आख़िर चीन में क्यों है गधे की भारी मांग?

    • Author, एलेस्टेयर लाइटहेड
    • पदनाम, बीबीसी अफ़्रीका संवाददाता

चीन में गधे की खाल की भारी मांग के कारण उनकी आबादी पर संकट के बादल घिर आए हैं. यहां इनका इस्तेमाल हेल्थ फ़ूड और पारंपरिक दवा बनाने में किया जाता है.

गधे के मांस की भी यहां उतनी ही मांग है, लेकिन इनकी आबादी में आई बड़ी गिरावट और सुस्त प्रजनन क्षमता के तथ्य ने आपूर्तिकर्ताओं को किसी और विकल्प को तलाशने पर विवश कर दिया है.

गधे क्यों उपयोगी?

गधे की गिरती आबादी ने अफ़्रीका को बुरी तरह प्रभावित किया है, क्योंकि यहां इस जानवर का उपयोग विशेष रूप से ग़रीब समुदायों में परिवहन और खेती में किया जाता है. इसी वजह से ये जीवन के महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.

नक़द पाने के लिए गधों की चोरी बढ़ रही है और पिछले कुछ सालों में कई इलाक़ों में गधे की क़ीमत दोगुनी हो गई है. इस वजह से यहां के परिवार नया जानवर ख़रीदने में असमर्थ होते जा रहे हैं.

पानी पहुंचाने वाले 29 वर्षीय एंथनी माउपे वान्यामा के पास चार साल से गधा था, लेकिन एक सुबह जब वो सो कर उठे तो उनका गधा ग़ायब था.

दो बच्चों के पिता एंथनी ने कहा, "मैं जब उठा तो वहां मेरा गधा नहीं था. मैंने ज़मीन ख़रीदी, घर ख़रीदा, स्कूल की फीस चुकाई और अपने परिवार की देखभाल कर रहा था."

खाल के लिए गधे की चोरी

नैरोबी के बाहरी इलाक़े कीनियाई शहर ओनगाटा रोंगई के रहने वाले एंथनी ने अपने गधे का नाम कार्लोस रखा था.

अपने प्यारे गधे को याद करते हुए रोते हुए वो कहते हैं, "जब मैं सो कर उठा तो कार्लोस वहां नहीं था. मैं उसे चारों और ढूंढा, और फ़िर उसे मरा हुआ पाया. चोर उसका चमड़ा निकाल ले गए थे."

अब वो एक अन्य गधे को किराए पर लेकर अपनी गधा गाड़ी पर प्लास्टिक के नीले डिब्बे में पानी बेचने जाते हैं, लेकिन अब उन्हें अपने तीन से चार डॉलर की कमाई का एक हिस्सा उसके मालिक को देना होगा.

एंथनी ने कहा, "अब मेरे पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं. मैंने अपना किराया भी नहीं दिया है, स्कूल शुल्क भी नहीं चुकाया और मेरी कमाई पर कई लोग निर्भर हैं."

वो एक नया गधा ख़रीदने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं.

गधे के निर्यात के आंकड़े

ब्रिटेन की चैरिटी डॉन्की सैंक्चुरी के आंकड़ों के मुताबिक हर साल 18 लाख गधे की खाल का कारोबार होता है जबकि मांग 100 लाख खालों की है.

एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक 1990 में 110 लाख की तुलना में आज चीन में गधे की आबादी महज 30 लाख है.

यहां गधे की खाल को उबाल कर बनाए जाने वाले सुपरफ़ूड जिलेटिन, इजियाओ की कीमत 25,390 रुपये प्रति किलो तक है.

युगांडा, तंज़ानिया, बोत्सवाना, नाइज़र, बुर्किनो फ़ासो, माली और सेनेगल ने अपने यहां से चीन को गधे बेचे पर प्रतिबंध लगा दिया है.

गधे के लिए बूचड़खाने

कीनिया में खोले गए तीन बूचड़खाने की वजह से गधे की क़ीमतों में काफ़ी इजाफ़ा हो हुआ है.

इनमें से प्रत्येक में रोज़ाना करीब 150 जानवरों को काटने के बाद इनके मांस की पैकिंग और बर्फ़ में जमा करने के साथ ही खाल को निर्यात के लिए तैयार किया जा सकता है.

बूचड़खाने में जीवित गधे को उसके वजन के अनुसार बेचा जाता है.

नैरोबी के पश्चिम में स्थित स्टार ब्रिलियंट गधा निर्यात बूचड़खाने के सीईओ बताते हैं कि कीनिया और अफ़्रीका में गधा बूचड़खाने के लिए लाइसेंस पाने वाले वो पहले आदमी हैं.

उन्होंने कहा, "पहले गधे का बाज़ार नहीं था. लोग अपने बच्चों की स्कूल फ़ीस देने के लिए अपनी गायें, बकरी बेचा करते थे. अब लोग बाज़ार में गाय से अधिक गधे बेच रहे हैं."

वो कहते हैं, "पहले हमें गधे की बिक्री से कुछ नहीं मिलता था, लेकिन अब हम चीनियों की इस बढ़ती मांग से ख़ुश हैं, क्योंकि आज इसकी वजह से कई लोगों को फ़ायदा मिल रहा है."

गधे से हो रही बदसलूकी

गधों के साथ हो रहे बर्ताव की आलोचना भी हो रही है. ब्रिटेन में गधों की चैरिटी संस्था और दक्षिण अफ़्रीका के समूह ऑक्सपेकर्स के खोजी पत्रकारों ने जानवरों से हो रही बदसलूकी के मामले सामने लाए हैं.

डॉन्की सैंक्चुरी के माइक बेकर कहते हैं, "गधे अपने सबसे बड़े संकट का सामना कर रहे हैं. इसकी वजह से इनके व्यापार पर रोक लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान चलना शुरू हो गया है. हमने गधों को भूखा रख कर मारते देखा है, जिससे उनकी खाल निकालने में आसानी हो. इसके अलावा उनके सिर पर चोट कर भी मारा जाता है."

बेकर कहते हैं, "अंतरराष्ट्रीय दबाव से इस पर प्रभाव पड़ेगा. एक दर्ज़न से ज़्यादा देशों ने इनके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है."

इन सब के बीच समूचे अफ़्रीकी महाद्वीप पर भयानक सूखे से ग्रसित लोग अपने गधे को बेचने पर मजबूर हैं जबकि अन्य कई लोगों के गधे चोरी किए जा रहे हैं जो नया गधा ख़रीदने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं.

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