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पश्चिम बंगाल से इसबार रिकार्ड मंत्री | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल के बारे में एक बहुत पुरानी कहावत है कि बंगाल जो आज सोचता है वह बाक़ी देश कल यानी एक दिन बाद सोचता है. लेकिन पश्चिम बंगाल को केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्य से आने वाले आठ मंत्रियों की तादाद तक पहुँचने में 62 साल लग गए. आज़ादी के बाद पहली बार केंद्र में बंगाल के आठ मंत्री बने हैं. इनमें वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और रेल मंत्री ममता बनर्जी कैबिनेट दर्जे की मंत्री हैं. अन्य छह राज्यमंत्री तृणमूल कांग्रेस के खाते में गए हैं. लेकिन ये बात दिगर है कि राज्य में समुद्री तूफ़ान 'आइला' की तबाही के बीच इस रिकार्ड की चर्चा नहीं है. पश्चिम बंगाल के इतिहास में पहले कभी भी किसी केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक साथ आठ मंत्री शामिल नहीं हुए हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में सबसे अधिक छह मंत्री रहे थे, लेकिन वह भी एक साथ नहीं थे. उसके बाद केंद्र में राज्य से कभी तीन तो कभी चार मंत्री रहे. जवाहर लाल नेहरु और राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भी राज्य से तीन-तीन मंत्री ही थे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में राज्य से चार मंत्री थे. बंगाल के विकास को तरजीह वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी कहा है कि इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में बंगाल के सबसे अधिक मंत्री शामिल हुए हैं. इससे साफ़ है कि केंद्र सरकार बंगाल के विकास को तरजीह दे रही है. तृणमूल के छह राज्यमंत्रियों के नाम हैं-चौधरी मोहन जटुआ, दिनेश त्रिवेदी, शिशिर अधिकारी, सौगत राय, सुलतान अहमद और मुकुल राय. केंद्र में एक साथ इतने मंत्री होने की वजह से राज्य के लोगों को भी उम्मीद है कि बंगाल के विकास की गति तेज़ होगी. एक व्यापारी जितेन गांगुली हैं, "बंगाल से पहले कभी इतने मंत्री नहीं बने थे. नतीजतन राज्य का वैसा विकास नहीं हो सका. लेकिन इस बार मंत्री ज़्यादा होने की वजह से विकास परियोजनाएं तेज़ होने की उम्मीद है." राज्य के अधिकतर व्यापारिक संगठनों ने भी ऐसी ही उम्मीद जताई है. बंगाल चैंबर ऑफ़ कामर्स के प्रवक्ता का कहना है कि अब राज्य के चौतरफा विकास की संभावनाएं बढ़ गई हैं. पहले दो या तीन से ज्यादा मंत्री नहीं होते थे. लेकिन अब पर्यटन और जहाज़रानी जैसे मंत्रालय राज्य के हिस्से आने की वजह से इन क्षेत्रों के समुचित विकास की उम्मीद है. उनका कहना है, "राज्य में पर्यटन क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं. स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काफ़ी कुछ किया जाना है. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग में बंगाल का राज्यमंत्री होने से यहां इस क्षेत्र में सुधार की उम्मीद है." पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में राज्य के दो कैबिनेट मंत्री थे. प्रणव मुखर्जी और प्रियरंजन दासमुंशी. लेकिन उस सरकार में बंगाल से कोई राज्य मंत्री नहीं बना था. कई की उम्मीदों पर पानी फिरा
हालाँकि कांग्रेस पार्टी के प्रदेश नेताओं को उनकी पार्टी के तीन सांसदों के मंत्री बनाए जाने उम्मीद थी. इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी की पत्नी दीपा दासमुंशी और मालदा उत्तर सीट से जीतने वाली मौसम रुबी नूर के नामों की चर्चा थी. रुबी पूर्व मंत्री ग़नी ख़ान चौधरी की भांजी हैं. कांग्रेस विधायक दल के नेता डाक्टर मानस भुइयां कहते हैं, "मंत्री बनाना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है, अगले मंत्रिमंडल विस्तार में पार्टी के कुछ और सांसदों को भी शामिल किया जा सकता है." वो आगे कहते हैं, "मंत्रियों की तादाद का रिकार्ड तो बना ही है, इस बार तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी के नाम भी एक रिकार्ड दर्ज हो गया है और वो मनमोहन सिंह सरकार मे सबसे कम उम्र (54 वर्ष) की कैबिनेट मंत्री बनी हैं." बंगाल के लोगों को मंत्रियों की इस लंबी फ़ौज से भले विकास की उम्मीद बंधी हो, राज्य में सत्तारुढ़ वाममोर्चा के नेता इससे शंकित हैं. माकपा नेताओं को लगता है कि यह तमाम मंत्री मिलकर राज्य सरकार को हर मुद्दे पर कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करेंगे. माकपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, "इतने मंत्री होना राज्य के लिए गौरव की बात है, लेकिन उनको अपने राजनीतिक हितों की बजाय राज्य के विकास को प्राथमिकता देनी होगी. उसी हालत में आम लोगों को इस रिकार्ड का फ़ायदा मिल सकेगा." |
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