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कैमरों के फ़्लैश के बीच लंदन कोर्ट में पेश हुए विजय माल्या
- Author, राहुल जोगलेकर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन
भारतीय अदालतों में वांछित कारोबारी विजय माल्या सोमवार को ब्रिटेन की एक अदालत में पेश हुए. माल्या के भारत प्रत्यर्पण के सिलसिले में लंदन के वेस्टमिंस्टर मैजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई हो रही है.
लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में 13 दिसंबर तक उनके ख़िलाफ़ सुनवाई चलेगी लेकिन कोर्ट के फैसले के लिए अगले साल की शुरुआत तक का इंतज़ार करना होगा. इस मुक़दमे में क्लेयर मॉन्टगुमरी विजय माल्या का बचाव कर रहे हैं.
कोर्ट के बाहर विजय माल्या के मामले को कवर करने के लिए जिस तादाद में मीडिया इकट्ठा हुआ था, उससे ये साफ़ तौर पर जाहिर हो रहा था कि भारत में इस मुक़दमे को लेकर कितनी दिलचस्पी है.
करीब 30 कैमरे विजय माल्या पर निगहबान थे और कोर्ट रूम की तरफ़ बढ़ते उनके हर कदम पर नज़र टिकाए हुए थे.
भारत में 61 वर्षीय विजय माल्या पैसे के हवाला लेन-देन और धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे हैं और विजय माल्या ने इन आरोपों से इनकार किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सोमवार को विजय माल्या वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के बाहर निश्चिंत दिख रहे थे. उन्होंने वहां मौजूद पत्रकारों से कहा, "कृपया कोर्ट की कार्यवाही देखें."
भारतीय बैंकों के कर्ज़दार
अपने अच्छे दिनों में विजय माल्या को भारत को रिचर्ड ब्रैन्सन करार दिया गया था. वो अपनी शानो-शौकत, चकाचौंध से भरी ज़िंदगी, तेज़ रफ़्तार कारों और अपने किंगफ़िशर हवाई जहाज़ों के लिए मशहूर थे.
माल्या की किंगफ़िशर विमान सेवा तब ज़मीन पर आ गई थी जब और उड़ानों के लिए बैंकों ने उन्हें कर्ज़ देने से इनक़ार कर दिया था.
भारत सरकार का कहना है कि माल्या भारतीय बैंकों के 60 करोड़ पाउंड के कर्ज़दार हैं. माल्या खुद को बेकसूर बताते हैं.
माल्या साल 2016 में ब्रिटेन आ गए थे और तभी से लंदन में रह रहे हैं.
भारत सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया है और ब्रिटेन से उनके प्रत्यर्पण की कोशिश में लगी हुई है.
इससे पहले विजय माल्या को ब्रिटेन से भारत लाने में भारत को उस वक़्त बड़ी कामयाबी हाथ लगी जब उन्हें लंदन में गिरफ़्तार कर लिया गया लेकिन आठ लाख डॉलर (क़रीब 5 करोड़ रुपये) के बॉन्ड पर उन्हें ज़मानत दे दी गई. उन्हें स्कॉटलैंड यार्ड ने गिरफ़्तार किया था.
विजय माल्या के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट्स जारी हो चुके हैं और विदेश मंत्रालय उनका पासपोर्ट रद्द कर चुका है.
भारत और ब्रिटेन ने 1992 में प्रत्यर्पण संधि पर दस्तखत किए थे लेकिन इसके बाद से केवल एक ही व्यक्ति का प्रत्यर्पण किया जा सका है. इसके अलावा कुछ मामले अलग-अलग वजहों से सफलता नहीं मिल पाई.
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