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श्रीलंका बौद्धों-मुस्लिमों में तनाव ख़त्म, हटा आपातकाल
श्रीलंका में मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसा के बाद छह मार्च को घोषित किए गए आपातकाल को हटा लिया गया है.
कैंडी में हुई हिंसा में दो लोग मारे गए थे जबकि मुस्लिमों के तकरीबन 450 घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया था. इस दौरान 60 वाहनों को जलाया भी गया था.
तनाव को कम करने के लिए सोशल मीडिया पर बैन और कर्फ़्यू लगाया गया था.
बौद्ध बहुसंख्यक आबादी वाले देश में हिंसा की शुरुआत 2012 से हुई थी. कहा जाता है कि इसे कट्टर बौद्ध समूहों ने हवा दी थी.
उनका आरोप है कि मुस्लिम ज़बरदस्ती लोगों का इस्लाम में धर्मांतरण करा रहे हैं और बौद्ध पुरातात्विक स्थलों को तबाह कर रहे हैं. दर्जनों मुस्लिम धार्मिक स्थलों को भी नुकसान पहुंचाया गया है.
सैकड़ों लोग गिरफ़्तार
पुलिस अब तक तकरीबन 300 लोगों को गिरफ़्तार कर चुकी है जिसमें हिंसा भड़काने के संदिग्ध एक कट्टर बौद्ध संगठन के नेता भी शामिल हैं.
आपातकाल के दौरान श्रीलंका प्रशासन किसी संदिग्ध को लंबे समय तक गिरफ़्तार करने और हिरासत में रखने में समर्थ था.
हज़ारों सैनिकों को कैंडी क्षेत्र में लगाया गया था. कई समूहों ने कैंडी में कर्फ़्यू के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था जिसके ख़िलाफ़ आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे.
राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरीसेना ने ट्वीट कर आपातकाल हटाने की घोषणा की थी. उन्होंने ट्वीट किया कि लोगों की सुरक्षा का आकलन करने के बाद उन्होंने बीती आधी रात से आपातकाल हटाने का निर्देश दिया है.
फ़ेसबुक समेत विभिन्न सोशल मीडिया वेबसाइट पर लगा प्रतिबंध भी इस हफ़्ते हटा लिया गया था.
सात सालों में ऐसा पहली बार हुआ था जब श्रीलंका ने आपातकाल की घोषणा की थी.
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