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मथुरा में अजित सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोक सभा के मथुरा संसदीय क्षेत्र में नेताओं के सामने अपना वर्चस्व साबित करने की चुनौती है. राष्ट्रीय लोक दल की ओर से अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी मथुरा सीट से अपनी सियासी पारी की शुरुआत कर रहे हैं. माना जा रहा है कि बेटे के कारण ये सीट अजित सिंह के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है. भाजपा गठबंधन से जयंत चौधरी को काफ़ी उम्मीद है, लेकिन इसी सीट से उनकी दादी गायत्री देवी और पिछले चुनाव में बुआ ज्ञानवती हार चुकी हैं. जयंत चौधरी इस मुद्दे पर सफ़ाई देते हैं कि वो परिस्थितियाँ और थीं और अब वे एकदम अलग है. उनका कहना है कि 16 मई को चुनाव नतीजों के साथ स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. दूसरी ओर मथुरा से कांग्रेस के मौजूदा सांसद मानवेंद्र सिंह और निर्दलीय विधायक के रूप में चुने श्यामसुंदर शर्मा बहुजन समाज पार्टी से मैदान में हैं. विकास पर विश्वास
मथुरा से बसपा के दो विधायक निर्वाचित हुए थे और श्यामसुंदर शर्मा के पार्टी में आने पर ये आंकड़ा तीन पर पहुँच गया है. बसपा उम्मीदवार मायावती सरकार के ब्रज के विकास के लिए घोषित 450 करोड़ रुपए के पैकेज को जनता के सामने रख रहे हैं. श्यामसुंदर शर्मा का कहना है कि ब्रजवासी सेवा, श्रम और विनम्रता को नीचा नहीं देखने नहीं देंगे. इस चुनाव में कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह यूपीए की सरकार की पाँच साल की उपलब्धियों पर वोट मांग रहे हैं. उनका कहना है, "यूपीए सरकार और मेरा निजी काम और छवि मेरे पक्ष में है." मानवेंद्र सिंह कहते हैं कि उनके विकास कार्यों ने मथुरा की जनता को प्रभावित किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें तीसरे चरण में क़रीब 50 प्रतिशत मतदान30 अप्रैल, 2009 | चुनाव 2009 'भाजपा-आरएलडी गठबंधन आगे है'01 मई, 2009 | चुनाव 2009 'हमला' मुंबई में ही मुद्दा नहीं बनता दिखता29 अप्रैल, 2009 | चुनाव 2009 मढा और बारामती का चुनावी गणित22 अप्रैल, 2009 | चुनाव 2009 | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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