पांच वजहों से ऐतिहासिक रहेगी मोदी की इसराइल यात्रा

भारत, इसराइल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसराइल की ऐतिहासिक यात्रा पर गहरी दोस्ती के साथ: बिन्यामिन नेतन्याहू

संमदर किनारे खींची गई मोदी और नेतन्याहू की तस्वीर पर लिखे ये शब्द भारतीय प्रधानमंत्री की इसराइल यात्रा के बारे में काफी कुछ बयान कर देते हैं.

और क्यों न करें. इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू यूं ही तो नहीं नरेंद्र मोदी के दौरे को ऐतिहासिक बता रहे थे.

ऐसी कई कारण हैं, जिनकी वजह से मोदी का इसराइल दौरा लंबे समय तक याद किया जाएगा. गुरुवार को ये यात्रा समाप्त कर मोदी जर्मनी के लिए रवाना हो गए.

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पांच कारण

पहली वजह तो ये है कि सत्तर सालों में पहली बार भारत का कोई प्रधानमंत्री इसराइल के दौरे पर गया था.

इसकी सबसे बड़ी वजह भारत की अपनी घरेलू स्थिति रही है.

दरअसल इसराइल और फ़लीस्तीनी क्षेत्र का विवाद भारत की आज़ादी से भी पुराना है और भारत हमेशा से अरब देशों का हिमायती रहा है.

इसराइल से संबंध जब शुरू हुए उसके बाद देश में गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हो गया था और कोई भी दल राजनीतिक वजहों से ये जोखिम नहीं उठाना चाहता था.

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मोदी-नेतन्याहू

मोदी के इस दौरे को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की पर्सनल केमिस्ट्री की वजह से भी याद किया जाएगा.

मोदी जहां भी गए तकरीबन हर जगह हर फ्रेम में बिन्यामिन नेतन्याहू उनके साथ दिखे.

समंदर किनारे वाली वो तस्वीर भी रेत पर निशान छोड़ने वाली कही जा सकती है. यहां तक कि नेतन्याहू प्रोटोकॉल तोड़कर मोदी को विदा करने एयरपोर्ट तक गए.

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मोशे से मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस यात्रा में यरुशलम भी गए जहां उनकी 11 वर्षीय मोशे से ख़ास मुलाकात हुई.

मोशे ने 2008 के मुंबई हमले में अपने मां-बाप को खो दिया है. तब चरमपंथियों ने चबाड हाउस पर भी हमला किया था जिसमें बेबी मोशे की जान किसी तरह बच गई थी.

बेबी मोशे की नैनी ने उसे बचाने में अहम भूमिका अदा की थी. वे अब इसराइल के अफुला में अपने दादा-दादी के साथ रहते हैं.

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रक्षा संबंध

इसराइल बीते 15 से 20 साल में भारत को रक्षा उपकरण देने के मामले में चौथा सबसे बड़ा देश बन चुका है. अमरीका, रूस और फ़्रांस के बाद इसराइल का नंबर आता है.

इसराइल ने भारत को कई तरह के मिसाइल सिस्टम, रडार और हथियार दिए हैं. इसराइल अपने आप बहुत बड़े प्लेटफ़ॉर्म और जहाज़ नहीं बनाता.

लेकिन वो मिसाइल और रडार सिस्टम बनाता है. बीते डेढ़ दशक में भारत की इन पर निर्भरता बढ़ी है.

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इमेज कैप्शन, प्रथम विश्व युद्ध में मारे गए भारत सैनिकों के हाइफा स्थित स्मारक पर श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री मोदी

सात समझौते

दोनों देशों के द्विपक्षी संबंधों को मजबूत करने के लिए मोदी और नेतन्याहू ने सात समझौतों पर दस्तखत किए हैं.

ये समझौते विज्ञान, टेक्नॉलॉजी, पानी के प्रबंधन, रिसर्च और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में किए गए हैं.

चरमपंथ और आतंकवाद का मिलकर मुकाबला करने के लिए भी दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है.

"आई फ़ॉर आई. इसका मतलब है इसराइल के लिए इंडिया और इंडिया के लिए इसराइल," इसराइल से भारत के संबंधों को रेखांकित करते हुए दिए गए मोदी के इस बयान से काफी कुछ साफ हो जाता है.

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