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पाकिस्तान चुनाव: नतीजों में देरी, साज़िश का आरोप
पाकिस्तान में संसदीय चुनाव के लिए बुधवार शाम छह बजे मतदान ख़त्म होने के बाद मतों की गिनती का काम जारी है, लेकिन आधी रात बीतने के बाद भी एक भी आधिकारिक नतीजे की घोषणा नहीं करने की वजह से चुनाव आयोग को आलोचना का सामना करना पड़ा है.
साज़िश और धांधली के आरोपों के बीच पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने गुरुवार तड़के लगभग 4.30 बजे पहले आधिकारिक नतीजे की घोषणा की जो रावलपिंडी से पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ पार्टी के उम्मीदवार चौधरी मोहम्मद अदनान के हक़ में गया है.
मुख्य चुनाव अधिकारी सरदार रज़ा ख़ान ने आलोचनाओं को ख़ारिज कर दिया और देरी के लिए तकनीकी, सुरक्षा और मौसम संबंधी वजहों को जिम्मेदार बताया है.
रुझानों के मुताबिक इमरान ख़ान की पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ पार्टी ने बढ़त बना ली है और दूसरे नंबर पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ पार्टी बताई जा रही है. पार्टी नेता शहबाज़ शरीफ़ ने रुझानों की शक्ल में आ रहे नतीजों को मानने से इंकार कर दिया है.
मुख्य चुनाव अधिकारी सरदार रज़ा ख़ान से संवाददाताओं ने जब मीडिया में आ रहे रुझाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, ''नतीजे वो होंगे जो हम घोषित करेंगे. हो सकता है नतीजे वैसे ही हों.''
साज़िश का आरोप
पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ ने चुनाव में साज़िश का आरोप लगाया है जिसे चुनाव आयोग के एक आला अधिकारी बाबर याक़ूब ने ख़ारिज कर दिया है.
बाबर याक़ूब का कहना है, ''रिजल्ट्स ट्रांसमिशन सिस्टम (आरटीएस) में तकनीकी ख़ामी की वजह से देरी हो रही है. जब हज़ारों चुनाव अधिकारियों ने एक साथ इसका इस्तेमाल करना शुरू किया तो उसने काम करना बंद कर दिया.''
दूसरी ओर पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ के नेता शहबाज़ शरीफ़ ने मतदान के बाद मतों की गिनती के दौरान पार्टी के एजेंट्स को दिए जाने वाले एक ख़ास फॉर्म को लेकर क़ोताही बरतने का आरोप लगाया है. कई अन्य पार्टियों ने भी इसी तरह की शिक़ायत की है.
शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि वो अन्य पार्टियों के साथ मिलकर इस मुद्दे को आगे भी उठाएंगे.
रुझानों से उत्साहित पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूरे देश में जश्न मनाना शुरू कर दिया है.
पाकिस्तान में संसद की 272 सीटों के लिए चुनाव हुए हैं, जबकि 70 सीटें महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं, इन्हें पांच फ़ीसदी से अधिक वोट पाने वाली पार्टियों में बांटा जाता है.
पाकिस्तान में 2013 में हुए चुनावों में नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने जीत तो हासिल की थी लेकिन स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी.
इस बार जानकार कह रहे हैं कि उनकी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ एक मज़बूत विपक्ष की भूमिका में नज़र आ सकती है.
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