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अब उत्तर कोरिया क्यों गए दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति
उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन ने उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में मुलाक़ात की है.
मून जे इन पत्नी किम जंग सूक के साथ तीन दिवसीय यात्रा के लिए मंगलवार की सुबह प्योंगयांग पहुंचे, जहां किंम जोंग उन ने पत्नी री सोई-जु के साथ उनका स्वागत किया.
इस साल उत्तर कोरिया ने अमरीका और दक्षिण कोरिया दोनों ही देशों से बात की थी, लेकिन ये बातचीत कुछ ख़ास सार्थक होती नज़र नहीं आई.
अब इस वार्ता के ज़रिए दक्षिण कोरिया अमरीका-उत्तर कोरिया के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है.
पिछले एक दशक में ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोई दक्षिण कोरियाई नेता उत्तर कोरिया के दौरे पर है.
क्या होगा एजेंडा?
इस दौरे में दोनों देशों के नेताओं के बीच ख़ास मुद्दा ये होगा कि किन व्यावहारिक कदमों को उठाकर कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु ख़तरे को कम किया जा सकता है. लेकिन ये क़दम क्या होंगे और इसकी बारीकियां क्या होंगी इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है.
दक्षिण कोरिया के लिए दो ख़ास मुद्दे हो सकते हैं.
- अंतर-कोरियाई सहयोग को बढ़ाना और दोनों देशों के रिश्तों को मज़बूत बनाना.
- परमाणु-निशस्त्रीकरण के मुद्दे पर प्योंगयांग और वॉशिंगटन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाना.
बीबीसी सिओल संवाददाता लौरा बिकर के मुताबिक़, ''इस साल अप्रैल में दोनों कोरियाई नेताओं ने पहली बार मुलाक़ात की थी. इन नेताओं की मुलाक़ात ख़ुद में एक बेहद बड़ा क़दम था. अब राष्ट्रपति मून का मक़सद इस यात्रा में उत्तर कोरिया से परमाणु निशस्त्रीकरण के मुद्दे पर बाचतीच को आगे बढ़ाना होगा.''
उन्होंने आगे कहा, ''अगर ऐसा नहीं होता है तो अंतर-कोरियाई समिट और सिंगापुर में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और किम जोंग-उन की मुलाक़ात एक चमकदार फ़ोटो इवेंट बनकर रह जाएगी. संभव है कि अमरीकी नेता भी उत्तर कोरिया को लेकर अपना संयम खोने लगें.''
अप्रैल में हुई इन कोरियाई नेताओं की मुलाक़ात के बाद कई ऐसे परिवारों को मिलाया गया जो देशों की सीमाओं के कारण बंट गए थे.
सुधरेंगे अमरीका-उत्तर कोरिया के रिश्ते?
उत्तर कोरिया कई तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को झेल रहा है. दक्षिण और उत्तर कोरिया के बीच किसी भी नए आर्थिक सहयोग के लिए ये ज़रूरी है कि उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंधों में ढिलाई की जाए. ये प्रतिबंध तभी कम हो सकेंगे जब अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच हुई वार्ता को गति मिले.
इस साल जून में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन के बीच ऐतिहासिक मुलाक़ात हुई थी. इस मुलाक़ात में उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियार नष्ट करने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई थी.
इसके बाद उत्तर कोरिया की ओर से इसे लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई कि आख़िर इसकी प्रक्रिया क्या होगी और इसमें कितना वक़्त लगेगा. इस मामले पर नज़र रखने वालों का मानना है कि अब तक उत्तर कोरिया की ओर से कोई क़दम नहीं उठाया गया है.
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