उत्तर कोरिया ने कब-कब कहा, 'ये युद्ध की घोषणा है'

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- Author, श्रेयस रेड्डी
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
उत्तर कोरिया का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का हालिया बयान 'युद्ध की घोषणा' है.
लेकन ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि इस कम्युनिस्ट देश ने विवाद की स्थिति में ऐसे शब्द इस्तेमाल किए.
25 सितम्बर को न्यूयॉर्क में संवाददाताओं से बात करते हुए उत्तर कोरियाई विदेश मंत्री री योंगहो ने कहा था, "तथ्य है कि ये बात ऐसी व्यक्ति की ओर से आई है जो अमरीका के शीर्ष पद बैठा है और ये साफ़ तौर पर युद्ध की घोषणा है."
23 सितम्बर को ट्रंप ने ट्वीट किया था, "अभी मैंने संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरियाई विदेश मंत्री को सुना. अगर छोटे रॉकेट मैन के विचार को ही वो दुहाराते हैं, तो वे बहुत दिन तक नहीं रहने वाले हैं!"

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अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों, दक्षिण कोरिया और वॉशिंगटन के सैन्य अभ्यास और मानवाधिकार उल्लंघन पर प्योंगयांग की आलोचना जैसे कई मुद्दों पर उत्तर कोरिया ने ये कहा है.
आइए जानते हैं कि उत्तर कोरिया ने ये कब-कब कहा-
7 अक्तूबर 2004
उत्तर कोरिया में मानवाधिकार मामलों पर अमरीकी कांग्रेस में क़ानून पास करने पर सरकारी रेडियो सेवा, कोरियन सेंट्रल ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन (केसीबीएस) ने कहा, "अमरीका द्वारा उत्तर कोरिया ह्यूमन राइट्स बिल स्वीकार किए जाने को हम आक्रामकता और युद्ध की घोषणा के रूप लेते हैं."
केसीबीएस ने घोषणा की कि 'उत्तर कोरिया को अलग-थलग करने की कोशिशों को ध्वस्त करने के लिए प्योंगयांग माकूल जवाब देगा.'

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15 दिसम्बर 2004
जापान ने कहा था कि वो शीतयुद्ध के दौरान अपने नागरिक के अपहरण किए जाने के विवाद पर उत्तर कोरिया को मदद देना बंद कर देगा.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज़ एजेंसी ने विदेश मंत्री के हवाले से कहा, "धुर दक्षिणपंथी ताक़तों के दबाव में अगर उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं तो हम इसे अपने देश के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा के रूप में लेंगे और हम इसका जवाब ठोस कार्रवाइयों से देंगे."
11 अक्तूबर 2006
उत्तर कोरिया के पहले परमाणु परीक्षण के बाद अमरीका की अगुवाई में संयुक्त राष्ट्र में लगाए गए प्रतिबंध का विरोध करते हुए केसीबीएस ने विदेश मंत्री का बयान चलाया, "अगर अमरीका दबाव को लगातार बढ़ाना जारी रखता तो हमें ठोस कार्रवाई पर मज़बूर होना पड़ेगा."
विदेश मंत्री के हवाले से कहा गया, "प्योंगयांग संवाद और संघर्ष दोनों के लिए तैयार है."

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16 अक्तूबर 2010
"नौसैनिक नाकाबांदी करना हमारे ख़िलाफ़ एक सैन्य उकसावे वाली कार्रवाई और युद्ध की घोषणा है."
ये बयान सरकारी रेडियो रोडोंग सिनमुन का है, जिसे केसीएनए ने चलाया और इसके बाद सियोल की न्यूज़ एजेंसी योनहाप ने ख़बर को आगे बढ़ाया.
दक्षिण कोरिया, अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेना ने संयुक्त रूप से अभ्यास किया था.
25 जून 2012
एक सैन्य अभ्यास के दौरान अमरीका और दक्षिण कोरिया के सैनिकों ने उत्तर कोरिया के झंडे पर फ़ायर किए थे.
इसकी प्रतिक्रिया केसीएनए ने विदेश मंत्री के हवाले से दी, "ये बेहद गंभीर सैन्य कार्रवाई है और जानबूझ कर बिना युद्ध की घोषणा किए, उकसावे के लिए देश के झंडे पर ज़िंदा कारतूस और गोले दाए गए."
15 फ़रवरी 2013
"उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ ये प्रतिबंध युद्ध की कार्रवाई की तरह हैं और ये युद्ध की घोषणा है."
प्योंगयांग के तीसरे परमाणु परीक्षण के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधों को और कड़ा किए जाने पर रोडोंग सिनमुन ने ये टिप्पणी की थी.
ये प्रतिबंध 2006 में देश के पहले परमाणु परीक्षण के दौरान लगाए गए थे.
14 अगस्त 2015
"इस तरह के अभियान को हम सैन्य उकसावे वाली कार्रवाई और युद्ध की घोषणा मानते हैं."
उत्तर कोरिया की सरकारी वेबसाइट उरिमिन्जोकिरी में जापानी समाचार एजेंसी क्योडो का हवाला देते हुए ये बयान दिया गया था.
दक्षिण कोरिया में रह रहे उत्तर कोरियाई लोगों के एक समूह, 'फ़ाइटर्स फॉर फ्री नॉर्थ कोरिया', ने सीमा पार प्योंगयांग के ख़िलाफ़ दो लाख पर्चे गुब्बारे से भेजे थे.

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11 फ़रवरी 2016
कोरिया के शांतिपूर्ण एकीकरण को लेकर बनी उत्तर कोरिया की समिति ने बयान दिया, "एक ख़तरनाक युद्ध की घोषणा, कोरियाई प्रायद्वीप को युद्ध की ओर धकेल रही है."
इस बयान को केसीएनए ने चलाया. इससे पहले दक्षिण कोरिया ने 'नॉर्थ साउथ केसांग औद्योगिक कॉम्प्लेक्स' से हटने की घोषणा की थी.
30 अप्रैल 2016
केसीएनए ने विदेश मंत्री के हवाले से कहा, "अमरीका का युद्धाभ्यास शुरू करना, उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ युद्ध की खुली घोषणा जैसी है."
ये बयान अमरीका दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास के बाद आया था.

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7 जुलाई 2016
मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में अमरीका ने उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग-उन, कई अधिकारी और पांच मंत्रालयों पर प्रतिबंध लगाया था.
इसके बाद केसीएनए ने विदेश मंत्री के हवाले से कहा, "ये विवाद को और भड़काने की सबसे शत्रुतापूर्ण कार्रवाई है. अमरीका ने हमारे शीर्ष नेतृत्व को चुनौती दी है. ये साफ़ तौर पर हमारे ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा है."
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