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वाम की वजह से कांग्रेस को फ़ायदा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो ने 15वीं लोकसभा के चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद स्वीकार किया है कि जनता ने तीसरे मोर्चे को राष्ट्रीय स्तर पर एक विश्वसनीय और व्यवहारिक विकल्प के रुप में स्वीकार नहीं किया है. पार्टी की हार के कारणों पर पोलित ब्यूरो की हुई बैठक में माना कि जनता ने कांग्रेस को जनादेश दिया है, ऐसे में वे ज़िम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाएंगे. पोलित ब्यूरो की सोमवार को हुई बैठक के बाद मंगलवार को जारी बयान में कहा गया, "कांग्रेस पार्टी की जीत की वजह राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना, आदिवासी वन अधिनियम और उन जैसी समाजिक कल्याण के कार्यक्रम रहे, जो वामपंथी पार्टियों के ज़ोर पर तैयार किए गए थे." पोलित ब्यूरो ने पश्चिम बंगाल और केरल में पार्टी के ख़राब प्रदर्शनों के लिए राष्ट्रीय और प्रांतीय मुद्दों को ज़िम्मेदार माना है. हालाँकि चुनाव के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा था कि पार्टी की हार राष्ट्रीय मुद्दों की वजह से हुई. कांग्रेस की जीत की वजह पोलित ब्यूरो के अनुसार कांग्रेस को अल्पसंख्यक और धर्मनिरपेक्ष समूहों के उन लोगों का समर्थन मिला, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से दूर रखना चाहते थे. दूसरी ओर भाजपा की हार के कारणों पर टिप्पणी करते हुए पोलित ब्यूरो का कहना था, "जनता ने भाजपा को सांप्रदायिक एजेंडों और ग़लत आर्थिक नीतियों की वजह से नकारा है." उनका कहना था कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और पीलीभीत से भाजपा के नवनिर्वाचित सांसद वरुण गांधी के भड़काऊ भाषणों ने भी चुनावों को प्रभावित किया. पोलित ब्यूरो ने पार्टी की पश्चिम बंगाल और केरल में मिली करारी हार की समीक्षा करते हुए स्वीकार किया है कि पिछले लोक सभा की तुलना में इन दो राज्यों में पार्टी को 25 सीटें गँवानी पड़ीं और16 सीटों पर सिमट कर रह गए. |
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