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नवीन पटनायक तीसरी बार मुख्यमंत्री बने | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा विधानसभा के चुनावों में शानदार जीत के बाद नवीन पटनायक ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. इसके साथ ही राज्य में लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड नवीन पटनायक के नाम हो गया. अन्य 20 मंत्रियों ने भी उनके साथ शपथ ली. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार उड़ीसा में अधिक से अधिक 22 सदस्यों का मंत्रिमंडल गठित किया जा सकता है. बुधवार को नवीन पटनायक ने राज्यपाल एमसी भंडारे से मुलाक़ात करके राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया था. इसके बाद राज्यपाल ने पटनायक को उनकी पार्टी के बहुमत के आधार पर नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. नए चेहरों पर ध्यान कैबिनेट दर्जे में दो नए चेहरे शामिल किए गए, जो पिछली सरकार में नहीं थे. जबकि राज्य स्तर के मंत्रियों में अधिकतर नए चेहरे है. कैबिनट दर्जे में 11 मंत्री बनाए गए हैं उनमें दो नए चेहरे हैं, जबकि राज्य दर्जे के नौ मत्रियों में से एक को छोड़कर आठ नए चेहरे हैं. मंत्रिमंडल में कई युवा विधायकों को भी जगह दी गई है. अपनी अप्रत्यशित जीत के बाद नए मंत्रिमंडल के गठन के साथ ही नवीन पटनायक ने कुछ संदेश देने की कोशिश की है. भ्रष्टाचार के आरोप और विवादों में घिरे विधायकों को नए मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया गया है, जबकि पिछले मंत्रिमंडल में कई मंत्रियों को विवादों की वजह से इस्तीफ़ा देना पड़ा था. उनमें से किसी को भी शामिल नहीं किया गया है. नवीन पटनायक ने उन नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी है, जो चुनाव से ठीक पहले उनकी पार्टी में आए थे. विश्लेषकों के अनुसार नवीन पटनायक ने चुनावी मजबूरी के तहत दल बदल कर आने वाले नेताओं को टिकट तो दे दिया था, लेकिन मंत्री नहीं बनाकर बेहतर संदेश देने का प्रयास किया है. नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल ने राज्य की 147 विधान सभा सीटों में से 103 सीटें जीती हैं. जबकि उनकी सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने चार और सीपीआई ने एक सीट पर विजय प्राप्त की है. चुनाव से कुछ हफ़्ते पहले बीजू जनता दल के अपनी पुरानी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी से पल्ला झाड़ लेने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर सकेगी और सरकार बनाने में नवीन पटनायक को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. |
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