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इस देश में महिलाओं के स्कर्ट पहनने पर लगी पाबंदी
युगांडा में सरकारी कर्मियों के पहनावे पर लगी नई पाबंदियों के बाद नैतिकता और महिला अधिकारों की बहस शुरू हो गई है.
नए निर्देशों में 'शालीन पहनावे' को नई परिभाषा दी गई है.
अब महिलाओं को इसकी इजाज़त नहीं है:
- स्कर्ट या घुटने से ऊपर की ड्रेस
- बिना बांह वाली, पारदर्शी ब्लाउज़ या ड्रेस
- ऐसी ड्रेस जिसमें क्लीवेज, नाभि, घुटने या पीठ दिख रही हो.
- चमकदार रंग के बाल
- तीन सेंटीमीटर से ज़्यादा नाखून या बहुत चमकदार या कई रंगों वाली नेल पॉलिश.
पुरुषों के लिए नियम:
- साफ ट्राउज़र, लंबी बांहों वाली कमीज़, जैकेट और टाई पहनना ज़रूरी.
- चुस्त ट्राउज़र नहीं पहनना है.
- जब तक सेहत से जुड़ी मजबूरियां न हो, खुले जूते नहीं पहनना.
- छोटे और सलीक़े से कटे हुए बाल
पब्लिक सर्विस मिनिस्ट्री की एचआर डायरेक्टर अदाह मुवांगा ने कहा कि शिकायतों के चलते नए निर्देशों की ज़रूरत थी. उन्होंने कहा कि पुरुष कर्मियों की तरफ़ से महिला अधिकारियों के संबंध में शिकायत की गई थी कि उनके शरीर के हिस्से ढंके हुए होने चाहिए.
मुवांगा कहती हैं कि दफ़्तर में मिनी स्कर्ट पहनना पुरुष सहकर्मियों के यौन उत्पीड़न जैसा है और अगर नए नियमों की अनदेखी की गई तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
इस पर युगांडा में अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं.
'ध्यान भटकाने वाला कदम'
शिक्षक मूज़ा सेम्प्युरा ने कहा कि सिविल कर्मियों को नौकरी की शुरुआत में होने वाले इंडक्शन में पहनावे के नियमों से अवगत कराया जाता है.
उन्होंने कहा, 'हर पेशे की अपनी आचार संहिता होती है. जब आप काम पर होते हैं तो आपको उसी हिसाब से कपड़े पहनने चाहिए. मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है.'
युगांडा वूमंस नेटवर्क की मुखिया रीता अचिरो इसे ध्यान भटकाने वाला क़दम मानती हैं.
उन्होंने कहा, 'पहनावे से सरकारी कर्मियों का काम पर कैसे असर पड़ता है? युगांडा को ज़्यादा शिक्षकों और नर्सों की ज़रूरत है. हमारे यहां मांओं की मृत्यु दर काफ़ी है, स्कूलों में बच्चे बिना शिक्षकों के है. मुझे समझ नहीं आता कि मिनी-स्कर्ट या चमकदार कमीज़ पर बैन लगाने से ये हालात कैसे सुधरेंगे.'
'क्या मुझे टीचर नहीं बनने दिया जाएगा?'
मई में मैकरेरे यूनिवर्सिटी की दो छात्राओं की तस्वीरें फ़ेसबुक पर ख़ूब शेयर की गई थीं. युगांडा के कई लोगों ने एक पार्टी में 'भड़काऊ' स्कर्ट पहनने के लिए उनकी आलोचना की थी.
रेबेका नदम्बा इनमें से एक थीं. वह कहती हैं, 'लोगों ने मुझसे पूछा कि क्या मैं होश में हूं. कुछ ने कहा कि मुजे टीचर नहीं बनने दिया जाना चाहिए.'
यूनिवर्सिटी ने उन्हें एक शैक्षिक कार्यक्रम में 'दुराचार' के लिए उन्हें नोटिस भेजकर पूछा था कि उन पर कार्रवाई क्यों न की जाए.
'भड़काऊ पहनावा'
वकील और एक्टिविस्ट पेशेंस अकुमु इसे महिलाओं को काबू में रखने का 'संस्थानीकरण' मानती हैं. उनके मुताबिक मैकरेरे यूनिवर्सिटी को चुनिंदा मौकों पर नैतिकता नहीं थोपनी चाहिए.
वह कहती हैं, 'हाल ही में बलात्कार की कोशिश के बाद एक लड़की ने खिड़की से कूद गई और बाल-बाल बची. यूनिवर्सिटी ने उसे तो नोटिस नहीं भेजा. वो अब अचानक क्यों गुस्से में आ गए हैं?'
युगांडा में समाज तेजी से बदला है. अमरीकी फिल्मों और पॉप म्यूज़िक वीडियोज़ के आने के साथ नए ट्रेंड भी कम्पाला की सड़कों पर दिखने लगे हैं.
और इस बीच कथित भड़काऊ पहनावे के लिए महिलाओं पर हमले की कुछ घटनाएं भी सामने आई हैं.
'शालीनता कपड़ों में बसती तो..'
लेखिका और कलाकार लिंडसे कुकुंदा मानती हैं कि यह धर्म और संस्कृति के लिए सनक है और यह महिलाओं को ही प्रताड़ित करता है.
वह कहती हैं, 'अगर शालीनता कपड़ों में बसती तो हम किसी बलात्कारी या भ्रष्टाचारी नेता को मीलों दूर से पहचान लेते.'
रेडियो प्रेजेंटर जेम्स ऑनेन मानते हैं कि स्त्री और पुरुषों को जो मन हो पहनना चाहिए, लेकिन अपने चुनाव के नतीजे भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए.
वह कहते हैं, 'पूरी दुनिया में यह माना जाता है कि महिलाओं के कुछ ख़ास शारीरिक गुण होते हैं जिनके लिए पुरुष आकर्षित होते हैं. अगर महिला इस तरह के कपड़े पहने कि उन शारीरिक गुणों पर ध्यान जाए, तो ज़्यादातर लोगों के लिए यह मानना मुश्किल हो जाता है कि यह जान-बूझकर ध्यान खींचने की कोशिश नहीं है.'
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