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जेब में अपनी गाय की तस्वीर रखते हैं दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति रामापूसा
दक्षिण अफ़्रीका के सबसे अमीर लोगों में शुमार उद्योगपति और राजनेता सीरिल रामापूसा अब देश के नए राष्ट्रपति हैं.
वो महंगी कारों और विंटेज शराब के शौक़ीन हैं. बेहतरीन नस्ल की गायें पालने के दीवाने हैं. मछलियां पकड़ने का शौक़ रखते हैं.
बीते साल दिसंबर में जब उन्हें सत्ताधारी अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया था तब ही ये तय हो गया था कि वो जल्द ही दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति बनने के अपने पुराने सपने को पूरा कर लेंगे.
किसी ज़माने में प्रमुख ट्रेड यूनियन नेता रहे सीरिल रामापूसा आज अफ़ीका में काले उद्योगपतियों के झंडाबरदार हैं.
लेकिन व्यापार उनका पहला प्यार नहीं था. वो हमेशा से राजनीति को ही प्यार करते थे और कभी नेल्सन मंडेला का डिप्टी बनने का ख़्वाब पालते थे.
लेकिन जब मंडेला ने सीरिल रामापूसा को अपना डिप्टी बनाने के बजाए थाबो मबेकी को अपना उपराष्ट्रपति चुना तो सीरिल रामापूसा का राजनीति से ऐसा दिल टूटा कि वो व्यापार में चले गए.
सीरिल इतने नाराज़ थे कि उन्होंने मंडेला के शपथग्रहण में भी हिस्सा नहीं लिया और सरकार में भी कोई पद स्वीकार नहीं किया.
पेशे से अधिवक्ता सीरिल रामापूसा दक्षिण अफ़्रीका की संविधान सभा के चैयरमैन भी थे और उन्होंने रंगभेद के बाद के दक्षिण अफ़्रीका के संविधान के निर्माण में अहम भूमिका निभाई.
दक्षिण अफ़्रीका का संविधान दुनिया का सबसे उदारवादी संविधान माना जाता है.
65 वर्षीय रामापूसा दक्षिण अफ़्रीका के प्रभावशाली लोगों में रहे हैं. लेकिन उनके निजी जीवन के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं है.
उनकी बायोग्राफ़ी लिखने वाले एंटी बटलर ने एक बार उन्हें गिरगिट कहा था. बटलर कहते हैं, "उनमें अपने आप को दूसरे लोगों के सामने अपनी मर्ज़ी के हिसाब से पेश करने की क्षमता है."
1952 में जोहानसबर्ग के पास सोवेटो इलाक़े में पुलिस सर्जेंट के घर पैदा हुए सीरिल रामापूसा का झुकाव धार्मिक शिक्षा की ओर भी रहा.
बटलर बताते हैं, "हाई स्कूली शिक्षा के दौरान उनके हाथ में बाइबिल रहती और वो सामुदायिक सेवा भी किया करते."
क़ानून की पढ़ाई के दौरान सीरिल रामापूसा रंगभेद के ख़िलाफ़ आंदोलन से जुड़ गए. 1974 में उन्हें गिरफ़्तार करके काल कोठरी में रखा गया.
इसके दो साल बाद उनके गृहक्षेत्र सोवेटो में छात्र रंगभेद के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे. पुलिस ने स्कूली यूनिफॉर्म पहने छात्रों पर कार्रवाइयां की. सैकड़ों छात्र मारे गए.
रामापूसा को एक बार फिर जेल भेज दिया गया. एंटनी बटलर कहते हैं, "बिना सुनवाई के दो बार जेल भेजे जाने के उनके अनुभव दुखद थे. जब वो जेल से बाहर आए तो बिलकुल अकेले थे. नौकरी की कोई संभावना नहीं थी और तब तक उनके दोस्त उनसे दूर हो गए थे."
इसके बाद वो खनन कर्मियों की यूनियन से जुड़ गए और अगले एक दशक में उन्होंने देश की सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन का गठन कर दिया जिसमें तीन लाख सदस्य थे और जो अपने अधिकारियों के लिए बड़े प्रदर्शन करने में सक्षम थी.
1986 में दक्षिण अफ़्रीका में देशव्यापी आपातकाल लगा दिया गया. पुलिस राजनीतिक कार्यकर्ताओं के घरों पर छापे मार रही थी. सीरिल रामापोसा के घर पर भी छापे मारे जा रहे थे.
1990 आते आते अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस में रामापूसा का क़द काफ़ी बढ़ चुका था और वो नेल्सन मंडेला की रिलाई के प्रयास कर रही पार्टी की रिसेप्शन समिति के अध्यक्ष बन गए.
दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद का किला टूट रहा था और 1990 में नेल्सन मंडेला को जेल से रिहा कर दिया गया. रिहाई के बाद मंडेला जब अपना ऐतिहासिक भाषण दे रहे थे तब रामापूसा उनके बगल में माइक थामे खड़े थे.
रामापोसा को 1991 में पार्टी का महासचिव नियुक्त कर दिया गया. लेकिन 1994 में नेल्सन मंडेला जब राष्ट्रपति बने और उन्होंने रामापोसा की जगह थाबो मबेकी को अपना उपराष्ट्रपति चुना तो सब चौंक गए.
मंडेला स्वयं तो रामापोसा को अपना डिप्टी बनाना चाहते थे लेकिन पार्टी के बाकी वरिष्ठ नेता इसके पक्ष में नहीं थे.
राजनीतिक जीवन में मिले झटके के बाद रामापोसा ने अपने आप को फिर से परिभाषित किया और वो उद्योग की दुनिया में चले गए.
कहा जाता है कि नेल्सन मंडेला ने उद्योग जगत में पैर जमाने में रामापूसा की ख़ूब मदद की और उन्हें एक उद्योगपति से बड़ा लोन भी दिलवाया.
2015 में वो 45 करोड़ डॉलर की संपत्ति के साथ दक्षिण अफ़्रीका के सबसे अमीर उद्योगपति थे.
वो जैज़ संगीत पसंद करते हैं, पुरानी शराब के शोक़ीन है और दुर्लभ प्रजाति के पशुओं के दीवाने हैं. उनकी सबसे पसंदीदा गायें हैं जिनकी तस्वीर वो अपनी जेब में रखते हैं. और समय-समय पर उन्हें लोगों को दिखाते भी रहते हैं.
उनकी सभी गायों के अपने नाम भी है. अपनी यूगांडा यात्रा के दौरान उन्हें वहां की गायें इतनी पसंद आईं कि वो उन्हें देश लाना चाहते थे लेकिन जब बॉर्डर कंट्रोल के नियम आड़े आए तो उन्होंने ऐसी जुगत भिड़ाई की यूगांडा की गायें दक्षिण अफ़्रीका में उनके फार्म का हिस्सा बन गईं. उन्होंने अपने फार्म पर गायों के प्रजनन को बढ़ावा दिया और अब वो उच्च नस्ल की गायों को राजनेताओं को तोहफ़े में भी देते हैं.
रामापोसा की पहली शादी के बारे में बहुत ज़्यादा जानकारी नहीं हैं. लेकिन उनकी दूसरी शादी एक खनन उद्योगपति की डॉक्टर बहन से हुई है जिनसे उन्हें चार बच्चे हैं.