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जुर्म कबूलने से इंकार किया कश्मीर के तनवीर ने
- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
अमरीका में एक नाबालिग बच्ची के साथ यौन दुर्व्यवहार के आरोप में गिरफ़्तार कश्मीरी युवक ने ख़ुद को बेगुनाह कहते हुए इस आरोप को स्वीकार करने से इनकार किया है.
ये मामला अब ग्रैंड जूरी के सामने रखा जाएगा.
काफ़ी मुश्किलों के बाद वीज़ा लेकर भारत से न्यूयॉर्क के सैरानेक लेक इलाके में वर्ल्ड स्नो शू चैंपियनशिप या बर्फ़ पर होनेवाली रेस में शामिल होने पहुंचे तनवीर हुसैन को एक मार्च को गिरफ़्तार कर लिया गया था और फिर दो दिनों बाद उन्हें ज़मानत मिली थी.
हुसैन के वकील ब्रायन बैरेट ने बीबीसी को बताया कि मंगलवार को सरकारी पक्ष ने उन्हें गुनाह कबूल करने का विकल्प दिया था जिसके बाद वो दो सौ डॉलर का जुर्माना देकर वापस भारत लौट सकते थे.
अमरीकी क़ानून के तहत इसे प्ली डील (Plea Deal) कहते हैं जिसके तहत गुनाह कबूल कर लेने पर मामला आगे नहीं जाता है और सज़ा भी काफ़ी कम हो जाती है, लेकिन उनके रिकॉर्ड पर गुनहगार का ठप्पा लग जाता है.
वकील का कहना था, "हुसैन ने सरकारी पक्ष के ऑफर को स्वीकार नहीं किया क्योंकि उनका कहना था कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया जिसके लिए वो अपनी ग़लती स्वीकार करें."
बैरेट का कहना था कि ऐसे में अब सरकारी वकील को अगले छह महीनों के अंदर एक ग्रैंड जूरी का गठन करना होगा और अदालत में मामले की पूरी सुनवाई होगी.
ग़ौरतलब है कि हुसैन को अमरीकी दूतावास ने वीज़ा देने से इनकार कर दिया था और उस मामले को राष्ट्रपति ट्रंप के उस आदेश से जोड़ कर देखा गया था जिसके तहत सात मुसलमान बहुल देशों से आनेवालों पर रोक लग गई थी और कई लोगों का मानना था कि मुसलमान होने की वजह से इस वीज़ा को नामंज़ूर किया गया है.
सैरानेक लेक मिडिल स्कूल के छात्रों ने स्थानीय सेनेटरों को कई पत्र लिखकर हुसैन को वीज़ा दिए जाने की अपील की थी और फिर अमरीकी कार्यकर्ताओं और सेनेटरों के दबाव के बाद उन्हें अमरीका आने का वीज़ा मिला था.
वहां पहुंचने पर तनवीर हुसैन और उनके दोस्त आबिद ख़ान का स्थानीय समुदाय ने एक सेलिब्रिटी की तरह स्वागत किया था.
उनकी गिरफ़्तारी के बाद सैरानेक के पुलिस प्रमुख चार्ल्स पॉटहैस्ट ने बीबीसी को बताया था कि तनवीर हुसैन पर आरोप है कि उन्होंने एक बारह साल की बच्ची का गहरा चुंबन (passionate kiss) लिया और कपड़ों के उपर से ही उनके निजी अंगों को छुआ.
पुलिस प्रमुख का कहना था, "इसमें किसी तरह की ज़बर्दस्ती का मामला नहीं है और न ही लड़की की तरफ़ से कोई आरोप लगा है. हमने ये मामला दोनों की उम्र में जो फ़र्क है उसे देखते हुए दर्ज किया है."
पुलिस प्रमुख का कहना था कि घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोगों की शिकायत के बाद उन्होंने इस मामले की जांच की और उसके आधार पर उन्होंने आरोप दर्ज कर लिया.
सरकार की तरफ़ से हुसैन को एक वकील भी मुहैया करवाया गया है.
वकील बैरेट का कहना था कि मुकदमे के फ़ैसले तक अमरीका में रहने का खर्च तनवीर को ख़ुद ही उठाना होगा लेकिन साथ ही उन्होंने बताया कि स्थानीय समुदाय के कुछ लोग उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं.
एक स्थानीय परिवार ने ही पांच हज़ार डॉलर की उनकी ज़मानत की राशि भी भरी थी और तनवीर को रहने की जगह दी थी.
हुसैन की वीज़ा अवधि भी छह महीने की है और वकील का कहना था कि अगर तबतक मामले की सुनवाई नहीं होती है तो वीज़ा को आगे बढ़ाने के लिए भी अर्ज़ी दाखिल करनी होगी.
इस आरोप के तहत सात साल तक की सज़ा हो सकती है.
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