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परमाणु निरस्त्रीकरण की ओर किम जोंग उन ने बढ़ाया एक और क़दम
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन ने कहा है कि उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन प्रमुख न्यूक्लियर टेस्टिंग साइट और लॉन्च साइट को बंद करने के लिए तैयार हो गए हैं.
मून ने कहा है कि प्योंगयांग में हुई बैठक के बाद दोनों नेता "परमाणु निरस्त्रीकरण करने के एक तरीके पर सहमत" हुए हैं.
वहीं, किम जोंग उन ने इस मीटिंग में मून जे इन के साथ बनी आपसी सहमति को कोरियाई प्रायद्वीप में शांति कायम होने की दिशा में एक बड़ा क़दम बताया है.
किम ने ये भी कहा है कि वह आशा करते हैं कि "आने वाले दिनों में वह सियोल की यात्रा करेंगे."
अगर ऐसा होता है तो किम जोंग उन सियोल की यात्रा करने वाले पहले उत्तर कोरियाई शासक होंगे.
प्योंगयोंग मीटिंग से क्या हल निकलेगा?
मून जे इन और किम जोंग उन के बीच हुई इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण था.
उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन इस मुद्दे को लेकर कुछ समय पहले अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से भी मिल चुके हैं.
इस मुलाकात में भी किम परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए तैयार हुए थे.
लेकिन प्योंगयांग में हुई ये मुलाकात बताती है कि उत्तर कोरिया इसके प्रति कितना समर्पित है.
मून जे इन ने कहा है कि किम जोंग उन "टोंगचांग-री मिसाइल इंजन परीक्षण साइट और मिसाइल लॉन्च फ़ैसिलिटी को स्थायी रूप से बंद करने के लिए सहमत हुए हैं" और, महत्वपूर्ण बात यह है कि ये काम "मुख्य देशों के विशेषज्ञों की मौजूदगी में" किया जाएगा.
उत्तर कोरिया की ओर से बड़ा क़दम
बीबीसी संवाददाता लौरा बिकर कहती हैं कि टोंगचांग-री साइट को ख़त्म करने की प्रक्रिया को स्वतंत्र निरीक्षकों को दिखाना अपने आप में एक बड़ा क़दम है.
बिकर कहती हैं, सेटेलाइट से मिली तस्वीरें बताती हैं कि टोंगचांग-री साइट नष्ट होने की प्रक्रिया में थी. लेकिन अगर इसकी घोषणा हो जाए तो स्वतंत्र निरीक्षक जाकर इसके नष्ट होने की प्रक्रिया की पुष्टि कर सकते हैं.
- मॉनिटरिंग ग्रुप 38 नॉर्थ के मुताबिक़, साल 2012 से टोंगचांग-री उत्तर कोरिया की प्रमुख सेटेलाइट लॉन्च फ़ैसिलिटी रही है.
- इस लॉन्च साइट पर ही उन इंजनों की टेस्टिंग की गई थी जो अमरीका तक मार करने वाली मिसाइलों में प्रयोग होने थे.
मून जे इन ने ये भी कहा है कि किम जोंग उन 'योंगब्योन न्यूक्लियर' फ़ैसिलिटी को बंद करने के लिए भी तैयार हो गए हैं. ऐसा माना जाता है कि इस साइट पर ही परमाणु परीक्षण के लिए ज़रूरी सामग्री को बनाया जाता था. लेकिन इसकी शर्त ये है अमरीका भी इसके बदले में कुछ करे.
हालांकि, इस बारे में ये जानकारी उपलब्ध नहीं है कि उत्तर कोरिया इस साइट को बंद करने के बदले में अमरीका से क्या चाहता है.
उत्तर कोरिया ने बीते जून में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से किम जोंग उन की मुलाकात से पहले ही अपनी एक प्रमुख न्यूक्लियर साइट पुंगे-री को नष्ट कर दिया था.
द डिप्लोमैट मैगज़ीन के संपादक अंकित पांडा बताते हैं, "ये मीटिंग मून जे इन के लिए सफल रही है क्योंकि वह किम जोंग उन से निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर अहम और सकारात्मक बयान निकलवाने में सफल हुए."
"किम कुछ शर्तों के लिए तैयार हो भी जाएं तो ये उनके लिए ज़्यादा अहमियत नहीं रखते हैं क्योंकि ये चीज़ें उत्तर कोरिया को कुछ दिनों के लिए हथियार विहिन नहीं कर देंगी. लेकिन उत्तर कोरिया को वो आधार ज़रूर दे सकता है जिसकी बदौलत अमरीका और उत्तर कोरिया के बीत बातचीत आगे बढ़ सकती है."
शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के रिश्ते
शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों में कई मुद्दों को लेकर सहमति बनी है.
इनमें दोनों देशों की रेलवे लाइनों को जोड़ा जाना, युद्ध के चलते अलग हुए परिवारों को मिलवाना और स्वास्थ्य सेवाओं में एक दूसरे की मदद करना शामिल है.
मून जे इन ने उत्तर कोरियाई शासक को सियोल आमंत्रित किया है.
इसके साथ ही दोनों देश 2032 का समर ओलंपिक भी एक साथ आयोजित करने की कोशिश करेंगे.
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री और उत्तर कोरियाई सेना के प्रमुख सैन्य तनाव कम करने, ग़लतियों की वजह से झड़पों को रोकने के लिए बफ़र ज़ोन बनाने पर सहमत हुए हैं.
इन मुद्दों पर मून जे इन की तीन दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन हस्ताक्षर किए गए.
हालांकि, बीते दस सालों में किसी दक्षिण कोरियाई शासक की पहली उत्तर कोरिया यात्रा है. लेकिन मून जे इन उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन से तीन बार मिल चुके हैं.
अमरीका के लिए इसका क्या मतलब है?
निरस्त्रीकरण को लेकर उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच बातचीत हाल ही में बंद हो गई थी.
लेकिन मून जे इन की इस यात्रा ने उम्मीदों को बढ़ा दिया है. इससे एक मध्यस्थ के रूप में दक्षिण कोरिया का कद भी मजबूत हुआ है.
ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इस शिखर सम्मलेन की तारीफ़ की है.
अधिकांश पर्यवेक्षक कहते हैं कि अब तक उत्तर कोरिया ने अपने विवादास्पद परमाणु हथियार कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए कोई सार्थक क़दम नहीं उठाया है और इस हफ्ते के शिखर सम्मेलन में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है जो उन्हें संतुष्ट कर सके.
पांडा कहते है, "उदाहरण के लिए, योंगब्योन साइट को बंद तब किया जाएगा जब अमरीका भी ऐसा ही कुछ करे और यही बात जटिलताओं को जन्म देती है. ऐसे में अमरीकी प्रशासन को कुछ न कुछ करना होगा और ये स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन ऐसा कर सकता है."
ट्रंप ने हाल ही में उत्तर कोरिया की ओर से एक नया निमंत्रण मिलने के बाद कहा था कि वह और किम सबको ग़लत साबित करेंगे.
दोनों पक्ष कहते हैं कि वे मिलकर इस बैठक को मूर्तरूप देने पर काम कर रहे हैं.
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