पाकिस्तान: मुसलमान मर्दों की मर्दानगी पर बहस

    • Author, ताहिर इमरान
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता

"मैं ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो हूं! मैं एक दक्षिण एशियाई कलाकार हूं जिसके शरीर में लेबनान और पाकिस्तान का ख़ून शामिल है और एक 'क्वीर' नाम से एक मुद्दे पर काम कर रहा हूं."

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीपुल्स पार्टी के संस्थापक ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो के पोते ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो जूनियर एक वीडियो में अपना परिचय प्रकार देते हैं. इस वीडियो और इसमें कही गई बातें इन दिनों पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर चर्चा का मुद्दा बन रही हैं.

'द क्वीर मुसलमान' विषय के अंतर्गत भुट्टो जूनियर 'मुसलमान मसलमैन' यानी मुसलमान मर्दों में मर्दानगी पर चर्चा छेड़ने की बात करते हैं लोग सोशल मीडिया पर उनकी जाति और उनके यौन रुझान पर टिप्पणियां कर रहे हैं.

इस वीडियो में आख़िर ऐसा क्या है कि वो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए?

वीडियो अमरीका में रहने वाले ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो जूनियर की आवाज़ शुरु होती है जिसमें वो एक महिला से अरबी भाषा में बात कर रहे हैं. बात करने के बाद उनका फ़ोन बंद हो जाता है क्योंकि उन्हें अरबी बोलने पर विमान से उतार दिया जाता है.

'द टर्मरिक प्रोजेक्ट' के साथ बनी इस डॉक्यूमेंटरी 'द क्वीर मुसलमान' में चर्चा हो रही है उनके कपड़े, नाखूनों पर लगी नेल पॉलिश और उनके रुझानों की.

ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो बताते हैं कि 'एक क्वीर मुसलमान' विषय पर काम करना बेहद कठिन था.

वो कहते हैं कि उन्हें इस बात की बिल्कुल परवाह नहीं है और उन्हें नहीं पता कि वीडियो देखने वाले क्या कहेंगे. उनका मानना है कि जब इस मुद्दे को एक अलग तरीके से पेश कियाजाता है तो लोग अपने विचारों पर दोबारा विचार करते हैं और इस बारे में सोचने पर मजबूर जाते हैं.

उनके अनुसार स्टीरियोटाइपस पर बात करने वालों को लोग अलग कर देते हैं जैसा कि उन्हें अरबी भाषा बोलने पर विमान से निकाल दिया गया.

"ऐसी घटना के बारे में सुन कर लोगों को लगता है कि यह कहानी तो मुझे भी पता है. यही तो है क्वीर मुसलमान."

वीडियो में ज़ुल्फ़िकार भुट्टो एक गे मुसलमान का अभिनय करते हैं और इन विषयों को उठाते हैं. वीडियो में वो कशीदाकारी करते हुए इन मुद्दों पर बात करते हैं.

जिस तरह अपने 'बिल्डिंग प्रोजेक्ट' किताब में आर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर ने रंगीन कपड़ों की मदद से अपनी मांसपेशियां और शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों को दिखाया था, उसी तरह इस वीडियो में भुट्टो जूनियर महिलाओं के कपड़े पहन कर उनके जैसी भाव-भंगिमाओं के साथ मर्दानगी पर बात करते हैं.

वो कहते हैं, "ऐसा करने पर लोग इसमें रुचि लेना शुरू करते हैं और आप अपने देखने वालों को रिझाने लगते हैं. फिर आप मुद्दों की बात करते हैं."

मर्दानगी के बारे में दक्षिण एशिया में प्रचलित अवधारणाओं से ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो सहमत नहीं हैं.

वो कहते हैं, "पाकिस्तान या ऐसे कई राज्य जो राष्ट्रीयता के सिद्धांत पर बनी हैं वहां राज्य की पहचान एक शक्तिशाली पुरुष के रूप में की जाती है."

वो कहते हैं, "लेकिन यह मूर्खतापूर्ण विचार है. मर्दानगी नज़ाकत है. ये फेमिनिज़्म की ही तरह है, यह एक नरम भावना है."

भुट्टो जूनियर कहते हैं, "इतिहास महत्वपूर्ण है क्योंकि हम जो आज कर रहे हैं वह बीते कल पर ही आधारित है."

वो कहते हैं कि हमने वीडियो में अपने इतिहास का हवाला दिया है. वो कहते हैं, "मैंने अपना बचपन में बहुत शांति नहीं देखी. हिंसा हर जगह है."

वो कहते हैं, "मेरे पिता की कराची में मेरे घर के सामने हत्या कर दी गई थी, उस समय में छह साल का था. मेरे दादाजी को भी मारा गया था. मेरी बुआ की भी हत्या कर दी गई थी और मेरे चाचा की भी. सबको मार डाला गया. तो मेरी पहचान ही हिंसा के ज़रिए से बनी, शक्ति के प्रदर्शन के माध्यम से बनी."

'मुलसमान मसनमैन' के मुद्दे पर तैयार किया गया ये कार्यक्रम सेन फ्रांसिस्को में पेश किया गया,जिसके बाद जून में उन्होंने हफिंगटन पोस्ट में एक लेख लिखा और इस मुद्दे पर विस्तार से बात की.

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