने के पानी तक के लिए उन्हें जूझना पड़ रहा है.
इंडोनेशिया के रेड क्रॉस के अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि एक चर्च में 34 इंडोनेशियाई छात्रों के शव मिले हैं जिन्हें एक साथ दफ़नाया गया है.
अधिकारियों ने बताया कि 86 छात्रों के एक समूह के ग़ायब होने की बात कही जा रही थी जिसमें से 34 छात्रों के शव मिले हैं. 54 छात्र अब भी लापता बताए जा रहे हैं.
साल 2004 में इंडोनेशिया में आए भूकंप की वजह से पैदा हुई सुनामी ने हिंद महासागर के तटों पर भारी तबाही मचाई थी जिसमें सवा दो लाख से अधिक लोग मारे गए थे. इनमें क़रीब सवा लाख मौतें इंडोनेशिया में ही हुई थीं.
पालू में राहत और बचावकर्मियों को मदद पहुंचाने में काफ़ी दिक़्क़त हो रही है क्योंकि संपर्क के सारे रास्ते ध्वस्त हो गए हैं. सड़क, एयरपोर्ट और संचार के माध्यम पूरी तरह से बाधित हैं. भूकंप में अस्पताल भी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, इसलिए घायलों को भर्ती करने में भी दिक़्क़त हो रही है. लोगों का इलाज खुले में किया जा रहा है.
हज़ारों लोग पालू एयरपोर्ट पर सेवा बहाल होने का इंतज़ार कर रहे हैं. 44 साल के विविड एयरपोर्ट पर खाने-पीने के सामान बेचते हैं. उन्होंने रॉयटर्स से कहा, ''अब मैं कहीं भी जाने के लिए सोच रहा हूं. मैं दो दिनों से इंतज़ार कर रहा हूं. पूरी तरह से भूखा हूं. पीने के लिए पानी भी नहीं मिल रहा है.''
पालू के राहत कैंपों में लोग बारी-बारी से सो रहे हैं. कई लोग तो सड़क पर ही नींद पूरी कर रहे हैं. बच्चों की हालत तो सबसे बदतर है. कई ऐसे बच्चे हैं जिनके मां-बाप इस आपदा में मारे गए.
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