कैबिनेट ने पदोन्नति में आरक्षण को मंजूरी दी

 मंगलवार, 4 सितंबर, 2012 को 15:09 IST तक के समाचार
मनमोहन सिंह

सरकार को समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी ने इस कदम की आलोचना की है

सरकारी नौकरियों में प्रमोशन (पदोन्नति) में आरक्षण दिए जाने के प्रस्ताव को भारतीय कैबिनेट ने मंज़ूर दे दी है और इस पर सोशल मीडिया में जमकर बहस हो रही है.

जहाँ देश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण पहले से मौजूद है, वहीं ताजा प्रस्ताव के तहत नौकरी पा चुके अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के लिए पदोन्नति में भी आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा.

भारत का सुप्रीम कोर्ट प्रमोशन में आरक्षण को गैरकानूनी ठहरा चुकी है और यदि इसे लागू करना है तो सरकार को इस मामले को संसद में लाकर संसदीय मंजूरी लेनी होगी.

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उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सरकार कोयला घोटाले से परेशान है.

पार्टी के नेता रामगोपाल यादव का कहना था कि कोयला घोटाले से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा किया गया है.

बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती का कहना था कि अगर सरकार इस प्रस्ताव को संसद के वर्तमान सत्र में पारित नहीं कराती तो ये माना जाएगा कि सरकार गरीबों को ये सुविधा देना नहीं चाहती है.

असल में पूर्व में उत्तर प्रदेश में तत्कालीन मायावती सरकार ने सरकारी नौकरियों के प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के इस फैसले को खारिज कर दिया था जिसके बाद केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर विधेयक लाने का फैसला किया है.

सोशल मीडिया पर बहस

क्लिक करें बीबीसी हिंदी के फेसबुक पन्ने पर इस मुद्दे पर मिलीजुली प्रतिक्रिया आई है.

अंजनि उपाध्याय कहती हैं कि आरक्षण 'बिलकुल भी नहीं होना चाहिए क्योंकि ऐसा होने से पहले से काम कर रहे लोगो के मन में कुंठित भावनाए आएँगी, जिससे विभागीय काम सुचारू रूप से नहीं चल पायेगा .. ये तो बहुत ही घातक होगा.'

लेकिन शशि भूषण सिंह चौहान की राय अलग है. वो कहते हैं कि भारत में लोकतंत्र है ही नहीं और ऐसे में आरक्षण की आवश्यकता है ताकि सभी लोगों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित हो सकें.

शैलेश श्रीवत्स इस पर कटु आलोचना करते हैं और कहते हैं कि ऐसी स्थिति मेंरिटायरमेंट मे भी आरक्षण होना चाहिए जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को समय से पहले रिटायर किया जाना चाहिए.

मुकेश कटारे कहते हैं कि कांग्रेस सरकार ने ध्यान भटकाने के लिए कैबिनेट में ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है क्योंकि सरकार के सामने कुर्सी बचाए रखने की चुनौती है.

अभिषेक दीक्षित कहते हैं कि इस समस्या का समाधान तब होगा जब ऊंची जातियां आवाज उठाएगी , गुजरों ने रेल और सड़क जाम करके अपनी ताकत दिखाए है. ठाकुर ,ब्राह्मण और क्षत्रिय मिलकर आवाज बुलंद करे तो ये सरकार जरुर सुनेगी और आरक्षण का प्रस्ताव हटाएगी.

अशोक दुसाध आरक्षण का समर्थन करते हैं और कहते हैं ' प्रोमोशन में आरक्षण तो कोई रोक नहीं सकता ,ये तय है ! फिर 'मेरिट्वालों' के लिए बड़ी समस्या पैदा हो जायेगा !क्या करें फिर ,मेरी सलाह ,आपलोग अमेरिका चले जाओ मेरिट की क़द्र न ह हो(क्योंकि वहां भी निजी और सरकारी संस्थानों में डाइवरसिटी कानून लागू है ,यानि जिस समुदाय का प्रतिनिधित्व कम हो उसे उचित समायोजन की व्यस्था ) तो कोई बात नहीं ,टैक्सी तो चला ही सकते है ,इंडियन 'मेरिटवालो' से ज्यादा पैसा मिलेगा ,वैसे कनाडा भी बुरा नहीं है.'

उधर ट्विटर पर भी इस मुद्दे पर सरकार के प्रस्ताव का मजाक उड़ाया जा रहा है #suggestionForReservations के नाम से लोग इस पर टिप्पणियां कर रहे हैं.

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