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डोनल्ड ट्रंप क्या आज अमरीकी चुनाव जीत पाएंगे?
- Author, ओवेन एमॉस
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
क्या आज की तारीख़ में ट्रंप फिर से राष्ट्रपति चुनाव जीत सकते हैं? इस मसले पर पांच विशेषज्ञ और एक सटोरिया का विश्लेषण यहां पढ़िए.
डोनल्ड ट्रंप के चुने जाने के 12 महीने बाद उनके आकलन में कहने के लिए बहुत कुछ है. इसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जिसके बारे में कहा जाए कि वो सुगम तरीक़े से हुआ.
हिलेरी क्लिंटन से क़रीब 30 लाख कम वोट पाने के बावजूद डोनल्ड ट्रंप ने चुनाव जीता था.
ट्रंप के हाथ में अमरीका की कमान आने के बाद से कई बर्ख़ास्तगियां, एएफ़एल खिलाड़ियों से टकराव और उत्तर कोरिया से ख़तरनाक तनातनी अहम विवाद हैं.
ट्रंप के समर्थन में गिरावट आई है. दूसरी तरफ़ ट्रंप के चुनावी कैंपेन की जांच भी जारी है.
दूसरी तरफ़ ट्रंप के समर्थकों का दावा है कि अर्थव्यवस्था की सेहत ठीक हो रही है और सीमा सुरक्षा को और पुख़्ता किया गया है.
इन दोनों दावों के आधार पर ट्रंप को उनके समर्थक सही ठहरा रहे हैं. इन तमाम दावों और आलोचनाओं के बीच एक सवाल है कि क्या ट्रंप फिर से चुनाव जीत सकते हैं?
पहला फ़ैसला: ट्रंप मुश्किल में हैं
नवंबर 2016 में हैरान करने वाले नतीजे के बाद ट्रंप ने प्रोफ़ेसर अलान लिचमैन को एक हस्तलिखित नोट भेजा था, "प्रोफ़ेसर- बधाइयां- आप सही थे."
23 सितंबर 2016 के वॉशिंगटन पोस्ट के एक लेख में प्रोफ़ेसर लिचमैन ने कहा था कि ट्रंप चुनाव जीतने जा रहे हैं.
इस लेख में प्रोफ़ेसर ने ट्रंप के जीतने का दावा किया था. क्या आज की तारीख़ में भी ऐसा ही दावा किया जा सकता है?
प्रोफ़ेसर लिचमैन कहते हैं, "ट्रंप को लेकर काफ़ी नकारात्मक चीज़ें हैं जिसके आधार पर हार का अनुमान लगाया जा सकता है."
लिचमैन अमरीका की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं. प्रोफ़ेसर ने 13 चीज़ों का इस्तेमाल चुनावी भविष्यवाणी के लिए किया है.
उन्होंने ट्रंप की सत्ताधारी पार्टी, अर्थव्यवस्था, स्कैंडल, उम्मीदवारों की पहचान और अन्य मुद्दों पर फ़ोकस किया है.
प्रोफ़ेसर लिचमैन का कहना है कि अभी बहुत जल्दबाजी है और ऐसे में काल्पनिक चुनाव को लेकर कुछ भी कहना मुश्किल है.
मिसाल के तौर पर मध्यावधि चुनाव अभी नहीं होने जा रहा है. हालांकि प्रोफ़ेसर लिचमैन का कहना है कि मौजूदा हालात ट्रंप के पक्ष में बहुत नहीं दिख रहे हैं.
उनका कहना है कि कोई ऐसी बड़ी उपलब्धि नहीं है जिसके आधार पर कहा जा सके कि यह राष्ट्रपति ट्रंप ने किया है. हालांकि अमरीका की अर्थव्यवस्था पटरी पर है.
प्रोफ़ेसर लिचमैन ने कहा कि उनकी नकारात्मक होती छवि भारी पड़ सकती है.
उनका कहना है कि ट्रंप की बदनामी बढ़ रही है. प्रोफ़सर लिचमैन ने ट्रंप पर महाभियोग की भविष्यवाणी करते हुए एक किताब लिखी है.
क्या प्रोफ़ेसर किताब में कही अपनी बात पर कायम हैं? इस पर लिचमैन का कहना है कि वो इस पर कायम हैं और शर्त लगाने को तैयार हैं.
दूसरा फ़ैसला: ट्रंप क्लिंटन को हरा सकते हैं लेकिन किसी और डेमोक्रेट से हार सकते हैं
द ट्रैफ़लगर ग्रुप का मुख्यालय जॉर्जिया के अटलांटा में है. ये चुनावों का सर्वे करने वाली एक छोटी सी फर्म है.
इस फर्म ने न केवल ट्रंप की जीत की भविष्यवाणी की थी बल्कि उनके जीत के मार्जिन के बारे में भी बताया था.
इसलिए साल भर बाद ट्रैफ़लरगर ग्रुप ट्रंप के कामकाज को किस तरह से देखता है?
द ट्रैफ़लगर ग्रुप के सीनियर स्ट्रैटेजिस्ट रॉबर्ट कैहली कहते हैं, "अगर हालात पहले जैसे रहे तो मुझे नहीं लगता कि कोई दिक्कत होने वाली है. ट्रंप फिर चुनाव जीत जाएंगे."
द ट्रैफ़लगर ग्रुप इस साल 12 अमरीकी राज्यों में सक्रिय है और वो ट्रंप की लोकप्रियता पर सर्वे करता रहा है.
रॉबर्ट कैहली कहते हैं, "ट्रंप अब भी ऐसी चीज़ें कर रहे हैं जो उन लोगों को चार्ज करती रहती है जो उन्हें व्हाइट हाउस में चुनकर लाए थे."
हालांकि ट्रंप पर रूस से संबंध रखने के आरोप लगते रहे हैं.
इस पर रॉबर्ट का जवाब है, "हिलेरी के भी रूस के साथ स्ट्रॉन्ग कनेक्शन थे और इससे ट्रंप पर लगाए जा रहे आरोप संतुलित हो जाते हैं."
तीसरा फ़ैसला: ट्रंप की एक और जीत की संभावना से इनकार नहीं
20 जनवरी से ही गैलप ट्रंप की लोकप्रियता पर हर रोज सर्वे करता रहा है. अमरीकी मतदाताओं से राष्ट्रपति के कामकाज के बारे में सवाल पूछा जाता है.
लेकिन सर्वे से मिल रहे आंकड़ें बहुत अच्छे नतीज़े नहीं दे रहा है.
जून से ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग अमूमन 40 फीसदी के नीचे रही है लेकिन 29 अक्टूबर को ये महज 33 फीसदी थी.
लेकिन गैलप के एडिटर-इन-चीफ़ फ़्रैंक न्यूपोर्ट ये नहीं मानते कि किसी काल्पनिक चुनाव की सूरत में ट्रंप हार जाएंगे.
उन्होंनें कहा, "वे भले ही फिलहाल थोड़ा डाउन चल रहे हों लेकिन मार्च के बाद जो बड़ी तस्वीर उभरेगी, उसमें कोई नाटकीय बदलाव नहीं होने वाला है. वे तब भी अलोकप्रिय थे जितने अब हैं. 2016 में उन्हें लोकप्रिय वोट नहीं मिले लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज को जीतने में वे कामयाब रहे. मैं इस संभावना से इनकार नहीं करूंगा कि मुक़ाबले में अगर वहीं प्रतिद्वंदी उनके सामने रहा तो वे चुनाव फिर जीत सकते हैं. लेकिन मैं ये भी नहीं कहूंगा कि वो चुनाव जीत जाएंगे."
चौथा फ़ैसला: ट्रंप को हराने के लिए डेमोक्रेट्स को किसी ख़ास उम्मीदवार की ज़रूरत पड़ेगी
न्यूयॉर्क के स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर हेलमट नॉरपॉथ ने भी 2016 में ट्रंप के चुनाव जीतने की भविष्यवाणी की थी.
वो कहते हैं, "अगर आप उनकी अप्रूवल रेटिंग देखें तो ये बेहद ख़राब है. किसी राष्ट्रपति के कार्यकाल के इस मोड़ पर ये अब तक कि सबसे ख़राब रेटिंग है."
क्या अभी चुनाव हों और हिलेरी उनके मुक़ाबले में फिर खड़ी हों तो क्या नतीज़े होंगे?
इस सवाल पर प्रोफ़ेसर हेलमट नॉरपॉथ कहते हैं, "मैं फिर से ट्रंप की जीत पर दांव लगाऊंगा. वे हिलेरी को चुनाव में फिर हरा देंगे."
रॉबर्ट कैहली की तरह ही प्रोफ़ेसर नॉरपॉथ भी ये मानते हैं कि डेमोक्रेट्स को ट्रंप के मुक़ाबले कोई दूसरा चेहरा पेश करना होगा.
वे कहते हैं, "मुझे लगता है कि डेमोक्रेट्स को इस बात का एहसास ही नहीं है कि उनके पास बराक ओबामा के तौर पर किस तरह का ख़ास उम्मीदवार था."
पांचवां फ़ैसला: ट्रंप हिलेरी को हरा सकते हैं लेकिन जोए बि़डेन को नहीं
प्रोफ़ेसर हेलमट नॉरपॉथ के सवाल का जवाब प्रोफ़ेसर बारबरा पेरी देती हैं. उनका कहना है कि पूर्व उपराष्ट्रपति ट्रंप को बेहतर चुनौती दे सकते हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ वर्जिनिया में प्रेसिडेंशियल स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर बारबरा पेरी कहती हैं, "अगर कल चुनाव हों और ट्रंप के ख़िलाफ़ जोए बिडेन खड़े हों तो मुझे लगता है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जीत सकते हैं."
लेकिन इस योजना में एक दिक्क़त है. प्रोफ़ेसर बारबरा पेरी के मुताबिक़ 2020 में जोए बिडेन 77 साल के हो जाएंगे.
तो क्या ट्रंप के मुक़ाबले में हिलेरी उम्मीदवार बनी तो?
वो कहती हैं, "मैं कहूंगी कि हिलेरी के ख़िलाफ़ ट्रंप फिर चुनाव जीत जाएंगे."
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