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सीआईए लीक्स मामले की आपराधिक जांच होगी
विकीलीक्स द्वारा सीआईए के हैकिंग उपकरणों से संबंधित हज़ारों दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाने के मामले की आपराधिक जांच शुरू हो गई है.
अमरीकी अधिकारियों ने बताया कि अमरीकी संघीय जांच एजेंसियां एफ़बीआई और सीआईए संयुक्त रूप से जांच करेंगी.
इन दस्तावेज़ों में दावा किया गया है कि सीआईए ने ऐसे तरीक़े खोज निकाले हैं जिससे स्मार्टफ़ोन और टीवी माइक्रोफ़ोन्स के ज़रिये जासूसी की जा सकती है.
बीते मंगलवार को लीक हुए इन दस्तावेज़ों की सत्यता के बारे में सीआईए, एफ़बीआई और व्हाइट हाउस ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था.
बुधवार को सीआईए के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा था, "इस तरह की जानकारियां केवल अमरीकी सैनिकों और अभियानों को ही संकट में नहीं डालते, बल्कि हमें नुकसान पहुंचाने के लिए दुश्मनों को भी ऐसे उपकरणों और सूचनाओं से लैस करते हैं."
बुधवार को नाम ना ज़ाहिर करते हुए अमरीकी अधिकारियों ने कहा था कि आपराधिक जांच में पता लगाया जाएगा कि ये फ़ाइलें विकीलीक्स के पास पहुंचीं.
अधिकारियों ने कहा कि इस जांच में ये भी पता लगाने की कोशिश होगी कि आखिर ये खुलासा सीआईए के अंदर से हुआ है या बाहर से.
ये दस्तावेज़ 2013 से 2016 के बीच के बताए जा रहे हैं. हालांकि सीआईए ने इन दस्तावेज़ों की सत्यता की पुष्टि नहीं की है.
सुरक्षा को लेकर चिंता
सीआईए के एक पूर्व निदेशक माइकल हेडेन ने बीबीसी से कहा, "जो हमने पढ़ा अगर वो सही है तो यह सीआईए के वैध विदेशी ख़ुफ़िया अभियानों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, तकनीकों और प्रक्रियाओं के लिहाज से अपूर्णीय क्षति मालूम होती है."
उनके अनुसार, "इसने हमारे देश और मित्र देशों को और असुरक्षित बना दिया है."
बुधवार को उन टेक्नोलाजी कंपनियों ने प्रतिक्रिया दी जिनके उपकरणों में कथित रूप से सीआई ने सेंध लगाई है.
एप्पल ने कहा, "आज के आईफ़ोन में जो टेक्नोलॉजी इस्तेमाल हो रही है वो उपभोक्ताओं को उपलब्ध डाटा सुरक्षा में सबसे उम्दा है. हम लगातार इसे और मज़बूत कर रहे हैं."
निशाने पर टीवी और एड्रायड फ़ोन
सैमसंग एफ़ 8000 सिरीज़ के टेलीविज़न सेटों की सुरक्षा में कथित रूप से सेंध लगाई गई थी. कंपनी का कहना है, "उपभोक्ताओं की निजता और हमारे उपकरणों की सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है."
सार्वजनिक दस्तावेज़ों में दावा किया गया है कि सीआईए ने माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल करने वाले निजी कम्प्यूटरों को निशाना बनाने के लिए मालवेयर बनाया था.
माइक्रोसॉफ़्ट ने कहा है, "हम इस ख़बर से वाक़िफ़ हैं और इसकी जांच कर रहे हैं."
एंड्रायड फ़ोन में घुसपैठ करने और उन्हें नियंत्रित करने के दावे पर गूगल की प्रतिक्रिया थी, "हमें पूरा भरोसा है कि क्रोम और एंड्रायड में जो सुरक्षा उपाय और अपडेट किये जा रहे हैं वो इन कथित ख़तरों से मुकाबला करने में सक्षम हैं."
विकीलीक्स का दावा है कि पिछले साल सीआईए ने "ज़ीरो डे" नाम से 24 एंड्रॉयड हथियार बनाए थे.
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