मुगाबे ने दबाव किया दरकिनार, नहीं छोड़ेंगे राष्ट्रपति पद

ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने देश के नाम अपने संबोधन में कहा है कि वो अगले महीने होने वाले पार्टी की बैठक में भाग लेंगे और बैठक का नेतृत्व करेंगे.

अब से थोड़ी देर पहले देश के नाम अपने संबोधन में उन्होंने इस्तीफ़ा देने के संबंध में कोई बात नहीं की बल्कि कहा कि 'हमें एक दूसरे के प्रति कटुता और कड़वाहट नहीं रखनी चाहिए'.

मुगाबे पर लगातार पद छोड़ने के लिए दबाव बन रहा है. बीते सप्ताह सेना ने सत्ता का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और उन्हें नज़रबंद कर लिया. तब से उनकी स्थिति लगातार कमज़ोर हुई है.

टीवी संबोधन के वक्त सेना के जनरलों से घिरे मुगाबे ने कहा कि सेना के पास देश की दिशा को लेकर चिंता करने का अधिकार है और उनकी कार्रवाई संविधान का उल्लंघन नहीं है.

सत्ताधारी ज़ानू-पीएफ पार्टी ने रविवार को बैठक कर उन्हें पार्टी से प्रमुख पद से बर्ख़ास्त कर दिया था. उन्हें राष्ट्रपति के पद से इस्तीफ़ा देने के लिए सोमवार सुबह दस बजे तक का समय (ज़िम्बाब्वे समयानुसार) दिया गया था.

पार्टी का ये भी कहना था कि कि इस्तीफा ना देने की सूरत में उनके ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा.

मुगाबे की पत्नी ग्रेस मुगाबे और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया.

उम्मीद की जा रही थी मुगाबे अपने संबोधन में इस्तीफ़े की घोषणा करेंगे. लेकिन अपने बीस मिनट लंबे भाषण में कहीं भी इस्तीफ़े का ज़िक्र नहीं किया था.

अब तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पार्टी से बर्ख़ास्त किए जाने के बाद मुगाबे अगले महीने पार्टी अधिवेशन का नेतृत्व कैसे करेंगे.

रविवार को मुगाबे ने सैन्य प्रमुखों से मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान किन बातों पर चर्चा हुई इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी.

कथित तौर पर मुगाबे अपनी पत्नी ग्रेस मुगाबे को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे.

93 साल के रॉबर्ट मुगाबे बीते 37 सालों से ज़िम्बाब्वे का नेतृत्व कर रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता लूसी फ्लेमिंग का कहना है कि ऐसा लग रहा है कि दिसंबर में होने वाले पार्टी कांग्रेस तक वो ज़िम्बाब्वे के नेता रहने वाले हैं.

"इस मुद्दे पर पार्टी का आधिकारिक रुख़ पहले ही तय है. पूर्व उपराष्ट्रपति इमरसन मनंगाव को पार्टी के नेता के रूप में नियुक्त किया गया है. हो सकता है कि वो नेतृत्व करें और सत्ता अपने हाथ में लें."

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