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सीरिया की हवाई सुरक्षा अपने हाथ में लेगा रूस?
- Author, जोनाथन मार्कस
- पदनाम, कूटनीतिक संवाददाता
रूस पिछले एक दशक से सीरिया को ज़मीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली एस-300 बेचने को लेकर बातचीत कर रहा है.
लेकिन अब तक एक भी मिसाइल सीरिया को मिल नहीं सकी है. इसकी एक वजह ये रही कि रूस सीरिया पर इसराइल के हवाई हमलों को लेकर काफी उदासीन रवैया अपनाता रहा है. लेकिन अब ऐसा लगता है कि रूस ने संकेत दे दिया है कि वो भविष्य में 'तटस्थ' नहीं रहेगा.
इसराइल के हवाई अभियानों को रूस के रणनीतिक हितों के ख़िलाफ़ देखा जा रहा है.
साल 2011 में ख़बर सामने आई थी कि मॉस्को सीरिया को एस-300 की चार सिस्टम बेचने की योजना बना रहा है. रूस के इस मिसाइल सिस्टम में छह लॉन्चर गाड़ियों के साथ निगरानी के लिए रडार और कमांड पोस्ट होती है.
ये ज़रूरी नहीं कि ये मिसाइल सीरिया की क्षमता में इज़ाफ़ा करें. सीरिया अभी भी अपने मौजूदा सिस्टम की मदद से एस-300 की क्षमता तक के हमले करने में सक्षम है.
लेकिन अगर सीरिया के पास एस-300 के अलावा और रडार वगैरह आ जाएं तो इससे देश की क्षमता में इज़ाफ़ा जरूर होगा.
क्या है रूस का इरादा?
एस-300 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी के साथ रूस सीरियाई एयर डिफेंस कमांड पोस्ट को एक ऑटोमेटेड सिस्टम से लैस करने की योजना बना रहा है.
रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू के शब्दों में कहें तो 'रूस सीरिया के एयर डिफेंस की सभी गतिविधियों और क्षमताओं के लिए एक सेंट्रलाइज़्ड कंट्रोल बनाना चाहता है.'
उन्होंने आगे कहा, ''सीरियाई हवाई रक्षा प्रणाली को रूस के सभी एयरक्राफ्ट की पहचान भी कराई जाएगी.''
दरअसल एक हफ्ते पहले लताकिया शहर में इसराइली हवाई हमले के जवाब में सीरिया ने भी हवाई हमले किए और इसमें रूस का इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस जुटाने वाला एयरक्राफ्ट क्षतिग्रस्त हो गया.
ऐसे में अब रूस ने तय किया है कि वह सीरियाई रक्षा विभाग को रूस के सभी एयरक्राफ्ट की पहचान सुनिश्चित कराएगा.
नियंत्रण पाने की कोशिश में रूस
रूस सीरिया के एयर डिफेंस पर ज़्यादा नियंत्रण हासिल करना चाहता है. लेकिन ये देखना होगा कि क्या वो सीरिया में इसराइल के ऑपरेशन रोकने में कामयाब हो पाएगा.
इसे समझने के लिए शोइगू का एक बयान अहम है. उन्होंने कहा है, ''सीरिया के करीब भूमध्य सागर में सैन्य विमान सीरिया क्षेत्र के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए सैटेलाइट नेविगेशन को ठप करने वाली रेडियो इलेक्ट्रानिक तकनीक, विमानों में लगी रडार और संचार प्रणाली का इस्तेमाल करेंगे.''
रूसी रक्षा मंत्री का ये बयान दर्शाता है कि सीरिया में रूस का कितना दखल है.
सीरियाई रक्षा मंत्रालय ने रूसी एयरक्राफ्ट II-20 के क्षतिग्रस्त होने का सारा दोष इसराइल पर मढ़ दिया है. वहीं दूसरी ओर इसराइल का कहना है कि जब रूसी विमान को टारगेट किया गया उस वक़्त तक इसराइल के विमान वापस लिए जा चुके थे.
इस बात पर अपना पक्ष रखने के लिए इसराइल ने अपने एक सैन्य प्रतिनिधिमंडल को रूस भी भेजा था.
मामला ठंडा करने की कोशिश
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसराइली प्रधानमंत्री बेंन्यामिन नेतन्याहू के बीच के मैत्रीपूर्ण रिश्तों के कारण इस मामले को शांत करने की कोशिश में हैं.
रूस के रक्षा मंत्रालय ने बीते हफ़्ते के आखिर में एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया है कि इसराइल के पायलट ग़ैर-पेशेवर तरीके या फिर 'आपराधिक लापरवाही' के साथ काम कर रहे हैं.
सोमवार को रूस ने ऐलान किया कि वो सीरिया को एस-300 एयरक्राफ्ट बेचेगा.
इस परिस्थिति मे कुछ सवाल अहम हो जाते हैं. जैसे वास्तव में रूस की भूमिका क्या होगी. और एस-300 सीरिया के एयर डिफेंस ढांचे को कितना बेहतर बनाएगा?
लताकिया शहर के पास स्थित रूस के एयरबेस में काफी उच्च क्षमता वाले 'ज़मीन से हवा में' वार करने वाले मिसाइल सिस्टम और रडार हैं. जिसे वो सीरियाई एयरस्पेस की सुरक्षा के लिए कभी भी इस्तेमाल कर सकता है.
लेकिन अब तक रूस ने इसराइल को ज़ाहिर तौर पर ऐसा कोई भी संदेश देने की कोशिश नहीं की है.
बदलती परिस्थिति
रूसी सेना अपने एयक्राफ्ट के क्षतिग्रस्त होने से काफ़ी नाराज़ है. इस विमान में 15 लोग सवार थे और रूस इस मामले में प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर हो गया.
ऐसा लग रहा है कि रूस के हवाई ठिकाने के करीब हमला करके इसराइल की वायुसेना ने रूस की ओर से खींची गई लक्ष्मण रेखा पार कर दी है.
इसराइल का कहना है कि हिज़्बुल्लाह को भेजने वाले हथियारों और सीरिया में ईरान के बढ़ते प्रभाव पर रोक लगाना उसके रणनीतिक लक्ष्य हैं.
लेकिन रूस अब ये संकेत देता दिख रहा कि वो सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को कमज़ोर कर सकने वाले इस तरह के अभियानों को नज़रअंदाज़ करने के मूड में नहीं है.
अगर वास्तव में रूस का यही इरादा है तो इसराइल को अपनी कार्रवाईयों को लेकर सतर्क रहना होगा.
आने वाले हफ़्तों और महीनों में तनाव बढ़ाने वाले कई लम्हे आ सकते हैं.
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