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जिन्होंने खोजे थाईलैंड की गुफा में गुम हुए बच्चे
'आप कितने लोग हैं?'
ये वो शब्द हैं जो थाईलैंड की गुफा में फंसे 12 बच्चों और उनके एक कोच ने 9 दिन बीत जाने के बाद सबसे पहले सुने. गुफा के बाहर से यह सवाल एक ब्रिटिश नागरिक जॉन वोलेंनथन ने पूछा था.
इसके जवाब में गुफा के अंदर से आवाज़ आई...'थर्टिन'
इस जवाब के साथ ही यह बात पक्की हो गई कि गुफा में फंसे सभी बच्चों और उनके कोच को खोज लिया गया है और वे सभी जीवित हैं.
9 दिन से थाईलैंड की चियंग राय स्थित टैम लूंग गुफा में फंसे बच्चों को खोजने के लिए थाईलैंड सरकार ने ब्रिटेन के तीन 'केव एक्सपर्ट' वोलेनथन, रिचर्ड स्टेनटोन और रॉबर्ट चार्ल्स हार्पर को मदद के लिए बुलाया था.
इन बच्चों के गुफा में गुम हो जाने के तीन दिन बाद ये तीनों लोग थाईलैंड पहुंच चुके थे. इससे पहले इस खोजी अभियान में हज़ारों लोग लगे हुए थे.
कौन हैं तीनों बचावकर्मी?
ये तीनों बचावकर्मी ब्रिटिश केव रेस्क्यू काउंसिल (बीसीआरसी) के सदस्य हैं. यह समिति ब्रिटेन के द्वीपों में बचावकार्य करती है. बीसीआरसी के अनुसार इन बचावकर्मियों ने इससे पहले भी कई गुफाओं की खोज की है.
अपने एक बयान में बीसीआरसी ने बताया, ''ब्रिटेन के समयानुसार दोपहर 4.30 बजे हमें ख़बर मिली कि सभी 12 बच्चे और उनका कोच गुफा के भीतर किसी सूखी हुई जगह पर हैं, जहां उन्हें सांस लेने के लिए हवा मिल रही है.''
''थोड़ी ही देर बाद हमें अपने बचावकर्मियों से एक छोटा-सा संदेश मिला कि सभी बच्चों और उनके कोच को खोज लिया गया है और वे सभी जीवित हैं.''
इस खोजी अभियान में शामिल दो ब्रिटिश नागरिक वोलेनथन और स्टेनटोन इससे पहले साल 2010 में फ़्रांस की एक गुफा में फंसे गोताखोर को बचाने में भी कामयाब रहे थे. उस समय ये दोनों साउथ एंड मिड वेल्स केव रेस्क्यू टीम के सदस्य थे.
साल 2010 के उस बचाव अभियान से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार स्टेनटोन एक दमकल कर्मी हैं और वे कोवेंट्री इलाके के रहने वाले हैं. उन्होंने साल 2004 में मेक्सिको में फंसे 13 ब्रिटिश नागरिकों को भी बचाया था.
साहसिक कार्यों के लिए हुए सम्मानित
स्टेनटोन को उनके साहसिक कार्यों के लिए साल 2012 में प्रसिद्ध एमबीई (मेंबर ऑफ ब्रिटिश इम्पायर) सम्मान से सम्मानित भी किया जा चुका है.
साल 2007 में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब वे छोटे थे तब उन्होंने एक कार्यक्रम 'अंडरग्राउंड ईगर' देखा था, जिससे प्रेरित होकर वे गोताखोरी की तरफ आकर्षित हो गए थे. बाद में वे यूनिवर्सिटी में केविंग और डाइविंग क्लब में शामिल हो गए.
दूसरे ब्रिटिश बचावकर्मी वोलेनथन की बात करें तो एक ऑनलाइन प्रोफाइल के मुताबिक वे कई मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं.
वोलेनथेन मज़ाक में कहते हैं कि वे सिर्फ़ इसलिए भागते हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा बिस्कुट खा सकें.
हालांकि वोलेनथेन ब्रिस्टल में एक आईटी सलाहकार थे और उन्होंने गुफाओं में जाने का काम एक स्काउट के तौर पर शुरू किया था.
संडे टाइम्स को साल 2013 में दिए एक इंटरव्यू में वे कहते हैं कि गुफाओं में बचावकार्य करने के लिए ठंडे दिमाग का होना बेहद ज़रूरी है.
वे कहते हैं, ''कई मौकों पर हमें जल्दी दिखानी होती है, लेकिन केव-डाइविंग में यह काम नहीं आती.''
गुफा में किसी को तलाश करने के काम को वोलेनथेन एक अनसुलझी पहेली को हल करने जैसा मानते हैं''
साल 2012 में वोलेनथेन और स्टेनटोन को फ़्रांस में उनके बेहतरीन बचावकार्य के लिए रॉयल से सम्मानित किया गया था.
थाईलैंड की नेवी सील के ज़रिए साझा किए गए वीडियो में इन दोनों ब्रिटिश नागरिकों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि 'अभी और लोग भी आ रहे हैं'.
खोजी अभियान में लगा एक समूह कह रहा है कि ''हम बहुत खुश हैं', इसके जवाब में ब्रिटिश नागरिक कहते हैं ''हम भी खुश हैं.''
इसी वीडियो में कोई आदमी इन लोगों से पूछ रहा है कि आप लोग कहां से आए हैं,
इसका जवाब मिलता है, ''इंग्लैंड, यूके''
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