नज़रिया: अमरीका और पाकिस्तान ने इस यारी से कुछ नहीं कमाया

    • Author, मोहम्मद हनीफ़
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक, इस्लामाबाद से

नया साल मुबारक!

बाकी दुनिया की तरह पाकिस्तान में भी लोग नया साल अपनी-अपनी औकात के अनुसार मनाते हैं.

बंदूकों के शौक़ीन आसमान की तरफ गोलियां चलाते हैं. शराब पीने वाले महंगी-सस्ती पी कर अगले साल ना पीने के वायदे करते हैं.

अल्लाह वाले इन सभी को बददुआएं देते हैं. लगता है कि अमरीका के सदर डोनल्ड ट्रंप ने नया साल ट्विटर पर ही मनाया.

पाकिस्तानी तो अभी रात के हैंगओवर से ही निकल रहे थे कि ट्रम्प ने ट्वीट किया कि अमरीका ने मूर्खतापूर्ण ढंग से पाकिस्तान को अरबों डॉलर दिए हैं पर पाकिस्तान ने बदले में धोखे के अलावा कुछ नहीं दिया.

मुझे फ़िल्म हीर-रांझा का वह दृश्य याद आ गया जिसमें सैद्दा शादी करके हीर को घर लाता है और अपनी सुहागरात को हीर से मार खाता है.

वह कहता है कि हमने आप को बारह तोले सोना डाल दिया है और आपने हमें आते ही मुसीबत में डाल दिया है.

ट्रम्प के ट्वीट ने पाकिस्तान के शासक वर्ग में खलबली मचा दी. हमारे मीडिया के मुजाहिद कौम की हौसला अफ़्ज़ाई करने लगे कि अमरीका को ज़ोरदार जवाब दिया जाए जिससे ट्रम्प को अपनी नानी याद आ जाए.

पाकिस्तान के पास और कुछ हो न हो पर रक्षा विशेषज्ञ और मीडिया मुजाहिद बहुत हैं. यहां आदमी घर से आधा किलो दही लेने जाता है और घर वापसी तक जनरल बन जाता है और घर वालों को भाषण देता है कि 'जनरेशन फाइव वॉर' कैसे लड़ी जाएगी.

उर्दू में गरजे और अंग्रेजी में...

पाकिस्तान के शासक वर्ग ने वही किया जो वह हमेशा से करते आए हैं, वह उर्दू में गरजे और अंग्रेजी में कूटनीति करने लगे.

बड़े फ़ौजी अफसरों और रक्षा विशेषज्ञों की सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि ट्रम्प ने पता नहीं क्या बकवास की है हमें तो ये समझ तक नहीं आया.

वित्त मंत्री ने कहा कि अमरीका हमारा हुक्का-पानी बंद नहीं कर सकता क्योंकि उनके डॉलर तो हमारे एक दिन का चाय-पानी भी पूरा नहीं करते.

विदेश मंत्री के कहा कि मुंशी बुलाओ, रसीदें दिखाओ. पाकिस्तान में सौ सुनार की और एक लुहार की वाला हिसाब है. आखिर में तो बात फ़ौज को ही करनी होती है.

एक जनरल ने तो बात ही ख़त्म कर दी कि अमरीका हमारा यार है, यारों से क्या झगड़ा? ऐसा लगा कि जैसे कोई पुराना और ताकतवर दोस्त किसी का सरेबाज़ार अपमान करे और वह उसकी ठोड़ी पर हाथ रख कर कहे, "जाने दो यार, तुम हमारे यार नहीं?"

दोनों ने इस यारी से कुछ नहीं कमाया

पाकिस्तान और अमरीका में रिश्ता ऐसा ही रहा है. कभी यह भाई-भाई हो जाते हैं और कभी जन्म-जन्म के दुश्मन. कभी झप्पियां-पप्पियां डालते हैं तो कभी एक दूसरे को आंख दिखाते हैं.

अमरीका कहता है कि पाकिस्तान उसके साथ डबल गेम करता रहा है लेकिन पाकिस्तान अपने लोगों के साथ ही डबल गेम करता रहा है.

एक तरफ तालिबान के ख़िलाफ़ फौजी अड्डे देता है और दूसरी तरफ तालिबान का कंधा थपथपाता है. एक हाथ से अमरीकी डॉलर पकड़ता है और दूसरी तरफ लोगों को बताता है कि अमरीका हमारे साथ ज़बरदस्ती करता है.

अमरीका और पाकिस्तान दोनों ने इस यारी से कुछ नहीं कमाया.

पाकिस्तान ने अपने बच्चे मरवाए हैं, अमरीका तीस साल पहले अफ़ग़ानिस्तान को आज़ाद करवाने आया था. अफ़ग़ानों की तीसरी पीढ़ी जवान हो रही है जिन्होंने जंग के अलावा कुछ नहीं देखा.

आप ने कभी हाथी देखे हैं?

टेलीविज़न पर तो देखे ही होंगे. जब हाथी लड़ते हैं तो धरती हिलती है. हाथियों का नुकसान कम ही होता है पर ज़मीन पर उगी घास ही बर्बाद होती है.

अगर यही हाथी प्यार करने लगें और ऊपर-नीचे होने लगें तो भी बर्बादी घास की ही होती है.

दिल करता है कि एक हाथ पाकिस्तान की ठोड़ी पर और दूसरा ट्रम्प की ठोड़ी पर रख कर कहें कि आपकी यारी से हमारा कोई भला नहीं हुआ और आपकी दुश्मनी भी हमें नहीं भाती.

अपने-अपने घर जाओ और अपने-अपने बच्चे संभालो. ख़ुदा हाफिज़.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)