पहली बार किंग सलमान ने दिया क्राउन प्रिंस को झटका?

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान

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पहली बार 32 साल के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान को अपने ही पिता किंग सलमान से झटका लगने की बात कही जा रही है.

सऊदी की तेल कंपनी अरामको की पब्लिक लिस्टिंग में जाने से रोकने के फ़ैसले को किसी हैरानी से ज़्यादा तगड़ा झटके के तौर पर देखा जा रहा है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार इस फ़ैसले में किंग सलमान का हाथ है, जिसे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान के फ़ैसले को पलटने के तौर पर देखा जा रहा है.

रियाद में इसे लेकर आम सहमति नहीं थी. अरामको तेल कंपनी के पांच फ़ीसदी शेयर को बेचने की योजना थी. इसे अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ कहा जा रहा था.

अरामको का आईपीओ मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 के उस प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसके तहत वो सऊदी को तेल पर निर्भरता वाली अर्थव्यवस्था से बाहर निकालना चाहते हैं.

अमरीका-सऊदी अरब

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इमेज कैप्शन, अमरीका राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के किंग सलमान

रुका अरामको का आईपीओ

क्राउन प्रिंस चाहते हैं कि सऊदी निजी निवेश आधारित अर्थव्यवस्था बने. कहा जा रहा है कि अरमाको का आईपीओ नहीं आना क्राउन प्रिंस की प्रतिष्ठा पर गहरी चोट है.

दुनिया भर के मीडिया में ये बात कही जा रही है कि सलमान का यह फ़ैसला थोपने जैसा था. इस कंपनी के आईपीओ के साथ कई दिक़्क़तें जुड़ी हुई हैं.

पब्लिक लिस्टिंग के लिए निगरानी और कई चीज़ें सार्वजनिक करने की ज़रूरत पड़ेगी. इसके साथ ही 9/11 के आतंकवादी हमले में सऊदी से फंडिंग के आरोप का मामला भी आईपीओ को लेकर तूल पकड़ सकता है.

सऊदी अरामको शाही परिवार के लिए एक तेल कंपनी से ज़्यादा मायने रखती रही है. इस कंपनी की भूमिका शिक्षा, स्वास्थ्य और कंस्ट्रक्शन में बढ़-चढ़कर रही है. अरामको को पूरी दुनिया सऊदी अरब की बहुमूल्य ऊर्जा कंपनी के रूप में जानती है.

सऊदी अरब

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ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्राउन प्रिंस इस कंपनी के साथ इस क़दर उपेक्षा भाव क्यों दिखाना चाहते थे?

फ़ाइनैंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार सऊदी के कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है कि क्राउन प्रिंस शाही परिवार की पंरपराओं को तोड़कर सुधार कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहे हैं. ऐसे में सऊदी को फिर से अरामको जैसी क्षमता वाली कंपनी खड़ी करनी होगी.

सऊदी किंग अभी 82 साल के हैं और क्राउन प्रिंस सत्ता को अपने नियंत्रण में ले रहे हैं.

क्राउन प्रिंस पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड के ज़रिए फंड जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. कई रिपोर्ट्स में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 पर भी सवाल उठ रहे हैं.

फ़ाइनैंशल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी को बजट संतुलन के लिए इस बात की ज़रूरत है कि कच्चे तेल की क़ीमत प्रति बैरल 70 डॉलर हो. क्राउन प्रिंस देश के उत्तरी हिस्से में 500 अरब डॉलर की एक नई सिटी बनाना चाहते हैं.

किंग अब्दुल्लाह

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उठापटक

अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार 32 साल के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान किसी भी सूरत में अरामको का आईपीओ जारी करना चाहते थे. इसे लेकर देश के भीतर और विदेशों में भी ख़ूब उठापटक थी.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से सरकार के सूत्रों ने बताया है कि क्राउन प्रिंस के पिता किंग सलमान इस मामले में बिल्कुल झुकना नहीं चाहते थे.

अल-जज़ीरा का कहना है कि किंग सलमान अरामको पर अपने बेटे के इरादों को अधिकारों में दख़ल के तौर पर देख रहे थे.

यह भी कहा जा रहा है कि अगर आईपीओ जारी किया जाता तो अरामको का पूरा वित्तीय डिटेल सार्वजनिक करना पड़ता. जून में ही किंग ने आईपीओ जारी नहीं करने का आदेश दे दिया था.

सऊदी अरब

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जब रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया कि आईपीओ नहीं आएगा तो सऊदी के ऊर्जा मंत्री ख़ालिद अल-फ़लीह ने कहा कि सरकार भविष्य में आईपीओ लाने के लिए संकल्पित है. सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस आर्थिक सुधारों को अंजाम देने में लगे हैं.

क्राउन प्रिंस को लगता है कि आईपीओ जारी करने से अर्थव्यवस्था में खुलापन आएगा. सूत्रों का कहना है कि किंग का फ़ैसला क्राउन प्रिंस के विजन 2030 के लिए झटके की तरह है.

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