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पाकिस्तान में दो दशकों बाद शुरू हुई जनगणना
- Author, उपासना भट्ट
- पदनाम, बीबीसी मॉनीटरिंग
पाकिस्तान 19 साल में पहली बार जनगणना कर रहा है.
हालांकि संविधान के अनुसार हर 10 साल में जनगणना कराना ज़रूरी है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता, सर्वसम्मति की कमी और लंबे चलने वाले सैन्य अभियानों के चलते इसमें देरी हुई.
इस जनगणना में पहली बार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की भी गिनती होगी. जनवरी में लाहौर हाई कोर्ट ने इस बारे में अपना फैसला दिया था.
कुछ राजनीतिक पार्टियों ने अफ़ग़ानिस्तान के शरणार्थियों को शामिल किए जाने पर चिंता व्यक्त की है क्योंकि उन्हें लगता है कि यह बजट के बंटवारे को प्रभावित करेगा.
पाकिस्तान की यह छठी जनगणना 15 मार्च और 25 मई के बीच दो चरणों में होगी. 1998 के बाद से यहां जनगणना नहीं हुई थी.
विश्व बैंक ने 2015 तक पाकिस्तान की आबादी 18.9 करोड़ होने का अनुमान लगाया था.
सरकार के अनुसार, इस जनगणना में कुल 18.5 अरब रुपए का खर्च आएगा, जिसमें सेना ने 6 अरब रुपए दिए हैं.
इसे चलाने में 1,18,918 सरकारी कर्मचारियों के साथ दो लाख सुरक्षाबल भी लगेंगे.
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स के प्रमुख आसिफ़ बाजवा ने कहा, "हमने सेना और अन्य एजेंसियों के साथ सुरक्षा योजना का खाका बना लिया है."
जनगणना पाकिस्तान में राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है क्योंकि इससे विकास के लिए फंड निर्धारित करने और राष्ट्रीय एवं प्रांतीय चुनावी क्षेत्रों के निर्धारण में मदद मिलती है.
सिंध और बलोचिस्तान प्रांत के राजनीतिक दल चाहते हैं कि इससे पहले अफ़ग़ानिस्तानी शरणार्थियों को वापस भेजा जाए. उन्हें लगता है कि स्थानीय लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे.
मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) पार्टी का सिंध के शहरी क्षेत्रों में काफी प्रभाव है. इसने अफ़ग़ान शरणार्थियों को वापस भेजने की मांग की है.
जबकि बलोचिस्तान की नेशनल पार्टी (एनपी) को लगता है कि अफ़ग़ान शरणार्थियों के आंकड़े अलग से दर्ज किए जाएं.
एनपी अध्यक्ष मीर हासिल बिज़ेंजो का कहना है, "अफ़ग़ानिस्तानी शरणार्थियों पर एक मिनी जनगणना होनी चाहिए और इस दौरान उन्हें कैंपों से निकलने न दिया जाए."
बलोचिस्तान नेशनल पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष सरदार अख़्तर मेंगल चाहते हैं कि इन्हें जनगणना में शामिल ही न किया जाए.
सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि जनगणना के 60 दिनों बाद इसके शुरुआती नतीज़े सार्वजनिक किए जाएंगे और विस्तृत रिपोर्ट डेढ़ साल के अंदर जारी की जाएगी.
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)