हिज़बुल मुजाहिदीन आतंकवादी संगठन- अमरीका

हिज़बुल मुजाहिदीन के शीर्ष नेता सैयद सलाहुद्दीन

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    • Author, सलीम रिज़वी
    • पदनाम, न्यूयॉर्क से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

अमरीका ने पाकिस्तान-स्थित कश्मीरी चरमपंथी संगठन हिज़बुल मुजाहिदीन को विदेशी आतंकवादी संगठन और वैश्विक आतंकी गुट करार देकर उसे प्रतिबंधित कर दिया है.

अमरीकी विदेश विभाग ने इस सिलसिले में एक बयान जारी कर कहा, "हिज़बुल मुजाहिदीन को विदेशी आतंकवादी संस्था करार देकर अमरीकी जनता और विश्व समुदाय को यह बताना है कि ये एक आतंकवादी गुट है. इस तरह आतंकवादियों और आतंकी गुटों को अलग-थलग करने में और इन गुटों की अमरीकी वित्तीय संस्थानों के प्रयोग पर भी पाबंदी लगती है. इसके अलावा इनके खिलाफ़ कार्रवाई करने में अमरीकी सुरक्षा एजेंसियों और अन्य सरकारों को भी मदद मिलती है."

प्रेस विज्ञप्ति

अमरीका का कहना है कि इस तरह हिज़बुल मुजाहिदीन पर प्रतिबंध लगाकर उसे आतंकी हमले करने के लिए धन जुटाने से भी रोका जा सकेगा.

इस प्रतिबंध के तहत अमरीका में हिज़बुल मुजाहिदीन की संपत्ति को ज़ब्त किया जाएगा और अमरीकी नागरिकों के इस संगठन के साथ किसी प्रकार के संबंध रखने पर भी पाबंदी होगी.

नरेंद्र मोदी और डोनल्ड ट्रंप

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इसी साल जून महीने में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमरीका यात्रा के दौरान ही अमरीकी सरकार ने हिज़बुल मुजाहिदीन के सरगना सैय्यद सलाहुद्दीन को भी वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था.

दबाव की रणनीति

इससे पहले साल 1997 में अमरीका ने हरक़तुल मुजाहिदीन और साल 2001 में दो संगठनों लश्करे तैबा और जैशे मोहम्मद को भी चरमपंथी गुटों की सूची में शामिल किया था.

हिज़बुल मुजाहिदीन ने भारत प्रशासित कश्मीर में कई चरमपंथी हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी, जिसमें साल 2014 के अप्रैल महीने में हुए धमाके भी शामिल हैं जिसमें 17 लोग ज़ख़्मी हुए थे.

बुरहान वानी

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माना जा रहा है कि अमरीका के इस फैसले से भारत, पाकिस्तान पर यह दबाव बढ़ा सकेगा कि वह कश्मीर में चरमपंथ को बढ़ावा देना बंद करे.

पिछले साल कश्मीर में हिज़बुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद पाकिस्तान सरकार ने बुरहान वानी को शहीद करार दिया था.

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