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वरुण की 'सशर्त रिहाई' की अवधि बढ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार वरूण गाँधी के पैरोल (सशर्त रिहाई) की अवधि को दो हफ़्तों के लिए बढ़ा दिया है. वरुण गाँधी की सशर्त रिहाई की अवधि शुक्रवार को समाप्त हो रही थी. 16 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने वरुण को इस शर्त पर दो हफ़्तों के लिए रिहा करने का आदेश दिया था कि वे कोई भड़काऊ भाषण नहीं देंगे. वरुण पर आरोप है कि उन्होंने मार्च में चुनाव प्रचार के दौरान पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र में मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित रूप से भड़काऊ भाषण दिया था. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सर्शत रिहाई की अवधि बढ़ाने का आदेश दिया है. अब वो 14 मई तक पैरोल पर रहेंगे. इस मामले के प्रकाश में आने के बाद चुनाव आयोग के निर्देश पर वरुण गांधी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हुई थी. एफ़आईआर दर्ज होने के कुछ दिन बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (रासुका) लगाकर वरुण को जेल भेज दिया, जिसके ख़िलाफ़ वरुण में सुप्रीम कोर्ट में अपील की और सर्शत रिहाई पाई. चुनाव आयोग ने वरुण गांधी को भड़काऊ भाषण देने का दोषी पाया था. वरुण का कहना रहा है कि उन्होंने ऐसा भाषण कभी दिया ही नहीं था और उनके भाषण की जो सीडी जारी की गई है उसके साथ छेड़छाड़ की गई है. |
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