ईरान में सफ़ेद कपड़ों के साथ विरोध जता रही हैं महिलाएं

ईरान में महिलाओं के सिर ढंकने संबंधी नए क़ानून का महिलाएं भारी विरोध कर रही हैं. सोशल मीडिया पर इस क़ानून को लेकर अभियान शुरू हो गया है.

ईरानी महिलाओं के विरोध का तरीका भी कुछ ख़ास है, वो काले रंग के बजाए सफ़ेद रंग का इस्तेमाल कर रही हैं. सफ़ेद हिजाब और सफ़ेद कपड़ों वाली अपनी तस्वीरों को वे हैशटैग व्हाइट वेडनसडे के साथ शेयर कर रही हैं.

दरअसल विरोध का ये तरीका माशिह अलीनेजाद ने शुरू किया है, माशिह ऑनलाइन मूवमेंट 'माय स्टीलदी फ्रीडम' की संस्थापक हैं.

1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले ईरान की महिलाएं वेस्टर्न स्टाइल के कपड़े पहना करती थीं, जिसमें मिनी स्कर्ट और शार्ट स्लीव्ड टॉप भी शामिल थे. लेकिन आयातुल्लाह ख़ुमैनी के आने के बाद हालात बदल गए.

1979 का विरोध प्रदर्शन

उस वक्त महिलाओं को सिर और घुटना ढंकने के लिए कहा गया, इसके अलावा महिलाओं के मेकअप करने पर रोक लगा दी गई थी. इसके विरोध में 1979 में करीब एक लाख महिलाएं सड़कों पर उतर आईं थीं.

इसके बाद भी महिलाएं समय समय पर विरोध करती रही हैं. तीन साल से चल रही 'माय स्टीलदी फ़्रीडम' अभियान में अब तक तीन हज़ार फ़ोटो और वीडियो शेयर किए जा चुके हैं.

अब तक ये अभियान गुपचुप ढंग से चलाया जा रहा था, ताकि सरकारी अधिकारी उन महिलाओं को पकड़ नहीं पाएं. लेकिन हैशटैग व्हाइटवेडनेसडे के ज़रिए सार्वजनिक तौर पर काफ़ी महिलाएं सामने आ रही हैं.

ऑनलाइन हैशटैग व्हाइटवेडनेसडे को शुरू हुए अभी पांच सप्ताह ही हुए हैं. पहले दो सप्ताह में अभियान को शुरू करने वाली माशिह को 200 से ज़्यादा वीडियो मिल चुके हैं. इनमें से कईयों को पांच लाख बार देखा जा चुका है.

एक वीडियो में एक महिला कह रही हैं, "सात साल की उम्र से मैं हिजाब पहन रही हूं. जबकि मैं इसका इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहती थी."

महिलाओं का साहस

कुछ वीडियो में महिलाएं बिना हिजाब के गलियों में दिखाई दे रही हैं. माशिह भी इन महिलाओं के साहस पर दंग रह गई हैं. उन्होंने कहा, "मैंने एक महिला से जब उनकी सुरक्षा की बात की, तो उन्होंने कहा कि घुटे हुए जीवन से बेहतर है कि मेरी नौकरी ख़तरे में आ जाए."

माशिह के अभियान में कुछ स्वयंसेवी उनकी मदद करते हैं. ज़्यादा वीडियो और तस्वीरें ईरान की हैं. माशिह के मुताबिक उन्हें कुछ तस्वीरें सऊदी अरब, यूरोप और अमरीका की भी मिली हैं.

इस अभियान की तारीफ़ में अफ़ग़ानी महिला ने भी ख़त लिखा है. अफ़ग़ानिस्तान में हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं है, लेकिन परिवार वालों द्वारा महिलाओं और लड़कियों पर इसके इस्तेमाल के लिए दबाव डाला जाता है.

वैसे माशिह को अपने अभियान की क़ीमत चुकानी पड़ी है, उन्हें अमरीका में निर्वासित जीवन जीना पड़ रहा है. 2009 से ईरान से बाहर रह रहीं माशिह को अपने देश पहुंचने पर गिरफ़्तारी का डर है.

उनके इस अभियान के बाद ईरान की एक तस्नीम न्यूज़ एजेंसी की मुख्य संपादक ने माशिह की उनके पति के साथ एक फोटो जारी कर, उन्हें वेश्या बताया है.

मिल रही है धमकी

इतना ही नहीं, ईरान की इस्लामिक रिव्यूल्योशनरी गार्ड कॉर्प से संबंधित एक वेबसाइट ने माशिह की एक पुरानी तस्वीर के नीचे कैप्शन लिखा है- माशिह तुम्हारे लिए मौत.

हालांकि माशिह ने कहा कि वे इन धमकियों ने नहीं डरने वाली हैं. दूसरी ओर उनके अभियान को दुनिया भर से समर्थन मिल रहा है.

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